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फसल खराब होने पर किसानों को पूरे गांव की औसत पैदावार के आधार पर मिलेगा मुआवजा

Sonipat News - धान की फसल बरसात में खराब होने पर किसानों को गांव की औसत पैदावार के आधार पर बीमा कंपनी मुआवजा देगी। पहले किसान खेत...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:40 AM IST
Gohana News - haryana news compensation will be given on the basis of the average yield of the entire village on crop failure
धान की फसल बरसात में खराब होने पर किसानों को गांव की औसत पैदावार के आधार पर बीमा कंपनी मुआवजा देगी। पहले किसान खेत में जलभराव होने के 48 घंटे में आवेदन कर फसल बीमा योजना का लाभ उठाते थे। इस बार गांव के कुछ किसानों की फसलों में जलभराव होने पर उन्हें बीमा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने इस बारे में पत्र जारी कर कृषि अधिकारियों को दिशानिर्देश भी जारी कर दिए हैं।

धान क्षेत्र की मुख्य व्यापारिक फसल है। प्रत्येक वर्ष औसतन 32 हजार एकड़ में धान की खेती की जाती है। बरसात सीजन में खेतों से पानी की निकासी सही ढंग से नहीं होने से फसलों में जलभराव हो जाता है। जलभराव से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अधिकांश किसान फसल बीमा करवाते हैं। नियमानुसार खेत में जलभराव होने के 48 घंटों में किसानों को कृषि अधिकारियों को इस बारे में सूचित करना होगा। मुआवजा राशि के लिए किसानों को एक आवेदन भी भरना पड़ता है। आवेदन करने पर बीमा कंपनी के अधिकारी खेतों की गिरदावरी कर नुकसान के प्रतिशत के आधार पर किसानों को मुआवजा राशि जारी करते हैं। कई बार ऐसी स्थिति होती है कि बरसात का पानी गांव के खेतों में कुछ हिस्सों में ही भरता है। इस बार किसानों को धान की फसलें खराब होने पर संपूर्ण गांव की औसत पैदावार कम होने पर ही मुआवजा जारी किया जाएगा। एकल किसान का जलभराव से नुकसान होने पर उसे फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा राशि का लाभ नहीं मिलेगा।

धान मुख्य व्यापारिक फसल, प्रत्येक वर्ष औसतन 32 हजार एकड़ में धान की खेती की जाती है

गोहाना क्षेत्र एक गांव में पानी के अंदर फसल काटते मजदूर। (फाइल फोटो)

बीते वर्ष करीब 12 हजार एकड़ में हुआ था जलभराव

बीते वर्ष क्षेत्र में करीब 12 हजार एकड़ में जलभराव हो गया था। जलभराव से बनसासा, कथूरा, रिंढाणा, धनाना, छतैहरा, कहेल्पा आदि गांवों में किसानों की फसलों का नुकसान हुआ था। खेतों में अधिक पानी होने के कारण ड्रेनों से समय पर पानी की निकासी नहीं हुई थी। पानी की निकासी होने में करीब एक माह का समय लग गया था। सरकार द्वारा जारी किए गए पत्र में धान की फसल को पानी से नुकसान नहीं होने की श्रेणी में रखा गया है। इसके चलते संपूर्ण गांव की औसत पैदावार बीते वर्षों की अपेक्षा कम होने पर ही किसानों को खराब हुई फसल का मुआवजा मिलेगा।

मुआवजे को लेकर दिशानिर्देश जारी


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