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भारत-पाक युद्ध के बाद छछरौली में बने वार विडो होम में 1887 से शुरू हुई आईटीआई 5 साल में हुई खंडहर

2 वर्ष पहले
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1971 के भारत-पाक लड़ाई के बाद छछरौली में विरांगनाओं के लिए बना वार विडो होम आईटीआई में तबदील होने पर 32 साल चलने के बाद पांच साल से बंद पड़ी है। सैनिक परिवार भवन के अंतर्गत चलाई जा रही आईटीआई को बंद करने के पीछे स्टूडेंट स्ट्रैंथ कम और खर्च अधिक आने को वजह मनाया गया। अब हालात ये है कि यहां बनी तीन मंजिला बिल्डिंग खंडहर हो चुकी है वहीं, कई किले में फैली जमीन ने जंगल का रूप ले लिया है। हालांकि सैनिक परिवार भवन ने देखरेख का जिम्मा 3 साल से सैनिक बोर्ड को सौंप रखा हैं, लेकिन कोई चौकीदार न मिलने से करोड़ों में भवन खस्ताहाल हो रहे हैं। इस समेत जमीन किसी इस्तेमाल नहीं आ रही है। बता दें कि 1971 के भारत-पाक लड़ाई के बाद छछरौली में विरांगनाओं के लिए वार विडो होम बनाया गया, ताकि शहीद विरांगनाओं व उनके आश्रितों को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जा सके। होजरी, कट ग्लास वर्क, हैंडलूम, टेलरिग, कटाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण शामिल था। तीन मंजिला भवन में होस्टल में रहने के साथ प्रतिभागी खुद अपने लिए खाना बनाते थे और विरांगनाओं व उनकी बेटियों को फ्री प्रशिक्षण मिल रहा था। पहले सैनिक परिवार ही परीक्षा लेकर सर्टीफिकेट जारी करता था, लेकिन बाद में 1994 में इसे डीजीईटीसी से एफिलिएशन मिली। स्टेनो हिंदी, अंग्रेजी, कटिंग व टेलरिंग जैसे डिप्लोमा शुरू हुए। जिनकी परीक्षा व सर्टीफिकेट डीजीईटीसी से दिए जाने लगे। यहां स्टाइफंड के रूप में 75 से बढ़ाकर 100 रुपए राशि मिलने लगी। पहले जहां होस्टल में खाना खुद बनाना पड़ता था वहीं, बाद में सरकार ने मैस चालू की। 2002 में इसे कोएड कर दिया गया। 2007 में होजरी, हेंडलूम, कट गलास जैसी एक-एक कर ट्रेड बंद होने लगीं। प्रशिक्षकों को दूसरे सेंटरों में एडजस्ट कर दिया गया और 2014 में आईटीआई बंद कर दी गई। जिसकी वजह स्टूडेंट स्ट्रैंथ कम और बिल्डिंग बड़ी होने पर खर्च ज्यादा आना बताया गया। उसके बाद से पांच साल से करोड़ों रुपए का भवन व जमीन खंडहर में तबदील हो गए हैं।

छछरौली में बंद होने के बाद खंडहर हो रहे आईटीआई भवन व जमीन।

सैनिक बोर्ड से रणजीत सिंह ने कहा कि उन्हें सैनिक परिवार भवन ने केयरटेकर के रूप में जिम्मा सौंपा है। इसे किसी भी इस्तेमाल में लाए जाने का निर्णय सैनिक परिवार भवन द्वारा ही लिया जा सकता है।

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