नगली घाट के पुल के निर्माण में फिर फंसा पेंच

Yamunanagar News - यमुना नदी के नगली घाट पर 104 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले ओवरब्रिज की नींव को रखे करीब 22 दिन का समय बीत चुका है। 22 जून...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:25 AM IST
Radaur News - haryana news the screwed trap in the construction of the bridge of nali ghat
यमुना नदी के नगली घाट पर 104 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले ओवरब्रिज की नींव को रखे करीब 22 दिन का समय बीत चुका है। 22 जून को विधायक श्याम सिंह राणा ने ओवरब्रिज की नींव रखी थी, लेकिन ओवरब्रिज का निर्माण कार्य नींव रखने से आगे नहीं बढ़ पाया है।

वहीं अब किसान पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर जमीन का कम रेट देने का आरोप लगाते हुए जमीन देने से मना कर रहे हैं। इससे निर्माण कार्य अटक सकता है।

क्षेत्रवासी सुरेंद्र सिंह, अवतार सिंह, अमरजीत, बलविंद्र, राकेश, सोनू, पंकज, दीपक व विजय कुमार का कहना है कि यमुना नदी पर ओवरब्रिज बनाने की मांग उनकी वर्षों पुरानी है। ओवरब्रिज के अभाव में उन्हें नदी पार अपने खेतों में जाने के लिए भारी परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ता है। इसके निर्माण की नींव रखे भी करीब 22 दिन बीत चुके हैं।

वहीं संबंधित ठेकेदार अभिषेक का कहना है कि ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाली सामग्री का उन्होंने ऑर्डर किया हुआ है। आगामी दस दिन में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद काम शुरू करा दिया जाएगा।

ओवरब्रिज में यहां पर फंस सकता है पेंच : पीडब्ल्यूडी की ओर से ओवरब्रिज बनाने में जिन किसानों की भूमि को अधिग्रहण किया जाना है अब उनमें से कुछ किसान विभाग को जमीन देने से मना कर रहे हैं।

तहसील रादौर में करीब एक माह से पीडब्ल्यूडी की ओर से भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की रजिस्ट्रियां बनाने का कार्य चल रहा है। लेकिन अभी तक केवल 22 रजिस्ट्रियां ही बन पाई है।

जबकि करीब 300 किसानों की 60 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। गांव संधाला के किसान अमीरचंद नंबरदार, हरिचंद, रमेश कुमार, मदनलाल, दर्शनलाल, कृष्णचंद, अर्जुनदास व रहतुराम का कहना है कि उनकी जमीन पहले दरियाबुर्द थी।

जमीन के ऊपर से पानी चलता था। लेकिन अब कुछ वर्षों से उनकी जमीन में अच्छी फसल हो रही है। लेकिन आज भी राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में उनकी जमीन के दरियाबुर्द के रेट अंकित है।

यह सब विभागीय अधिकारियों की लापरवाही है। उन्होंने बताया कि उनके साथ लगते किसानों को विभाग 16 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिल रहा है। लेकिन उन्हें 8 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने की बात अधिकारी कह रहे है। वह इस संबंध में उच्चधिकारियों के पास भी गए थे।

उच्चधिकारियों ने उन्हें कहा कि रिकॉर्ड से जमीन के रेट अप्रैल या फिर अक्टूबर माह में बदले जाते हैं। इससे पहले जमीन के रेट नहीं बदले जाएंगे। इसलिए किसानों ने निर्णय लिया है कि जब तक उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक वह अपनी जमीन का अधिग्रहण नहीं होने देंगे।


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