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रेत के डंपरों ने तोड़ा यमुना बांध, सिंचाई विभाग की एफआईआर तक नहीं असर

यमुना से रेत खनन का ठेका लेने वाली कंपनियों ने यमुना के बांध को डेमेज कर दिया है। बांध जगह-जगह से टूटने की वजह से...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:10 AM IST
रेत के डंपरों ने तोड़ा यमुना बांध, सिंचाई विभाग की एफआईआर तक नहीं असर
यमुना से रेत खनन का ठेका लेने वाली कंपनियों ने यमुना के बांध को डेमेज कर दिया है। बांध जगह-जगह से टूटने की वजह से मानसून सीजन में बाढ़ संकट आ सकता है। हरकत में आए सिंचाई विभाग अधिकारियों ने यमुना नदी का बांध तोड़ने के आरोप में चार खनन कंपनियों व रेत स्टॉक के मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। बावजूद इसके खनन कंपनी, रेत स्टॉक व रेत का कारोबार कर रहे भू माफियों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

दैनिक भास्कर ने मामला दर्ज कराए जाने के बाद हालात की ग्राउंड रिपोर्ट की। यमुना नदी के गढ़मिरकपुर से बड़ौली, गढ़ी असदपुर तक जाने वाले बांध पर गुरुवार को मात्र 35 मिनट में 46 रेत से भरे ओवरलोडिड डंपर निकले। ये सभी स्टॉक से रेत भरकर यमुना के बांध से निकल रहे है। हैरानी की बात है कि एफआईआर दर्ज कराने वाले सिंचाई विभाग ने इस रास्ते पर किसी प्रकार के गतिरोधक तक नहीं लगाए और न ही सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी इन वाहनों को रोकने के लिए यहां मिला। हर साल जिस बांध की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग लाखों खर्च करता है, वह कच्चा बांध बुरी तरह क्षति ग्रस्त हो गया है।


यमुना बांध से 35 मिनट में निकले 46 रेत से लदे आेवरलोडिड डंपर

राई. यमुना नदी के बांध से निकलते रेत से लदे डंपर।

एफआईआर के बाद शांत सिंचाई विभाग

सिंचाई विभाग के अधिकारी एफअाईआर दर्ज कराकर शांत बैठ गए। रेत स्टॉक व खनन कंपनी पर इस एफआईआर का कोई असर दिखाई नहीं दिया। गुरुवार को जब ग्राउंड रिपोर्ट पर निकले तो यहां मात्र 35 मिनट में 46 रेत से लदे डंपर यमुना के बांध के ऊपर से निकले। दो बजे से लेकर 2:35 तक 46 रेत के वाहन बड़ौली की तरफ से गढ़मिकरपुर से मेरठ हाईवे पर पहुंचे। इन्हें रोकने के लिए एक भी अधिकारी या पुलिस कर्मी तैनात नहीं था। यहां किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारी केवल विभागीय खानापूर्ति करने के लिए मुकदमा दर्ज करा रहे है।

बाढ़ आई तो आफत में आएगा खादर : पिछले करीब सात-आठ महीने से यमुना के इस बांध पर धड़ल्ले से रेत के डंपर निकल रहे है। सिंचाई विभाग की लापरवाही से यमुना का बांध काफी डेमेज हो गया है। यदि बरसात के मौसम में यमुना में बाढ़ आई तो खादर क्षेत्र में हालात बेकाबू हो सकते हैं। किसान चांद, धर्मपाल गढ़ मिरकपुर, रमेश आंतिल ने कहा कि यमुना का पानी बड़ौली व गढ़मिरकपुर गांव में घुस सकता है।

लेबर से ट्रैक्टर ट्राॅली से भर रहे रेत, स्टॉक पर है पोपलेन

45 किमी लंबा अाैर 18 फीट चौड़ा है बांध : यमुना किनारे बसे ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा सोनीपत की सीमा में 45 किमी लंबा बांध बनाया गया है। इस बांध को 18 फीट चौड़ी सड़क के रूप में डेवलप किया गया है। जिस पर ट्रैक्टर-ट्राॅलियां और सरकारी वाहनों के आवागमन की अनुमति है।


व्यवसायिक वाहनों के निकलने पर रोक

इस बांध पर केवल किसानों के ट्रैक्टर या बुग्गी ही निकाले जा सकते है। सिंचाई विभाग ने किसी प्रकार के व्यवसायिक वाहन के इस कच्चे रास्ते से निकालने पर रोक लगा रखी है। पिछले कई महीने से यमुना नदी में चल रही रेत की खानों तक जाने के लिए हैवी वाहन चालक यमुना के इस बांध का प्रयोग कर रहे है। इसी पर कार्रवाई करते हुए सिंचाई विभाग के एसडीओ श्रीप्रकाश मलिक ने चर्तुेश रियल एस्टेट, जेलकोवा बिल्डॉन गढ़ी असदपुर, साई टाइल्स प्रोपराइटर कुलवंत सिंह रेत स्टॉक होल्डर, शीर्ष इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोपराइटर अक्षय के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इन सभी पर बगैर किसी अनुमति के यमुना नदी के बांध के प्रयोग का आरोप है।

जब रेत की खान में पहुंचे तो वहां पर लेबर से रेत की खुदाई हो रही थी। खान कंपनी वाले ट्रैक्टर ट्राॅलियों से रेत भरकर बांध के पास बनाए गए स्टॉक पर जमा कर रहे है। स्टॉक पर पोपलेन से रेत को डंपरों में भरा जाता है। ये डंपर यमुना के इसी रेत के बंधे से होकर मेन सड़क पर पहुंचते है। कंपनियों की दलील है कि यमुना के बांध के अलावा खनन कंपनियों के पास अन्य उचित रास्ता नहींं है।


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