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अंतिम सांसें खींचते वक्त वंशिका हाथ पकड़कर बोली- कहीं मत जाओ पापा

तीन साल की बच्ची की मौत के बाद सामान्य अस्पताल और उसके घर पर गमगीन माहौल रहा। पिता पवन ने दुखी मन से बताया कि रात को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:35 PM IST

तीन साल की बच्ची की मौत के बाद सामान्य अस्पताल और उसके घर पर गमगीन माहौल रहा। पिता पवन ने दुखी मन से बताया कि रात को अपने जन्मदिन की पार्टी में मेरे साथ नाची थी मेरी परी वंशिका, वह कुछ घंटों की ही महमान थी, उसने कभी ऐसा सोचा न था। झोलाछाप ने दस्त लगने पर बेटी को जो इंजेक्शन लगाया, उसने उसकी जान ले ली। मरने से पहले बेटी वंशिका के साथ उसने जो एक घंटा बिताया उन पलों को अब सोचता हूं, तो कलेजा फटने को हो जाता है। वंशिका सांसें खींच रही थी और आंखें निढाल थीं, वह उठाकर डॉक्टर के पास जाने लगा तो बेटी बोल- कहीं मत जाओ पापा मेरे पास बैठे रहाे।

दादा ने कहा घोर लापरवाही : दादा सुल्तान ने घटना के बाद सामान्य अस्पताल में बताया कि देव मेडिकल स्टाेर पर मौजूद आरोपी जगदीश ने मासूम बच्ची के साथ गलत किया। इलाज के नाम पर पौती की जान ही ले ली। बेटे पवन को यह तक नहीं बताया कि पौती वंशिका को कौन सा इंजेक्शन दिया।

31 दिसंबर को गिर गया था हाथ पर गर्म दूध : परिजनों ने बताया कि वंशिका के हाथ पर 31 दिसंबर 2017 को गर्म दूध गिर गया था। जिसके बाद से उसका इलाज चल रहा था और हाथ पर पट्टी की जाती थी। अब हाथ लगभग ठीक हो गया था।

29 जनवरी को पिता ने ली थी वंशिका सहित सेल्फी

वंशिका का 29 जनवरी को जन्मदिन था। पिता पवन ने पार्टी मनाने के बाद घर पर बैड के ऊपर बेटी वंशिका, बेटे व प|ी के साथ सेल्फी ली थी। सब बेहद खुश थे। आने वाले पहाड़ जैसे दर्द की किसी को आहट तक नहीं थी। घटना के बाद मृतक बच्ची का पिता पवन व दादा सुल्तान सिविल सर्जन डॉक्टर जसवंत पूनिया से मिला। डॉक्टर जसवंत पूनिया ने मामले को गंभीरता से लिया और फिर जांच सक्षम अधिकारी को दी।

इंजेक्शन किसका था सैंपल तक नहीं लिए

मामले में पुलिस व स्वास्थ्य विभाग सुस्त दिखे। आरोपी ने बच्ची को किस चीज का इंजेक्शन लगाया, उसके सैंपल तक नहीं लिए गए थे। जांच अधिकारी रणवीर ने कहा कि आरोपी स्टोर बंद करके फरार है। जल्दी ही बच्ची को जो इंजेक्शन लगाया, उसे भी कब्जे में लिया जाएगा। हाल में बच्ची का विसरा जांच के लिए लैब भेजा है।

नियम : बिना पर्ची दवा नहीं दे सकते: कई मेडिकल स्टोर संचालक दवा देने के साथ डॉक्टर भी बने हुए हैं। यह खुद ही मरीजों को दवा दे रहे हैं और इंजेक्शन लगाने से भी नहीं चूकते। जबकि नियम यह कहता है कि बिना डॉक्टर की पर्ची के केमिस्ट किसी को दवा नहीं दे सकता। बात मामले को लेकर संबंधित विभाग की करें तो शहर व जिले में कोई जागरूकता अभियान इसको लेकर नहीं चलाया जा रहा। मेडिकल स्टोरों की यदि सही ढंग से जांच हो तो यह लापरवाही पहले भी पकड़ी जा सकती थी। मामले पर सिविल सर्जन डॉक्टर जसवंत पूनिया ने कहा कि मेडिकल स्टाेर संचालक इस तरह से किसी को इंजेक्शन नहीं लगा सकता। डॉक्टर की देख रेख में यह कार्य होता है।

सोनीपत . मम्मी-पापा के साथ वंशिका। (फाइल फोटो)

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