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वैज्ञानिक सलाह: सरसों की 75% फलियां पीली होने पर ही सुबह कटाई करें किसान

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 15, 2018, 03:30 AM IST

भूपेंद्र सिहाग | मुंढ़ाल (भिवानी) देश भर में रबी की फसलों में सरसों की खेती करने वालों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश...
वैज्ञानिक सलाह: सरसों की 75% फलियां पीली होने पर ही सुबह कटाई करें किसान
भूपेंद्र सिहाग | मुंढ़ाल (भिवानी)

देश भर में रबी की फसलों में सरसों की खेती करने वालों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा के किसानों का अहम योगदान माना जाता है। हरियाणा के बाद मध्यप्रदेश के किसान सरसों उत्पादन में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। हरियाणा के किसानों की सरसों बहुत लोकप्रिय फसल है, क्योंकि सरसों की फसल कम सिंचाई व कम लागत में दूसरी फसलों की अपेक्षा अधिक मुनाफा दे जाती है। ऐसे में इस बार सरसों की बिजाई में प्रदेश के किसान भले ही विभागीय लक्ष्य 6.12 लाख हेक्टेयर को पूरा न कर पाए हों। मगर गत वर्ष की तुलना में इस बार प्रदेश में एक लाख 24 हजार 440 हेक्टेयर अधिक सरसों की बिजाई हुई है, जो खूब लहलहा रही है। इस बार प्रदेश में 5 लाख 87 हजार 140 हेक्टेयर में सरसों खड़ी है। जबकि गत वर्ष सरसों का यह आंकड़ा 4 लाख 62 हजार 700 हेक्टेयर पर रह गया था।

कृषि वैज्ञानियों का कहना है मार्च माह के दूसरे सप्ताह में सरसों की कटाई शुरू हो जाएगी। सर्दी के मौसम ने भी इस बार सरसों की फसल का खूब साथ दिया है, जिससे प्रदेश के कृषि विशेषज्ञ इस बार औसतन 25 मण प्रति एकड़ सरसों उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जबकि गत वर्ष प्रदेश में प्रति एकड़ सरसों उत्पादन का ये आंकड़ा औसतन 18.7 मण रहा था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के किसान ने इस बार सरसों की फसल को तैयार करने में औसतन प्रति एकड़ पांच से सात हजार रुपए खर्च किए हैं। किसान अब फसल पकने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कई बार मार्च में भी मौसम गड़बड़ा जाता है, लेकिन ठंडक यदि यूं ही बनी रही तो फसल बंपर होने की पूरी संभावना है। इसी तरह गेहूं की फसल भी इस बार बंपर हो सकती है।

5,87,140

प्रदेश में जिला अनुसार ये है सरसों की बिजाई/ एक हजार हेक्टेयर

जिला बिजाई लक्ष्य 2017-18 2016-17

हिसार 73.00 69.15 64.5

फतेहाबाद 15.00 13.83 14.1

सिरसा 50.00 50.65 41.6

भिवानी 162.0 153.0 112.0

रोहतक 15.00 11.25 09.7

झज्जर 37.00 32.31 25.3

सोनीपत 04.00 03.50 01.3

गुड़गांव 15.00 11.20 09.6

मेवात 32.00 30.65 21.3

पलवल 05.00 03.50 01.7

फरीदाबाद 02.00 03.00 00.5

करनाल 01.00 03.57 01.6

पानीपत 01.00 02.00 00.4

कुरुक्षेत्र 02.00 02.75 01.8

कैथल 01.00 02.33 00.9

अंबाला 02.00 03.00 01.2

पंचकुला 04.00 03.80 01.5

यमुनानगर 03.00 03.20 02.2

जींद 08.00 45.00 04.3

महेंद्रगढ़ 100.00 72.35 83.00

रेवाड़ी 80.00 67.10 63.5

भिवानी सरसों उत्पादन में सरताज

अबकी बार भिवानी जिले में 1.62 लाख हेक्टेयर सरसों बिजाई का लक्ष्य था, जिस पर 1.53 लाख हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई। जबकि भिवानी में गत वर्ष एक लाख 12 हजार 700 हेक्टेयर में सरसों की बिजाई रिकार्ड हुई थी। जो गत वर्ष की तुलना में इस बार 40.3 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। इसके साथ ही भिवानी जिला सरसों उत्पादन में हरियाणा का सरताज माना जाता है। प्रदेश में सरसों बिजाई की इसी कड़ी में महेंद्रगढ़ जिले में 72.35 हजार हेक्टेयर, हिसार में 69.15 हजार हेक्टेयर, रेवाड़ी में 67.10 हजार हेक्टेयर, सिरसा में 50.65 हजार हेक्टेयर व जींद जिले में 45.00 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल खूब लहलहा रही है।

हेक्टेयरमें लहलहा रही है सरसों की फसल प्रदेश भर में गत वर्ष में 1,24,440 हेक्टेयर अधिक

बिजाई

समय पर करें कटाई

कृषि विकास अधिकारी राकेश रोहिल्ला ने बताया कि मार्च के माह में सरसों की कटाई शुरू हो जाती है। ऐसे में किसान ध्यान दें कि सरसों की अच्छी पैदावार लेने के लिए फसल में 75 फीसदी फलियां पीली होने पर ही कटाई शुरू कर दें। फसल अधिक पकने पर फलियों के चटकने की आशंका बढ़ जाती है। इसके बाद तेल अंश एवं सरसों के दानों में वजन कम होना शुरू हो जाता है। सरसों की कटाई सुबह करनी चाहिए ताकि फलियां चटकने से दाने का बिखराव कम से कम हो।

अच्छा रहा मौसम

कृषि विभाग के एडीओ विवेक कुमार के अनुसार प्रदेश में सरसों आर्द्र एवं शुष्क दोनों ही प्रकार के वातावरण क्षेत्रों में बीजी जाती है। वातावरण का प्रभाव सरसों के पौधों के लिए अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक महत्व रखता है। सरसों की फसल में फूल आने और दाना बनने के समय बादलवाई और कोहरे का मौसम विपरीत प्रभाव डालता है। मगर इस बार प्रदेश भर में ठंड सरसों की फसल के अनुकूल रही है, जिससे किसान खास उम्मीद जगाए बैठे हैं कि अबकी बार अन्य वर्षें की तुलना से सरसों की अधिक पैदावार होगी।

बेवजह गेहूं की फसल में किसी तरह का स्प्रे न करें

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एग्रो भास्कर | पानीपत

प्रदेशभर में हुई हलकी से मध्यम व तेज बरसात ने गेहूं की करीब 25 लाख हेक्टेयर में लहलहा रही फसल को नया जीवन दे दिया है। गेहूं एवं जौ निदेशालय करनाल के वैज्ञानिकों ने सर्वे किया है, जिसमें पता चला है कि गेहूं की फसल अबकी बार बंपर हो सकती है। क्योंकि इस बरसात से गेहूं का रंग दो दिन में ही गहरा हरे रंग का हो गया है। इस बरसात की सख्त दरकार थी, क्योंकि पारा लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में अचानक लौटी ठंडक ने बड़ी राहत दी है। निदेशालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब पीला रतुआ की बीमारी का कोई प्रकोप नहीं होने वाला। समय निकल चुका है और अब यह बीमारी नहीं आ सकती। कुछ स्थानों पर इसकी सूचना मिली थी, जहां कृषि विभाग की ओर से सतर्कता बरतने को कहा गया है।

अब नहीं आ सकता पीला रतुआ:गेहूं निदेशालय के निदेशक डॉ. जीपी सिंह का कहना है कि पीला रतुआ का समय निकल चुका है। अब यह बीमारी नहीं आएगी। किसानों को बेवजह दवाई का छिड़काव नहीं करना चाहिए। यदि किसानों को लगे कि लक्षण पीला रतुवा की ओर इशारा कर रहे हैं तो तुरंत गेहूं निदेशालय करनाल में संपर्क कर सकते हैं या फिर संबंधित कृषि अधिकारी से संपर्क कर जांच करा लें। बिना जांच कराए दवाई का स्प्रे करना ठीक नहीं है।

लाख हेक्टेयरमें होती है गेहूं की फसल, 118 लाख टन है अबकी बार उत्पादन लक्ष्य प्रदेश में

बेवजह पीला रतुवा की दवाई का स्प्रे न करें किसान, अब नहीं आ सकता पीला रतुआ

50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध करा दी जाएगी दवाई, वैज्ञानिकों ने कहा

एक करोड़ है बजट

कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुरेंद्र दहिया ने बताया कि कृषि विभाग ने पीला रतुआ से गेहूं की फसल को बचाने के लिए पहले ही आदेश जारी कर दिए थे। सभी जिला कृषि उप निदेशकों को आदेश जारी किए गए हैं कि जहां भी इस तरह की बीमारी के लक्षण भी दिखें, वहां दौरा किया जाए। टीम भेजें और पता लगाएं कि किस तरह की फसल को दिक्कत है। जैसे ही उन्हें पता चले कि पीला रतुआ के लक्षण गेहूं की फसल में हैं तो कृषि विभाग से संपर्क कर लें। कृषि विभाग ने दवाई के लिए करीब एक करोड़ का बजट बनाया है, समय आने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है। दवाई किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर देने की योजना है। किसानों का कहना है कि अबकी बार फसल अच्छी दिख रही है, इससे उत्पादन पिछले सालों की तुलना में बढ़ने की संभावना है।

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