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सरकार ने नगर निगम से 26 गांवों काे बाहर करने की मांग पर कमेटी से मांगा रिव्यू प्रस्ताव

नगर निगम में शामिल 26 गांवाें काे बाहर निकालने की मांग काे लेकर चल रहे धरने-प्रदर्शन पर सरकार ने दोबारा रिव्यू करने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:45 AM IST

सरकार ने नगर निगम से 26 गांवों काे बाहर करने की मांग पर कमेटी से मांगा रिव्यू प्रस्ताव
नगर निगम में शामिल 26 गांवाें काे बाहर निकालने की मांग काे लेकर चल रहे धरने-प्रदर्शन पर सरकार ने दोबारा रिव्यू करने कमा फैसला लिया है। महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय ने सरकारी के आदेशों का हवाला देकर आयुक्त रोहतक मंडल को तय निर्देश व मापदंडों का निरीक्षण करके गठित कमेटी से औचित्यपूर्ण प्रस्ताव मांगा है। गांवों के प्रतिनिधियों द्वारा बनाई निगम विरोधी समिति ने 30 अप्रैल तक फैसला न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी।

ऐसे में सोमवार को डीसी विनय सिंह ने धरना दे रहे समिति पदाधिकारियों के साथ बैठक की और सरकार के निर्देश की जानकारी दी। प्रतिनिधियों ने कमेटी के फैसले का इंतजार करने और तब तक शांतिपूवर्क धरना जारी रखने की बात कही है। सोमवार को इनेलो की ओर से जहां दुष्यंत चौटाला धरना स्थल पर पहुंचे तो वहीं आप की ओर से दिल्ली के विधायक सुरेन्द्र सिंह ने भी समर्थन दिया। इस बीच दोपहर को विरोध समिति प्रतिनिधियों की एक बार फिर डीसी विनय कुमार से बैठक हुई। जिसमें मामले के निपटान को लेकर अब दो मई को पुन: बैठक करने का फैसला लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता रोहतक मंडल के आयुक्त करेंगे।

डीसी ने नगर निगम विराेधी समिति पदाधिकारियों के साथ बैठक कर किया आश्वस्त

सोनीपत . धरने पर समिति अध्यक्ष महेन्द्र सिंह कटारिया संबोधित करते हुए।

परेशानी : लगातार लटक रही वार्डबंदी

सरकार ने जुलाई में नगर परिषद से सोनीपत को नगर निगम बना दिया। इसके बाद फिर से जब पार्षदों के एक बड़े समूह ने निगम चुनाव को लेकर मुहिम छेड़ी तो अक्टूबर 2016 में एक कमेटी गठित की गई। जनवरी में एक एजेंसी को सर्वे का काम सौंपा गया। बड़ी बात ये रही कि संबंधित एजेंसी काफी समय तक तो निगम में लेटर लेने ही नहीं पहुंची। जो काम अप्रैल तक हो जाना चाहिए था वह अप्रैल-2018 बीतने के बाद भी परेशानी बरकरार है। शहर में नई वार्डबंदी से बने 22 वार्ड वार्डबंदी के मुताबिक निगम क्षेत्र की जनसंख्या अब चार लाख 98 हजार तक पहुंच गई है। क्षेत्र को 22 हिस्सों में बांटा गया है, यानि नगर परिषद के समय जहां 31 वार्ड के लिए जनप्रतिनिधि चुने जाते थे, अब 22 वार्ड के लिए जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे।

दो साल से लंबित है नगर निगम चुनाव

करीब दो साल से ज्यादा समय से नगर निगम बिना जन प्रतिनिधियों के अधिकारियों के फैसले अनुसार चल रहा है। नगर निगम बनने के बाद वार्ड अनुसार पार्षदों का चुनाव नहीं हुआ है। चुनाव को लेकर बड़ा रोड़ा बनी वार्डबंदी की प्रक्रिया भी एक बार फिर से अटक गई है। निगम अधिकारियों की ओर से फाइनल की गई वार्ड बंदी पर 26 आपत्ति दर्ज करवाई गई है। वहीं दूसरी ओर निगम में शामिल किए गए 26 गांवाें के लाेग नगर निगम विरोध समिति बनाकर निगम का विराेध कर रहे हैं। पिछले दाे सप्ताह से सेक्टर 15 में धरना चल रहा है। सेक्टर 23 वार्ड 20 से 22 तक बंटा वार्डबंदी ने सेक्टर-23 को तीन भागों 20, 21 व 22 वार्ड में बांट दिया है। इसका असर सेक्टर के विकास पर भी पड़ सकता है। इससे कहीं ज्यादा परेशानी यह होगी कि अब एक ही सेक्टर के लोग अलग-अलग वार्ड में होंगे। बात इतनी नहीं कि सिर्फ वोट डालने की जगह बदलेगी। सबसे बड़ा संकट ये है कि हजारों लोगों के पते बदल जाएंगे। वार्ड बदलने का मतलब है कि घर का पता बदल जाएगा। कई गांवों में भी ऐसी दिक्कत है।

8 से 10 मई तक सुनी जाएगी आपत्ति

नगर निगम आयुक्त सुशील कुमार ने बताया है कि वार्डबंदी को लेकर 26 आपत्ति दर्ज करवाई गई है। उनके निपटारे के लिए एडीसी आमना तस्नीम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है जो आठ नौ एवं दस मई को शिकायतों पर सुनवाई कर निपटारा करेगी। वहीं निगम में शामिल गांवों की आपत्तियों को लेकर कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी।

निगम में जाने से गांवों को नुकसान पहुंचा है लोग पशु पालन की स्थिति भी खराब हुई है। इसलिए निगम को भंग किया जाना चाहिए। दो मई को होने वाली बैठक में कोई सहमति नहीं बनती है तो समिति सदस्य मिलकर आगामी आंदोलन की घोषणा करेंगे। तब तक शांतिपूर्वक धरना जारी रहेगा।’- महेंद्र कटारिया, प्रधान, नगर निगम विराेधी समिति।

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