Hindi News »Haryana News »Yamunanagar» केस वापस लेने का दबाव बना रहा था प्रबंधन: भट्‌टी

केस वापस लेने का दबाव बना रहा था प्रबंधन: भट्‌टी

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:25 AM IST

गुरु नानक खालसा कॉलेज प्रबंधन की ओर से निलंबित किए गए दो असिस्टेंट प्रोफेसर्स की बहाली की मांग को लेकर गुरुवार से...
गुरु नानक खालसा कॉलेज प्रबंधन की ओर से निलंबित किए गए दो असिस्टेंट प्रोफेसर्स की बहाली की मांग को लेकर गुरुवार से भूख हड़ताल शुरू हो गई। पहले दिन डॉ. बी मदन मोहन, प्रेस सचिव डॉ. श्रीप्रकाश, जोन सचिव डॉ. निर्मल सिंह, डॉ. एनपी सिंह, डॉ. हेमंत मिश्रा भूख हड़ताल पर बैठे।

हरियाणा कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (एचसीटीए) के बैनर तले करीब एक माह से धरना चल रहा है। दो बार कॉलेज प्रबंधन समिति के साथ एचसीटीए की वार्ता से भी कोई समाधान नहीं निकला। 19 जनवरी को डीसी को ज्ञापन देकर हस्तक्षेप की मांग की गई। एबीवीपी के पदाधिकारियों ने भी सीएम विंडो पर शिकायत दी। अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री संजय राणा ने प्रिंसिपल को ज्ञापन दिया। जिसमें कहा गया कि 4 फरवरी तक प्रोफेसर्स की बहाली न होने पर 5 को कॉलेज की तालाबंदी की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि तीन माह का वेतन न मिलने पर मार्च 2017 में कॉलेज के शिक्षकों ने हरियाणा स्कूल कॉलेज टीचर एसोसिएशन के बैनर तले धरना दिया। इसका नेतृत्व कॉलेज इकाई के अध्यक्ष डॉ. एमएस भट्‌टी ने किया। इसे लेकर ही कॉलेज प्रशासन ने प्रो. एमएस भट्‌टी व प्रो. पीआर त्यागी को निलंबित कर दिया। जबकि डॉ. अशोक खुराना, डॉ. इकबाल, डॉ. प्रीतम व डॉ. बलजीत को वार्निंग नोटिस जारी किया।

अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने के बाद से विवादः एसोसिएशन

कॉलेज को 2010 में माइनॉरिटी संस्थान का दर्जा मिला। एचसीटीए की कॉलेज इकाई ने हाईकोर्ट में इस तर्क पर चुनौती दी कि प्रबंधन समिति ने गलत कागजातों के आधार पर दर्जा हासिल किया है। तब मैं ही इकाई का अध्यक्ष था। केस में अगली सुनवाई 29 मार्च को है। प्रबंधन केस वापस लेने का दबाव बना रही थी, मैं नहीं माना तो निलंबन हुआ। डॉ. एमएस भट्टी,एचसीटीए की कॉलेज इकाई के अध्यक्ष

चार्जशीट का जवाब देंः प्रिंसिपल

धरना देकर प्राध्यापकों ने अनुशासनहीनता की है, जिसको लेकर ही यह कार्रवाई हुई है। कॉलेज ने प्राध्यापकों को चार्जशीट किया है। अब प्राध्यापक जवाब देंगे। पूरी प्रक्रिया निलंबित प्राध्यापकों को पूरी करनी होगी। जहां तक केस वापस लेने की बात है, तो यह आरोप गलत है। क्योंकि केस हाईकोर्ट में चल रहा है। प्राध्यापकों पर कोई दबाव नहीं बनाया गया है। डॉ. मंजीत सिंह, प्रिंसिपल

यह मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसा है, तो पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी और कॉलेज से भी इस बारे में जवाब तलब किया जाएगा। ज्योति अरोड़ा, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हायर एजुकेशन विभाग

धरने पर क्लासः ताकि बच्चों का नुकसान न हो

शिक्षक कक्षाएं खत्म होने के बाद ही धरने पर बैठ रहे हैं। 19 जनवरी को सभी प्राध्यापकों ने सामूहिक अवकाश लिया था। गुरुवार को भूख हड़ताल पर बैठे डॉ. निर्मल सिंह ने अवकाश लिया, लेकिन कॉलेज गेट पर उनके पास एमए फाइनल पंजाबी के स्टूडेंट्स पहुंचे तो उन्होंने धरने पर ही पढ़ाया।

माइनॉरिटी दर्जा मतलब सरकार का हस्तक्षेप नहींः

कॉलेज के माइनॉरिटी कोटे में होने का लाभ यह है कि सरकार का हस्तक्षेप नहीं रहता बल्कि पूरा अधिकार प्रबंधन समिति का रहेगा। सरकार की ओर से प्राध्यापकों का वेतन भी कॉलेज के खाते में ही आएगा। कॉलेज में करीब 81 लाख का बजट प्राध्यापकों के वेतन के लिए आता है। आरोप यह भी है कि जानबूझकर वेतन लेट किया जाता है। जबकि प्रबंधन ने 2010 में लिखकर दिया था कि हर माह की सात तारीख को वेतन मिल जाएगा।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Haryana News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: केस वापस लेने का दबाव बना रहा था प्रबंधन: भट्‌टी
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      More From Yamunanagar

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×