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लघु सचिवालय परिसर में बनेगी हरसैक जीआईएस लैब

2 वर्ष पहले
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केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। एनजीटी की लगातार सख्ती के बाद प्रदेश में प्रदूषण बढ़ाने वाले सिस्टम को रोकने के लिए सरकार द्वारा प्रदेश के हर जिले में हरसैक जीआईएस लैब की स्थापना की जाएगी। इसकी स्थापना से जिले के दूर दराज गांव में कहीं पर भी अगर किसान पराली जलाएगा तो उसकी तस्वीर सैटेलाइट से कैद हो जाएगी। जिसके बाद हिसार स्थित हरियाणा सैटेलाइट सेंटर के सर्वर से पिक्चर जारी कर दी जाएगी। इस एंडेस इमेेज के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। इससे पर्यावरण के संरक्षण को बल तो मिलेगा ही साथ ही कई और फायदा भी हैं। सैटेलाइट के माध्यम से जिले के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सकेगी। खेतों में किस रकबे में कौन सी फसल उगाई गई है, इसकी जानकारी भी लिया जा सकेगा। जिससे भावांतर भरपाई योजना, प्राकृतिक आपदा से खराब होने वाली फसलों का ब्यौरा आदि भी आसानी से हासिल हो सकेगा। शहर में सड़क, सीवरेज, पेयजल सहित ड्रेनेज आदि की स्थिति के बारे में पता चल सकेगा। इस सैटेलाइट की स्थापना में जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफार्मेशन सेंटर) के आधार पर किया जा रहा है। जिसमें तमाम प्रकार की जानकारी मौजूद होगी। सरकार द्वारा प्रदेश के सभी जिलों का रिकॉर्ड पहले ही ऑनलाइन किया जा चुका है। ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी चीजों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि पराली आदि जलाने वाले के नाम पत्र व्यवहार किया जा सके।

लैटीट्यूड व लॉगीट्यूड का होगा प्रयोग
तकनीक को डेवलप करने में दिशा देशांतर रेखांकित किया जाएगा। यह तकनीक एक तरह से सरल भाषा में जीपीएस की तरह ही समझ सकते हैं। लेकिन सैटेलाइट की स्थापना में जीपीएस के साथ इसकी भी जरूरत पड़ती है। जिसके कारण लैटीट्यूड और लॉगीट्यूड का प्रयोग किया जाएगा। जिसे जीआईएस से जोड़ दिया जाएगा। इसे दूसरी भाषा में थीमेटिक मैप भी कहा जाता है।

लघु सचिवालय परिसर में मुफ्त में जगह मुहैया कराएंगे
पिंसिपल सेक्रेटरी गवर्नमेंट आफ हरियाणा साइंस एंड टैक्नोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा जारी पत्र में डीसी को निर्देश दिया गया है कि लघु सचिवालय परिसर में मुफ्त में जगह मुहैया कराएंगे। कार्यालय खुले और बंद रहने पर यहां की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी उनकी रहेगी। जीपीएस सिस्टम से लेकर प्रिंटर और पानी व बिजली आदि मुहैया कराना है। लैब की स्थापना के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, इन्हीं के द्वारा किया जाएगा।

इन सभी को जीआईएस आधारित सिस्टम से जोड़ा जाएगा : इस सिस्टम से शहरी और ग्रामीण दोनों हिस्सों की व्यवस्था जुड़ जाएगी। जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज और डिस्पोजल सिस्टम, ड्रेनेज, इलेक्ट्रिसिटी, रोड, रेलवे लाइंस, पार्किंग, नहर आदि का डाटा अपलोड कर दिया जाएगा। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी पूरी तरह से डीसी की होगी।

लैब के लिए जल्द ही शुरू की जाएगी प्रक्रिया
मुख्यालय से लैब की स्थापना के लिए पत्र व्यवहार किया गया है। दो दिन पहले ही लेटर आया है। जो भी निर्देश हैं, संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। जल्द ही प्रक्रिया पर कार्य शुरू किया जाएगा। यह बहुत ही अच्छा निर्णय है। - डाॅ. अंशज सिंह, डीसी सोनीपत।

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