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49 गांवों ने भेजा था ठेके बंद करने का प्रस्ताव, प्रशासन ने 1 को दी मंजूरी

3 वर्ष पहले
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गांवाें में शराब ठेका बंद करने की मांग उठती है, लेकिन विभाग तरह-तरह के नियमाें का हवाला देकर अावेदन खारिज कर रहा है। इस साल भी जिले की 49 ग्राम पंचायतों ने शराब का ठेका नहीं खुलने के लिए आवेदन किया था। इनमें सात अावेदनाें काे ही स्क्रूटनी में रखा गया। अब एक गांव में ही ठेका बंद करने का फैसला लिया गया है। अधिकारियाें का कहना है कि अधिकतर प्रतिनिधियों ने विभाग द्वारा तय समय सीमा के बाद रिजॉल्यूशन दिया। कोई नियम पूरे नहीं कर पाए। अब ठेकों की दोबारा से निलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अप्रैल महीने में ठेकों की बोली लगाई जाएगी। पिछले साल सोनीपत आबकारी व कराधान विभाग प्रदेश में सबसे अधिक रेवेन्यू देने वाला जिला घोषित किया है।

गांव में दो साल पहले तक अवैध शराब बेचने का कोई केस नहीं होना चाहिए
42 पंचायतों का प्रस्ताव विभाग ने देखा ही नहीं
आबकारी व कराधान विभाग द्वारा गांवों में शराब ठेका नहीं खाेलने के लिए एक सत्र आगे के लिए प्रस्ताव मांगा जाता है। यह प्रस्ताव पंचायतों को पंचों के साथ बैठक कर कायदे से पास करना होता है। इसके बाद 30 सितंबर तक यह विभाग के स्थानीय कार्यालय में जमा कराना होता है। इसके बाद जमा कराने वालों के प्रस्ताव पर विभाग कोई ध्यान नहीं देता है। इस बार भी 42 सरपंचों ने 30 सितंबर के बाद विभाग को अपना प्रस्ताव दिया था। जिसे विभाग ने रिजेक्ट कर दिया।

दाे साल से नहीं हुआ अवैध शराब का मामला दर्ज
विभाग द्वारा निर्धारित समय के अंतर्गत सात गांवों ने रिजॉल्यूशन दिया था। नियम है कि तय समय सीमा में प्रस्ताव देने के बाद पिछले दाे साल में गांव में अवैध शराब बिकने का कोई मामला दर्ज न हुअा हाे। सातों गांवों की मुख्यालय ने जब रिकॉर्ड देखा तो छह में विभाग के नियम पूरे नहीं हाेने बताए गए। गोहाना के घिवाना गांव को ठेका नहीं खोलने के लिए हरी झंडी दी गई बाकी छह गांवों में ठेका इस साल भी खोला जाएगा। इन गांवों में गन्नौर का खिजरपुर अहीर जिसे किसी कारण से ईटीसी ने बंद कर रखा है। इसके अलावा सोनीपत का जुआं-1, दोदवा, बादशाहपुर माछरी, पुरखास राठी और झुंडपुर गांव शामिल है।

पिछले साल 50 प्रतिशत अधिक रेवेन्यू देने वाला जिला बना सोनीपत : वर्ष 2018-19 में आबकारी व कराधान विभाग सोनीपत प्रदेश में सबसे अधिक रेवेन्यू देने वाला जिला था। जिले के सभी करीब 120 ठेकों का रिजर्व प्राइस पिछले साल 166 करोड़ रुपए था। इन ठेकों को डीईटीसी सोनीपत ने 250 करोड़ रुपए में बेचा था।

ठेके खोलना बंद करना उच्च अधिकारियों का काम है

स्थानीय कार्यालय में जो भी आवेदन रिसीव होते हैं, उसे मुख्यालय तक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दिए जाते हैं। इसके बाद मुख्यालय के अधिकारी आगे का निर्णय लेते हैं। जैसा आदेश मिलता है, उसी तरीके से कार्य किया जा रहा है। सात आवेदनों में एक गांव में ठेका नहीं खोलने का आदेश दिया गया है। जिसके तहत कार्य किया जा रहा है। एनआर फुल्लै, डीईटीसी सोनीपत।

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