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तीसरे दिन भी सिंचाई विभाग की टीम ने यमुना पर बने दो अवैध पुल तोड़े, दो को ठेकेदारों ने खुद हटाया

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | यमुनानगर/जठलाना

यमुना नदी पर खनन का ठेका लेने वाली कुछ कंपनियों द्वारा बनाए गए अवैध पुलों को सिंचाई विभाग की टीम ने लगातार तीसरे दिन भी तोड़ा। ऐसे अवैध बांध व पुलों का निर्माण खनन को सुगम बनाने के लिए नदी की जलधारा मोड़ने के लिए किया जा रहा है। वैसे ग्रामीण इसका बहुत पहले से विरोध करते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी चुप थे। जब आप नेता व दिल्ली सरकार में मंत्री मनीष सिसौदिया ने इस बारे में टिप्पणी की तो हरियाणा के अधिकारी सक्रिय हुए। चंडीगढ़ से आए आदेश के बाद सिंचाई विभाग व पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर लगातार तीन दिन से अवैध पुलों को तोड़ने का सिलसिला जारी है। इस तरह के पुलों को तोड़ने की कार्रवाई कनालसी में बने अवैध पुल से शुरू हुई। पुल को तोड़ने के आदेश हाईकोर्ट ने भी दिए थे। मंगलवार को बीबीपुर व एमटी करेड़ा घाट के पुलों को तोड़ा गया। ढाई बजे एमटी करहेड़ा घाट पर बने अस्थाई पुल को एक अर्थ मूविंग मशीन के साथ तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई। इस दौरान सिंचाई विभाग के एसडीओ जसविंद्र सिंह, जेई सतपाल, जेई नवीन कुमार व थाना जठलाना प्रभारी ओमप्रकाश पुलिस दल के साथ मौके पर मौजूद रहे। कार्रवाई से पहले पुलिस फोर्स को जठलाना थाने में एकत्रित किया गया। एमटी करहेड़ा घाट पर बने अस्थाई पुल तोड़ने की सूचना क्षेत्र के किसानों व ग्रामीणों को सुबह के समय ही लग चुकी थी। ग्रामीणों को सूचना मिली थी कि 11 बजे टीम एमटी करहेड़ा घाट पर पुल को तोड़ने के लिए पहुंचेगी। टीम का विरोध करने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण व किसान घाट पर एकत्रित हो गए। लेकिन चर्चा चली कि प्रशासन पुल को तोड़े बिना वापस नहीं लौटेगा। अगर वह टीम का विरोध करेंगे तो प्रशासन उनके ऊपर सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस न दर्ज कर दे। जिसके बाद एक-एक कर किसान व ग्रामीण अपने घरों को लौट गए। एमटी करहेड़ा घाट पर स्थिति का जायजा लेने के लिए करीब साढ़े ग्यारह बजे थाना जठलाना प्रभारी ने अपनी गाड़ी से चक्कर लगाया, ताकि पता चल सके कि मौके पर कितने लोग हैं। मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी से ग्रामीणों ने पूछा की क्या आज पुल को तोड़ने के लिए कोई टीम आ रही है तो थाना प्रभारी ने कहा कि इस संबंध में उनके पास कोई सूचना नहीं है। ग्रामीणों से बात कर वह वापस लौट गए।

पोकलेन मशीन की मदद से सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पुल तोड़ दिए।

यमुना नदी पर सुबह से तैनात जवानों को दोपहर में समोसे खाकर गुजाना करना पड़ा।

पोबारी व नगली घाट पुल ठेकेदारों ने खुद ही हटाए
यमुना नदी पर पोबारी व नगली घाट पर बने अस्थाई पुल को खनन एजेंसियों ने खुद ही तोड़ दिया। शाम तक एमटी करहेड़ा घाट पर बने अस्थाई पुल को तोड़ने की कार्रवाई चलती रही। वहीं पोबारी व नगली घाट पर बने अस्थाई पुल को खनन एजेंसियों द्वारा सरकारी हिदायत के अनुसार खुद ही हटाने की बात सामने आई है। वहीं क्षेत्र के किसानों का कहना है कि प्रशासन को यमुना नदी पर बने पुल को तब तक नहीं तोड़ना चाहिए था, जब तक यहां पर पक्का पुल न बन जाए। अस्थाई पुल किसानों ने अपनी सुविधा के लिए बनाया हुआ था। पुल टूटने से अब वह अपने खेतों में समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। अब उन्हें कलानौर के रास्ते से होकर अपने खेतों में पहुंचना पड़ेगा।

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