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प्रकाश पर्व पर गुरु गोबिंद सिंह की गौरवमयी गाथा का किया गुणगान, गुरुदारों में दिनभर चला कीर्तन दरबार

Sonipat News - सुजान सिंह पार्क स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में रविवार को सिख धर्म के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह महाराज...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:45 AM IST
Sonipat News - haryana news praise of the glorious saga of guru gobind singh on the festival of light the kirtan darbar
सुजान सिंह पार्क स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में रविवार को सिख धर्म के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह महाराज का प्रकाशोत्सव सिख समाज के लोगों ने धूमधाम से मनाया। गुरुद्वारा प्रबन्ध कमेटी श्री सिंह सभा और में सजे दरबार में कीर्तन भाई निर्मल सिंह, भाई मंगल सिंह, कीर्तन स्त्री सत्संग सभा भाई जतिंद्र सिंह मदान, ढाडी जत्था ज्ञानी जसपाल सिंह मान व नवयुग स्कूल बच्चों द्वारा शबद कीर्तन व गुरुवाणी का गुणगान किया गया।

प्रबंधक सरदार विक्रम सिंह ने बताया कि समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में गुरुद्वारा पहुंचकर सेवा कार्य किया। इस दौरान कीर्तन में दरबार में प्रकट्यो पुरख अंगमंड़ा वरयाम अकेला, वाह-वाह गोविन्द सिंह आपे गुरु चेला का शबद एवं बोले सो निहाल सतश्री अकाल का जयकारा गूंजता रहा। सुबह से शाम तक गुरु ग्रन्थ साहिब के सामने लोग मत्था टेकते रहे। कार्यक्रम के बाद गुरुद्वारा में लंगर शुरू किया गया। प्रधान सरदार हरजीत सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। मौके पर सरदार कुलदीप सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुरिंद्र सिंह, हरगोबिंद सिंह, भगवंत सिंह, त्रिलोकन सिंह आदि मौजूद रहे।

सोनीपत. गुरुद्वारे में गूंजता रहा जो बोले सो निहाल का नारा।

यह है इतिहास

ज्ञान जसपाल सिंह ने बताया कि गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के 10वें और अंतिम गुरु माने जाते हैं। उनका जन्म 22 दिसंबर, 1666 में हुआ था। वह नौवें गुरु तेग बहादुर जी के पुत्र थे। उनको 9 वर्ष की उम्र में गुरुगद्दी मिली थी। धर्म, संस्कृति व राष्ट्र की आन -बान और शान के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। उन्होंने अपने पिता का बदला लेने के लिए तलवार हाथ में उठाई थी। उनके बड़े पुत्र बाबा अजीत सिंह और एक अन्य पुत्र बाबा जुझार सिंह ने चमकौर के युद्ध में शहादत प्राप्त की थी। जबकि छोटे बेटों में बाबा जोरावर सिंह और फतेह सिंह को नवाब ने जिंदा दीवारों में चुनवा दिया था। बाद में गुरु गोबिन्द सिंह ने गुरु प्रथा समाप्त कर गुरु ग्रंथ साहिब को ही एकमात्र गुरु मान लिया।

गुरु गोबिंद सिंह के आदर्शों पर चलकर समाज को आगे बढ़ाना होगा : जैन

सोनीपत| शहरी स्थानीय निकाय, महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन ने कहा कि 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी ने हमेशा अपने आदर्शों पर चलते हुए धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।

हमें आज उनके आदर्शों पर आगे बढ़ते हुए समाज को नई दिशा दिखानी होगी। वह गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सुजान सिंह पार्क में गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर उपस्थित संगत को संबोधित कर रही थीं। जैन ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जहां विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, वहीं वे स्वयं एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की। वे विद्वानों के संरक्षक थे। उनके दरबार में 52 कवियों तथा लेखकों की उपस्थिति रहती थी, इसीलिए उन्हें संत सिपाही भी कहा जाता था। उन्होंने ने सदा प्रेम, एकता, भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन, सरदार मंजीत सिंह, गुरुद्वारे के प्रधान हरदीप सिंह, कुलदीप सिंह उपप्रधान, सचिव सुरेंद्र सिंह, संयुक्त सचिव गुरेंदर सिंह, मंगल सिंह सहित काफी संख्या में गणमान्य उपस्थित थे।

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