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वामन अवतार की प्रतिमा बढ़ाएगी हिसार में म्यूजियम की शोभा

आठ सौ फुट ऊंची पहाड़ी पर मिली भगवान विष्णु के पांचवे वामन अवतार की प्रतिमा अब हिसार में म्यूजियम की शोभा बढ़ाएगी।...

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2018, 03:20 AM IST
वामन अवतार की प्रतिमा बढ़ाएगी हिसार में म्यूजियम की शोभा
आठ सौ फुट ऊंची पहाड़ी पर मिली भगवान विष्णु के पांचवे वामन अवतार की प्रतिमा अब हिसार में म्यूजियम की शोभा बढ़ाएगी। पुरातत्व विभाग की टीम बुधवार को मूर्ति पहाड़ी से उतारकर हिसार ले गई।

गौरतलब है कि आठ सौ फुट ऊंची पहाड़ी धार्मिक एवं ऐतिहासिकता को समेटे हुए है। पहाड़ी पर बने बाबा मुंगीपा धाम में तोशाम ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र के लोगों की भी गहरी आस्था है। लोगों की मान्यता है कि बाबा मुंगीपा बुद्ध काल के चौरासी सिद्ध और चौसठ योनियों में एक सिद्ध पुरुष थे। पत्थरों पर बने दो शिला लेखों के बाद पहाड़ी की चोटी पर कुछ दिन पहले मलबे से त्रेता युग के प्रथम भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा मिली है। पहाड़ी पर लगे वायरलैस सिस्टम पर कार्यरत पुलिसकर्मियों द्वारा पिछले दिनों पानी की टंकियों को व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए कुछ मलबा हटाया तो मलबे से वामन अवतार की प्रतिमा निकली थी।

वामन अवतार की प्रतिमा निकलने से तोशाम की ऐतिहासिकता को बल मिला है। इतनी प्राचीन प्रतिमा मिलना पहाड़ी की ऐतिहासिकता के तथ्यों को ओर मजबूत करता है। वामन अवतार की प्रतिमा में जो पत्थर इस्तेमाल किया गया है इस बारे में पुरातत्व विभाग की मानें तो प्रतिमा आठवीं से दसवीं शताब्दी के बीच की है। इतनी प्राचीन प्रतिमा मिलना क्षेत्र के लिए बड़ी बात मानी जाती है। बीते दिनों अभिलेखागार विभाग की टीम ने बाबा मुंगीपा धाम के आसपास पहाड़ पर बने पवित्र कुंडों ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की थी। टीम को निरीक्षण के दौरान एक पत्थर पर शाही परिवारों के रहन-सहन को दर्शाने वाली रफ पेंटिग मिली थी, जोकि यहां आसपास किसी क्षेत्र में नहीं है।

आठ सौ फुट ऊंची पहाड़ी पर मिली भगवान विष्णु के पांचवें अवतार की प्रतिमा को पुरातत्व विभाग की टीम पहाड़ी से ले गई हिसार

तोशाम. मूर्ति के साथ पुरातत्वविद।

पृथ्वीराज चौहान का किला था इस पहाड़ी पर

मध्यकाल में प्रतापी राजा पृथ्वीराज चौहान का किला इस पहाड़ी की चोटी पर था। 1982 में हवाई जहाज के टकराने से ध्वस्त हो चुके किले के काफी अंश खत्म हो गए थे। कुछ अंश आज भी मौजूद हैं। इस पहाड़ी के मध्य में मौजूद ब्रह्मी लिपि के दो अद्भुत शिलालेखों का रहस्य बरकरार है। बुधवार को मूर्ति लेने तोशाम पंहुचे पुरातत्व विभाग के सहायक संरक्षक एसपी चालिया ने बताया कि यह प्रतिमा वामन अवतार की है। जो पत्थर प्रतिमा में प्रयोग किया गया है उससे स्पष्ट होता है कि यह प्रतिमा 8 वीं से 10 वीं शताब्दी के बीच की है। अब यह मूर्ति हिसार में स्थित म्यूजियम में रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि विभाग के पुरातत्वविद मूर्ति को लेकर अध्ययन करेंगे जिसके बाद इससे जुड़े इतिहास के तथ्य सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा छापे जाने वाली पुस्तक में भी मूर्ति से जुड़ी जानकारियां प्रकाशित की जाएंगी।

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