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सरकार के खिलाफ किसान हुए मुखर, एनएच- 352ए के मुआवजे को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

2 वर्ष पहले
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एनएच-352 ए का विराेध बढ़ने लगा है। चार गांव के किसान बुधवार को सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ गए। किसानों ने कहा जब तक मुआवजा देने में किए जा रहे भेदभाव को दूर नहीं किया जाता, वह अपनी जमीन का मुआवजा नहीं उठाएंगे। इसके साथ जमीन में किसी भी सरकारी अधिकारी व मशीनरी को घुसने भी नहीं देंगे। किसानों ने कहा कि एनएच के लिए अधिग्रहण की गई जाहरी गांव की जमीन के अधिकारियों ने चार मुआवजे तय किए हैं। चार मुआवजे तय होने के बावजूद भी पड़ोसी गांव जटवाड़ा की जमीन जितना मुआवजा नहीं दिया जा रहा। पिछले 12 दिन से धरना दे रहे किसानों समाधान नहीं होने पर रेलवे ट्रैक पर बैठने की चेतावनी तक दी है।

किसानों ने कहा कि जटवाड़ा गांव में किसानों को मुआवजा तीन करोड़ 46 लाख रुपए प्रति एकड़ दिया जा रहा है, जबकि कई जगह पर तो जटवाड़ा गांव के खेतों से जाहरी गांव के किसानों के खेत सटे हुए हैं। जबकि मुआवजा देने में बड़ी त्रुटि है। जाहरी गांव की जमीन के जो चार मुआवजे तय किए हैं, वह प्रति एकड़ कहीं पर 79 लाख, कहीं पर 97 लाख, कहीं पर एक करोड़ सात लाख और कहीं पर एक करोड़ 32 लाख रुपए तय किया गया है। धरने पर पूर्व सरपंच विनोद, सरपंच पति नरेश, सुमित, बलराम सहित अन्य मौजूद रहे।

किसानों का विरोध कहा समाधान नहीं हुआ तो रेलवे ट्रैक पर बैठने को होंगे मजबूर

सोनीपत. मुआवजे को लेकर धरना दे रहे लोगों के समर्थन में धरने पर पहुंचे गन्नौर विधायक कुलदीप शर्मा।

किसानों ने कहा भू-माफियों की सेटिंग

धरने पर बैठे किसानों ने आरोप लगाया कि गोहाना रोड से जीटी रोड तक जो बाइपास निकाला गया है, यहां काफी समय से भू माफिया सक्रिय है। भू माफिया यहां बड़े स्तर पर जमीन खरीद रहे हैं। इन लोगों ने उनकी जमीन का सर्कल रेट नहीं बढ़ने दिया। आरोप लगाया कि 2013 से सर्कल रेट नहीं बढ़ाया गया। यदि सर्कल रेट बढ़ाया जाता तो उनकी जमीन का मुआवजा भी बढ़ जाता। ऐसा न होने के कारण मजबूर होकर धरने पर बैठना पड़ रहा है।

सरपंच बोले- रोजी रोटी है यह जमीन हमारी

जाहरी गांव के पूर्व सरपंच राजसिंह ने कहा कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है। जमीन का मुआवजा चार गुणा दिया जाना चाहिए। भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के तहत ऐसा नहीं किया जा रहा, जिस जमीन से उनके पूर्वज और हाल में वह पेट पालते रहे हैं, वह जमीन सरकार औने-पौने दामों में छीनने का प्रयास कर रही है। सरकार से उनकी मांग है कि हर किसान को पांच करोड़ रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। जमीन सब की बराबर है।

किसान के लिए उसकी जमीन ही सब कुछ

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान रोहताश बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने धरने को समर्थन दिया है। किसान के लिए उसकी जमीन ही सब कुछ है। सरकार किसानों की जमीन लेने से पहले उनके भविष्य की सोचे। किसान के पुत्र को सरकारी नौकरी व पांच करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। इसके साथ रॉयल्टी भी।

गन्नौर विधायक ने कहा उनका धरने का समर्थन

गन्नौर विधायक कुलदीप शर्मा ने कहा कि जहारी, देवडू, मुरथल व कुराड़ गांव के किसानों ने जो धनरा मोनी बाबा के आश्रम के पास शुरू किया है, इस धरने को वह पूरी तरह से समर्थन देते हैं। इसके साथ किसानों की बात सरकार तक पहुंचनें का काम शुरू कर दिया है। विधानसभा में सीएम को इस बारे में उन्होंने अवगत कराया। सीएम ने कहा कि वह इसका लिखित में ज्ञापन उन्हें दे। अब किसानों के बीच आकर उनकी हर समस्या सुनी है, यह समस्या और मांग सीएम के पास चिट्ठी लिखकर भेजी जाएगी।

जमीन का मुआवजे में भेदभाव, जबकि परियोजना एक

किसान राजबीर ने कहा कि वह अपनी जमीन का मुआवजा तभी उठाएंगे, जब सरकार मुआवजे में किए जा रहे भेदभाव को दूर कर देगी। सभी किसानों को बराबर मुआवजा मिलना चाहिए। मुरथल गांव में एक जगह पर तीन करोड़ 89 लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जा रहा है तो एक जगह पर एक करोड़ 24 लाख। देवडू गांव में एक करोड़ 53 लाख रुपए। अबदुलपुर में 66 लाख रुपए प्रति एकड़। जटवाड़ा में तीन करोड़ 46 लाख रुपए प्रति एकड़। जबकि जाहरी गांव में चार मुआवजे दिए जा रहे हैं। जब परियोजना एक है तो मुआवजा भी सबको एक ही दिया जाए।

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