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प्रदेश के किसान 15 जून के बाद कर सकते हैं पीआर धान की रोपाई

रोहताश शर्मा/सतनाम सिंह | करनाल/अम्बाला भूमि के लगातार दोहन से मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। पीआर...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:05 AM IST
प्रदेश के किसान 15 जून के बाद कर सकते हैं पीआर धान की रोपाई
रोहताश शर्मा/सतनाम सिंह | करनाल/अम्बाला

भूमि के लगातार दोहन से मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। पीआर वैराइटी की नर्सरी रोपाई का सही समय चल रहा है। 25 मई के बाद बासमती की नर्सरी की रोपाई कर सकते हैं। बासमती व पीआर धान के अच्छे उत्पादन के लिए मृदा का स्वास्थ्य सुधार करना अति आवश्यक है इसके लिए मिट्टी की जांच करानी चाहिए। मृदा नमूना लेने के लिए यह उचित समय है क्योंकि अधिकतर गेंहू की फसल की कटाई हो चुकी है और खेत खाली हैं। मृदा नमूना परीक्षण के आधार पर ही अपने खेतों में पोषक प्रबंधन करना चाहिए। ऐसा करने से बासमती व पीआर धान की फसल की लागत में कमी की जा सकती है व गुणवत्ता युक्त उत्पादन भी प्राप्त किया जा सकता हैं साथ ही मृदा स्वास्थ्य भी अच्छा रखा जा सकता है। बासमती व पीआर धान की खेती के लिए खेत का समतल होना अति आवश्यक है। किसान भाई अपने खेत को अभी लेजर लेवलर की सहायता से समतल अवश्य कर लें।

पीआर धान की नर्सरी की रोपाई का सही समय, स्वस्थ नर्सरी के लिए करें बीजोपचार

पहले मिट्टी की जांच करवाएं, इसके बाद धान की रोपाई करें

इन वैराइटी की सिफारिश कर रहे हैं कृषि वैज्ञानिक

पीआर धान में एचकेआर-47, एकेआर-48, एचकेआर-127 व 128, पूसा-126 व 127, पूसा-1637

मृदा नमूना लेने के लिए यह प्रकिया अपनाएं

एक एकड़ भूमि में से 5 जगह से नमूना लेना चाहिए। प्रत्येक खेत का नमूना अलग-अलग लेना चाहिए। मृदा का नमूना मेड़ से एक मीटर अंदर से लेना चाहिए और मिट्टी के ऊपर से घास हटा देना चाहिए। खुरपी की सहायता से वी के आकार का 6 इंच गहरा कट लगाकर मिट्टी को हटा देना चाहिए। एक समान मोटाई की परत 6 इंच गहराई तक निकाल कर बाल्टी में रखनी चाहिए तथा शेष चार स्थानों से भी उपरोक्त विधि द्वारा मृदा नमूना लेकर अच्छी तरह से मिला लेना चाहिए। इस नमूने की मात्रा में से एक नमूना बैग में लगभग 500 ग्राम मात्रा रखकर व नमूने की विवरण पर्ची लगाकर अपने पास के मृदा जांच केन्द्र पर जमा करके मृदा परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त करें।

धान का बीजोपचार

एक एकड़ धान की रोपाई के लिए 100 वर्ग मीटर नर्सरी एरिया की आवश्यकता है। इसके लिए 5 किलो धान के बीज चाहिए। बीज उपचार के लिए आठ लीटर पानी लें, उसमें 8 ग्राम बेविस्टीन व 1 ग्राम स्ट्रेप्टो साइक्लीन दवाई डालकर उसमें 5 किलो बीज को 18 घंटे के लिए भिगो दें। 18 घंटे बाद बीज को पानी से बाहर निकाल कर गीली बोरी में 24 घंटे के लिए अंकुरित हाने के लिए रख दें। आधा किलो जिंक जुताई से पहले डाल दें।

डीआरएस अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं


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