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अवैध खनन से किसानों की जमीन यमुना में समा गई कागजों में जमींदार, हकीकत में करनी पड़ रही मजदूरी

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | यमुनानगर/जठलाना

गांव संधाला के कलीराम। राजस्व रिकॉर्ड में वह 10 एकड़ जमीन के मालिक हैं। हकीकत में उनके पास एक इंच भी जमीन नहीं। यमुना में अवैध खनन की वजह से नदी की क्रीक बदली और जमीन पानी में समा गई। कलीराम बताते हैं कि कुछ जमीन तो 2013 में बाढ़ के कारण समा गई थी। जो बची थी वह इस बार फसल समेत बह गई। किसान के मुताबिक उनकी जमीन के आसपास रेत ठेकेदारों ने अवैध खनन किया। इस बारे छह बार खनन विभाग, प्रशासन और सीएम विंडो पर शिकायत की। कोई कार्रवाई नहीं हुई। पांच बेटियां व दो बेटे। आज पूरा परिवार मजदूरी कर घर का खर्च चला रहे हैं।

सिर्फ कली राम नहीं बहुत से किसानों की एेसी कहानी है। यमुना में अवैध तरीके से माइनिंग के कारण भूमि कटाव के चलते फसलें व जमीन गवां चुके किसान बुधवार को गुमथला अनाज मंडी में महापंचायत करेंगे। मंगलवार को गांवों में ढोल बजाकर मुनादी करवाई। किसानों का कहना है कि प्रशासन को बातचीत के जरिए मामला सुलझाने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया गया था, कोई सुध नहीं ली गई। अब उन्होंने झंडा व डंडा दोनों उठा लिए हैं। वरयाम सिंह, राजकुमार, अमीलाल, अनिल कुमार, रमेश, सलिंद्र, राजेंद्र, विनोद कुमार, जितेंद्र का कहना है कि महापंचायत में सभी किसान यमुना का पवित्र जल हाथ में लेकर शपथ लेंगे कि वह न डरेंगे न पीछे हटेंगे। किसानों द्वारा होने वाली इस महापंचायत को लेकर खुफिया तंत्र भी इस तरह की जानकारी बटोरने में लगा रहा।

जठलाना | यमुना नदी में अधिक गहराई तक हुए खनन के कारण नदी में समाती धान की फसल। फोटो : भास्कर

जमींदार से अब मजदूर बनने की मजबूरी

ढाई एकड़ का मालिक था। अबकी बार यमुना में आए पानी के कारण जमीन नदी में समा गई है। मेरे पास एक बेटा है। जमीन नदी में चले जाने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। राज मिस्त्री के पास दिहाड़ी करता हूं। हीरालाल, गुमथला

पिता की मौत के बाद परिवार की सारी जिम्मेवारी मेरे ऊपर है। तीन बहनों की शादी कर चुका हूं। एक बहन व एक भाई अभी कुंवारा है। सारी ढाई एकड़ जमीन यमुना नदी की भेंट चढ़ गई। दलेर सिंह, गुमथला

छह एकड़ जमीन का मालिक था। तीन एकड़ जमीन 2013 में बाढ़ की भेंट चढ़ गई थी। जो बची वो अब नदी के अंदर समां गई। पहले करोड़ों का मालिक था, अच्छे जमींदारों में गिनती थी। अब दिहाड़ी कर अपने परिवार का पेट पाल रहा हूं। होशियार सिंह, गुमथला

बाढ़ से बही फसल, फैक्ट्री में काम करना पड़ रहा

अबकी बार यमुना नदी में आई बाढ़ के कारण पूरी जमीन धान की फसल सहित यमुना नदी के अंदर समा गई है। बेटा व बेटी दोनों स्कूल में पढ़ते है। परिवार का खर्च चलाने के लिए शराब की फैक्ट्री में काम पर जा रहा हूं। कलीराम, गुमथला

एक वर्ष पहले बीमारी से पति की मौत हो गई थी। दो बेटियां व एक बेटा है। एक बेटा व बेटी अभी कुंवारी है। दो एकड़ जमीन थी। अवैध खनन के कारण सारी जमीन नदी में समां गई। ऐसे में बच्चों की शादी कैसे करूंगी। सुधा रानी, गुमथला

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