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चीनी की बिक्री कम होने से समय पर नहीं हो रहा है क्षेत्र के किसानों को गन्ने का भुगतान

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 04:16 AM IST

Sonipat News - शुगर मिल आहुलाना में तैयार चीनी की बाजार में मांग कम है। मिल की चीनी नहीं बिकने से मिल प्रशासन को किसानों को गन्ने...

Gohana News - haryana news sugarcane sale is not happening on time sugarcane payment to sugarcane farmers
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शुगर मिल आहुलाना में तैयार चीनी की बाजार में मांग कम है। मिल की चीनी नहीं बिकने से मिल प्रशासन को किसानों को गन्ने की पेमेंट करने में बजट की कमी पड़ रही है। इसके चलते क्षेत्र के किसानों को बीते दो माह से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। मिल पर किसानों का करीब 80 करोड़ रुपए बकाया है।

मिल का पेराई सत्र बीते वर्ष दिसंबर माह में आरंभ हुआ था। पेराई के लिए गन्ने की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मिल करीब 38 लाख क्विंटल गन्ने की बोंडिंग की है। मिल में अब तक करीब 24.84 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है। पेराई सत्र के दौरान मिल में 238110 क्विंटल चीनी की उत्पादन हो चुका है। इसमें से अब तक केवल 7500 बैग ही चीनी बिकी है। बाकी चीनी मिल के स्टोर में ही रखी हुई है। चीनी की कम बिक्री के कारण मिल किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान नहीं कर पा रहा है। मिल अधिकारियों के अनुसार चीनी की बिक्री से मिलने वाले राजस्व से ही किसानों को गन्ने का भुगतान किया जाता है। चीनी की बिक्री नहीं होने पर किसानों को पैसे के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। नियमानुसार चीनी मिल में गन्ना डालने के बाद मिल को 14 दिनों में किसान को उसका भुगतान करना होता है। मिल प्रशासन ने किसानों को अब तक केवल 10 जनवरी तक का ही भुगतान किया है। समय पर भुगतान नहीं होने से मिल पर किसानों की बकाया राशि करोड़ों रुपए में पहुंच गई है।

गोहाना. शुगर मिल आहुलाना में गन्ने से भरी ट्राॅली खाली करते कर्मचारी। फोटो |भास्कर

कई बार आंदोलन कर चुके हैं किसान

मिल द्वारा गन्ने का भुगतान नहीं करने को लेकर किसान कई बार रोष प्रकट कर चुके हैं। गन्ने का भुगतान करने को लेकर किसान कई बार मिल का कांटा भी बंद कर चुके हैं। तीन दिल पहले भी किसानों ने मिल का करीब एक घंटे तक कांटा बंद रखा था। किसानों का कहना है कि पेमेंट को लेकर अधिकारियों से मिलने अथवा आंदोलन करने पर उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। गन्ने की कटाई का कार्य मजदूरों द्वारा किया जाता है। खेत में काम करवाने के बाद मजदूरों को तय समय पर ही मजदूरी का भुगतान करना होता है। जबकि किसानों को मिल से पैसा नहीं मिल रहा है।

डबल रिफाइंड नहीं होने के कारण बाजार में कम मांग

बाजार में ग्राहक डबल रिफाइंड चीनी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। जबकि शुगर मिल में जो चीनी तैयार होती है, वह रिफाइंड नहीं होती है। बाजार में डबल रिफाइंड चीनी 3560 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रही है। जबकि आहुलाना मिल की चीनी का भाव 3100 रुपए प्रति क्विंटल है। कम भाव होने के बावजूद भी ग्राहक इस चीनी को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। चीनी कम बिकने के कारण मिल में बीते वर्ष का भी चीनी का स्टॉक बचा हुआ है। मिल में बीते वर्ष की 106564 क्विंटल चीनी बची हुई है।

जल्द ही बकाया राशि का कुछ प्रतिशत भुगतान किया जाएगा

मिल द्वारा किसानों को करीब 80 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है। किसानों के खाते में पेमेंट जारी करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। जल्दी ही किसानों को कुल बकाया राशि का कुछ प्रतिशत भुगतान कर दिया जाएगा। मिल की चीनी की बाजार में कम मांग होने के कारण बजट की कमी हो जाती है। किसानों की गन्ने की संपूर्ण पेमेंट का भुगतान करने के लिए मुख्यालय से बजट की भी मांग की है। -मंजीत दहिया, कैन मैनेजर, शुगर मिल, आहुलाना

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