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माफिया दे रहे धमकी - चै तो जमीन ठेके पै दे द‌्यो, न्हीं हमनै तो लेणी आवै सै

Dainik Bhaskar

Mar 26, 2018, 04:15 AM IST

Sonipat News - पानीपत, यमुनानगर व करनाल के गांवों से समझें हकीकत भास्कर टीम | हरियाणा पानीपत जिले में रेत खनन पूरी तरह बैन...

माफिया दे रहे धमकी - चै तो जमीन ठेके पै दे द‌्यो, न्हीं हमनै तो लेणी आवै सै
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पानीपत, यमुनानगर व करनाल के गांवों से समझें हकीकत

भास्कर टीम | हरियाणा

पानीपत जिले में रेत खनन पूरी तरह बैन है, फिर भी जीटी रोड से 11 किमी दूर यमुना किनारे रक्सेड़ा खनन के लिए चर्चा में है। गांव की तरफ बढ़ने पर असहज करने वाले संकेत मिलते हैं। बार-बार ओवरटेक कर रहे लोग पहचान की तस्दीक करते हैं। दहशत की ये तस्वीर तब और साफ हो गई, जब भास्कर टीम गांव में पहुंची। ग्रामीणों से बात शुरू ही हुई थी कि चार लोग अनायास ही आ गए। कुछ देर बाद उनके जाने पर ग्रामीणों ने बताया कि डर के कारण वे अब तक अपनी बात नहीं कह पा रहे थे। धीरे-धीरे जमीन छिन जाने की कहानी जुबां पर आने लगी। बीच में कई बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं। सरपंच पंडित जयप्रकाश ने बताया कि रेत खनन के लिए जमीन ठेके पर देना नहीं चाहते, पर माफिया के डर व धमकी के कारण देनी पड़ती है। कोई न दे तो खेतों के आसपास से रेत उठाकर इतना मजबूर कर देते हैं कि जमीन देनी ही पड़ती है। यमुनानगर में आलम ये है कि रेत के लिए माफिया यमुना की धार को मोड़ देते हैं। ग्रामीण वेदीराम, कुलवंत, जयभगवान नंबरदार, सांवर त्यागी, राममेहर, पवन व हरदीप ने कहा कि गांव में बच्चों की पढ़ाई व लोगों की सेहत सब चौपट है। सस्ते श्रम के चक्कर में युवाओं को माफिया नशे में फंसा रहे हैं। गांव में शराब निकालने की भट्ठियां लग गई हैं। रेत ढुलाई के लिए दिन-रात दौड़ रहे डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से घरों में दरारें आ चुकी हैं। सड़कें-गलियां टूट चुकी हैं। किसी को टीबी हो गई तो किसी की आंखें जा चुकी हैं। त्वचा के रोग तो लगभग सभी को हैं। साथ लगते सिम्भलगढ़ व बुढ़नपुर के किसान भी पलायन को मजबूर हैं, पर पैसे व विकल्प न होने के कारण नहीं कर पा रहे।

यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज से सोनीपत तक 171 किलोमीटर यमुना के प्रवाह क्षेत्र में रेत माफिया का राज कायम है। यह आम सी सूचना है। पर भास्कर की टीम ने जब खनन प्रभावित गांवों का दौरा किया तो आर्थिक व सामाजिक स्थिति में बदलाव के कई चौंकाने वाले सच सामने आए। पढ़िए... यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत के सबसे ज्यादा खनन प्रभावित 157 गांवों से रिपोर्ट...

किसानों का दर्द- खनन से नजदीक आ रही नदी , बदतर हो रही आर्थिक-सामाजिक स्थिति

अनाज नहीं, यहां दूर-दूर तक रेत की खेती

रेत खनन से प्रभावित 157 गांवों में हर दिन खेती की जमीन कम हो रही है। गहरी खुदाई से यमुना का दायरा गांव की तरफ बढ़ता जा रहा है। रेत उठाने और उड़ने से फसल खराब हो रही है। विभिन्न कारणों से यमुनानगर में 7000, करनाल में 3200, पानीपत में 2500 व सोनीपत में 3500 एकड़ खेती प्रभावित है। यहां अब रेत की खेती हो रही है।

यमुनानगर में सांसद सैनी के खेत में भी खनन कर गए माफिया

पानीपत, सोमवार 26 मार्च, 2018

ऐसे बदल रहा भूगोल, बर्बाद हो रही जमीन

1 मजबूरी: जब माफिया रेत उठाते हैं तो वो आसपास के खेतों के नीचे से रेत निकाल लेते हैं। खनन के कारण ठोकरें खत्म हो गई हैं और हर साल ज्यादा जमीन कटती जा रही है। खेती योग्य जमीन भी रेतीली हो जाती है और अगले वर्ष मजबूरी में उसे रेत के लिए देना पड़ता हैं।

3 ...और माफिया की चालाकी: वैध पॉइंट्स पर रेत उठाने की मंजूरी 10 फीट तक होती है। पर माफिया जेसीबी लगाकर 30 से 40 फीट गहरी खुदाई कर रहे हैं। उन्हें यह भी पता है कि इतनी खुदाई के बाद जमीन खेती योग्य नहीं रहेगी और अगले वर्ष भी उन्हें सस्ते में रेत के लिए मिल जाएगी।

हरियाणा

यमुनानगर के नजदीक रणजीतपुर, जो कि हरियाणा-हिमाचल का बार्डर एरिया है, वहां कुरुक्षेत्र सांसद राजकुमार सैनी के खेत हैं। खनन माफिया ने उनके खेतों को भी नहीं बख्शा और यहां के करीब 4 एकड़ खेतों से खनन जनवरी माह में किया गया। जब इस बात का सांसद को पता चला तो उन्होंने प्रेसवार्ता कर अपनी पीड़ा सुनाई।

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2 विवशता: ग्रामीणों के अनुसार खेती के लिए जमीन दी जाए तो हर साल 10 से 15 हजार रुपए मिलते हैं। रेत उठाने के लिए उसी जमीन के माफिया एक वर्ष के 35 से 40 हजार रुपए देते हैं। इसके बाद यहां कभी खेती नहीं हो पाती। इसलिए हर साल माफिया को जमीन देना विवशता है।

चैत्र, शुक्ल पक्ष-दशमी, 2075

युवाओं को नशे का बनाया गुलाम

1 नशे के बदले काम: रेकी से लेकर खनन के लिए स्थानीय युवाओं की जरूरत पड़ती है। माफिया फायदे के लिए बेरोजगार युवाओं को नशे की लत लगा रहे हैं। माफिया युवाओं से नशे के बदले में काम कराते हैं।

3 रेत व नशे ने बढ़ाया क्राइम: नशे के कारण इन गांवों में क्राइम बढ़ रहा है। चोरी, मारपीट और लूट की घटनाएं होती रहती हैं। गांवों में कई-कई गुट बन गए हैं। खनन कार्य काफी लोग करते हैं और उनमें झगड़ा होता रहता है। जिससे फायरिंग आदि की घटनाएं होती रहती हैं। क्षेत्र में लोग दहशत में रहते हैं।

जिंदगी पर दहशत के 3 सबसे बड़े असर




2 गांव में नशे का काम: इन गांवों में कुछ लोगों ने नशे काे कारोबार बना लिया है। बाहर से चरस, गांजा और अफीम लाने लगे हैं। घरों में शराब भट्ठी लग गई हैं। 60 प्रतिशत युवा नशे में फंस कर गुलामी करने काे मजबूर हैं।

यमुनानगर में खनन माफिया इस तरह खत्म कर रहे खेती की जमीन। गुमथला घाट के पास से शाम में ड्रोन से ली गई यह तस्वीर हकीकत बयां कर रही है। फोटो | संजय झा

16200 एकड़ जमीन प्रभावित

जहां रेत का सीधे तौर पर काम हो रहा

8500 एकड़

2544 करोड़ का कारोबार

258 करोड़ से सरकार खुश

खनन से पूरे प्रदेश में प्राप्त राजस्व 800 करोड़

यमुना किनारे रेत से प्राप्त राजस्व 258 करोड़

प्रति ट्राली रेत का मूल्य 5000 रुपए

प्रति फीट रेत का मूल्य 4-5 रुपए

एक ट्राॅली पर खर्च करीब 1000 रुपए

एक महीने में अवैध कारोबार 212 करोड़

एक वर्ष में अवैध कारोबार 2544 करोड़

सरकार को राजस्व का नुकसान 2286 करोड़

ग्राउंड रिपोर्ट | पढ़िए पेज 6 पर

रेत उड़ने से फसल खराब हो रही

4000 एकड़

ठोकरें कटने व यमुना का पानी जाने से प्रभावित

3700 एकड़

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