3 बार टेंडर किए, फिर भी एसटीपी अपग्रेड करने को नहीं मिली एजेंसी, चौथी बार जारी किए टेंडर

Sonipat News - शहर में एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार एसटीपी अपग्रेड करने के लिए जलापूर्ति विभाग को एजेंसी नहीं मिल रही है। एजेंसी की...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:40 AM IST
Gohana News - haryana news 3 times tender still not found to upgrade stp the tender issued for the fourth time
शहर में एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार एसटीपी अपग्रेड करने के लिए जलापूर्ति विभाग को एजेंसी नहीं मिल रही है। एजेंसी की तलाश में विभाग ने चौथी बार टेंडर जारी किए हैं। टेंडर की शर्तों के कारण कोई भी एजेंसी कार्य करने के लिए आगे नहीं आ रही है। शर्तों के अनुसार एसटीपी एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार अपग्रेड किए जाने हैं। एसटीपी अपग्रेड करने का कार्य शुरू करने को लेकर औपचारिकताएं पूर्ण करने का कार्य भी एजेंसी ही करेगी। विभाग एजेंसी को पेमेंट का भुगतान भी एक मुश्त नहीं करेगा। एसटीपी अपग्रेड करने का कार्य आधा होने पर विभाग एजेंसी को आधी ही पेमेंट जारी करेगा। एसटीपी अपग्रेड करने में विभाग की अाेर से करीब आठ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

शहर में सीवर के पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए दो एसटीपी बने हुए हैं। एसटीपी में सीवर लाइनों से पहुंचने वाले पानी में बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 200 मिलीग्राम प्रति लीटर तक होता है। एसटीपी में सीवर के पानी को एमबीबीआर तकनीकी से ट्रीट किया जाता है। ट्रीटमेंट के बाद पानी में बीओडी स्तर 30 एमजी रहता है। एनजीटी ने विभाग को एसटीपी से ड्रेन में छोड़े जाने वाले पानी में बीओडी स्तर 10 एमजी तक रखने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के आदेशों पर एसटीपी अपग्रेड करने के लिए अधिकारियों ने बीते माह टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। पहली बार जारी किए गए टेंडर में किसी भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। एजेंसी की तलाश में अधिकारी तीन बार टेंडर जारी कर चुके हैं, लेकिन एक भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अधिकारियों ने अब चौथी बार टेंडर जारी किए हैं।

गोहाना. देवीपुरा स्थित एसटीपी, जिसे अपग्रेड किया जाना है। फोटो | भास्कर

भास्कर न्यूज | गोहाना

शहर में एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार एसटीपी अपग्रेड करने के लिए जलापूर्ति विभाग को एजेंसी नहीं मिल रही है। एजेंसी की तलाश में विभाग ने चौथी बार टेंडर जारी किए हैं। टेंडर की शर्तों के कारण कोई भी एजेंसी कार्य करने के लिए आगे नहीं आ रही है। शर्तों के अनुसार एसटीपी एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार अपग्रेड किए जाने हैं। एसटीपी अपग्रेड करने का कार्य शुरू करने को लेकर औपचारिकताएं पूर्ण करने का कार्य भी एजेंसी ही करेगी। विभाग एजेंसी को पेमेंट का भुगतान भी एक मुश्त नहीं करेगा। एसटीपी अपग्रेड करने का कार्य आधा होने पर विभाग एजेंसी को आधी ही पेमेंट जारी करेगा। एसटीपी अपग्रेड करने में विभाग की अाेर से करीब आठ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

शहर में सीवर के पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए दो एसटीपी बने हुए हैं। एसटीपी में सीवर लाइनों से पहुंचने वाले पानी में बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 200 मिलीग्राम प्रति लीटर तक होता है। एसटीपी में सीवर के पानी को एमबीबीआर तकनीकी से ट्रीट किया जाता है। ट्रीटमेंट के बाद पानी में बीओडी स्तर 30 एमजी रहता है। एनजीटी ने विभाग को एसटीपी से ड्रेन में छोड़े जाने वाले पानी में बीओडी स्तर 10 एमजी तक रखने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के आदेशों पर एसटीपी अपग्रेड करने के लिए अधिकारियों ने बीते माह टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। पहली बार जारी किए गए टेंडर में किसी भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। एजेंसी की तलाश में अधिकारी तीन बार टेंडर जारी कर चुके हैं, लेकिन एक भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अधिकारियों ने अब चौथी बार टेंडर जारी किए हैं।

10 वर्ष पूर्ण होने पर बदलवानी पड़ेगी मशीनरी

मुख्यालय की शर्तों के अनुसार दस वर्षों तक प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक चलाने के बाद एजेंसी का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। कार्यकाल पूरा होने से पहले एजेंसी को एसटीपी की संपूर्ण मशीनरी को बदलवानी पड़ेगी। मशीनरी को बदलवाने की लागत करोड़ों में होगी। इसी के कारण एजेंसी कार्य को करने में रुचि नहीं ले रही हैं।

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शहर में एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार एसटीपी अपग्रेड करने के लिए जलापूर्ति विभाग को एजेंसी नहीं मिल रही है। एजेंसी की तलाश में विभाग ने चौथी बार टेंडर जारी किए हैं। टेंडर की शर्तों के कारण कोई भी एजेंसी कार्य करने के लिए आगे नहीं आ रही है। शर्तों के अनुसार एसटीपी एनजीटी की नाॅर्म के अनुसार अपग्रेड किए जाने हैं। एसटीपी अपग्रेड करने का कार्य शुरू करने को लेकर औपचारिकताएं पूर्ण करने का कार्य भी एजेंसी ही करेगी। विभाग एजेंसी को पेमेंट का भुगतान भी एक मुश्त नहीं करेगा। एसटीपी अपग्रेड करने का कार्य आधा होने पर विभाग एजेंसी को आधी ही पेमेंट जारी करेगा। एसटीपी अपग्रेड करने में विभाग की अाेर से करीब आठ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

शहर में सीवर के पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए दो एसटीपी बने हुए हैं। एसटीपी में सीवर लाइनों से पहुंचने वाले पानी में बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 200 मिलीग्राम प्रति लीटर तक होता है। एसटीपी में सीवर के पानी को एमबीबीआर तकनीकी से ट्रीट किया जाता है। ट्रीटमेंट के बाद पानी में बीओडी स्तर 30 एमजी रहता है। एनजीटी ने विभाग को एसटीपी से ड्रेन में छोड़े जाने वाले पानी में बीओडी स्तर 10 एमजी तक रखने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के आदेशों पर एसटीपी अपग्रेड करने के लिए अधिकारियों ने बीते माह टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। पहली बार जारी किए गए टेंडर में किसी भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। एजेंसी की तलाश में अधिकारी तीन बार टेंडर जारी कर चुके हैं, लेकिन एक भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अधिकारियों ने अब चौथी बार टेंडर जारी किए हैं।

एजेंसी को किस्तों में पेमेंट देगा विभाग

विभाग की शर्तों के अनुसार एजेंसी को पेमेंट एक साथ नहीं की जाएगी। प्रॉजेक्ट का कार्य आधा पूर्ण होने पर विभाग एजेंसी को आधी पेमेंट जारी कर देगा। इसके बाद एजेंसी को किस्तों में पेमेंट का भुगतान किया जाएगा। विभाग आधी पेमेंट का भुगतान दस वर्षों तक किस्तों में करेगा। इसके साथ ही एजेंसी को एसटीपी अपग्रेड होने के बाद दस वर्षों तक सफलतापूर्वक चलाने भी होंगे। एसटीपी एनजीटी की नॉर्म के अनुसार कार्य नहीं करने पर विभाग एजेंसी की पेमेंट भी रोक देगा।

मुख्यालय को सूचित किया गया है


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