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खेदड़ प्लांट बंद होने से गहराया बिजली संकट, 4 दिन लगेंगे व्यवस्था बनने में

Yamunanagar News - खेदड़ प्लांट में हादसा होने की वजह से आई तकनीकी खामी दूर नहीं हो सकी है। जिसका असर यमुनानगर जिले पर भी पड़ रहा है।...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 03:45 AM IST
खेदड़ प्लांट बंद होने से गहराया बिजली संकट, 4 दिन लगेंगे व्यवस्था बनने में
खेदड़ प्लांट में हादसा होने की वजह से आई तकनीकी खामी दूर नहीं हो सकी है। जिसका असर यमुनानगर जिले पर भी पड़ रहा है। खेदड़ प्लांट की वजह से बिजली की सप्लाई बाधित हो रही है। शहरों में दो-दो घंटे के कट लगाकर पूर्ति की जा रही है, गांवों में व्यवस्था ज्यादा खराब है। यहां केवल दो से तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति लोगों को मिल रही है। बिजली निगम की ओर से चार दिन में व्यवस्था में सुधार होने का दावा किया जा रहा है।

मंगलवार को खेदड़ पावर प्लांट में बॉयलर का क्लिंकर फटने के बाद गिर गया। जिसमें दो श्रमिकों की मौत हो गई थी। इसकी वजह पावर प्लांट पूरी तरह से बंद हो गया। बॉयलर फटने की वजह से प्लांट में तकनीकी खामियां आ गई। इस प्लांट के बंद होने का असर सीधा कई जिलों की बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। यमुनानगर में भी इस प्लांट का असर पड़ा है। क्योंकि इस प्लांट से यमुनानगर को करीब 600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति मिलती है। प्लांट बंद होने से यह आपूर्ति पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

गर्मी के दिनों में बिजली की खपत बढ़ जाती है। गर्मियों में जिले में बिजली की खपत एग्रीकल्चर में करीब 18 लाख यूनिट, रुरल में करीब 15 व शहर में करीब 25 लाख लाख यूनिट की खपत हो जाती है। इंडस्ट्रीज में करीब पांच लाख यूनिट की खपत गर्मियों में होती है। लेकिन खेदड़ प्लाट के बंद होने की वजह से यह आपूर्ति घट गई है। अब बिजली निगम की ओर से दो-दो घंंटे के कट लगाकर काम चलाया जा रहा है।

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खपत

कल रात 4 घंटे नहीं आएगी बिजली

बिजली के भयंकर संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं को 19 मई को बड़ी दिक्कत झेलनी पड़ेगी। बिजली की कमी के चलते 19 मई को रात आठ बजे से 12 बजे तक सप्लाई बंद रहेगी। सभी औद्योगिक फीडर इसके दायरे में आएंगे। बिजली की किल्लत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाईडल कॉलोनी में भी हर एक से दो घंटे के अंतराल पर कट लग रहे हैं।

कम बिजली सप्लाई पर भाकियू ने एसई को घेरा

कम बिजली सप्लाई पर भाकियू ने एसई को घेरा

भाकियू के पदाधिकारियों ने बदहाल बिजली व्यवस्था को लेकर एसई योगराज का घेराव भी किया। भाकियू के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीण एसई दफ्तर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि जगमग योजना के नाम पर ग्रामीणों को मूर्ख बनाया जा रहा है। गांवों में दो से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। धान की रोपाई का समय 15 जून से शुरु हो जाएगा। यदि यही स्थिति बनी रही, तो दिक्कत और बढ़ेगी। इस दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि आठ दिन के अंदर गांवों में बिजली की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो एसई दफ्तर पर धरना शुरू होगा। इस दौरान विनोद डागी, रघुबीर, यशपाल, पवन गोयल, बलिंद्र, गुरदयाल सिंह, सुखविंद्र सिंह चहल, कृष्ण कुमार, ओमप्रकाश, सुखबीर सैनी, सुरेश सैनी, जोगेंद्र सिंह, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।

भाकियू के पदाधिकारियों ने बदहाल बिजली व्यवस्था को लेकर एसई योगराज का घेराव भी किया। भाकियू के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीण एसई दफ्तर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि जगमग योजना के नाम पर ग्रामीणों को मूर्ख बनाया जा रहा है। गांवों में दो से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। धान की रोपाई का समय 15 जून से शुरु हो जाएगा। यदि यही स्थिति बनी रही, तो दिक्कत और बढ़ेगी। इस दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि आठ दिन के अंदर गांवों में बिजली की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो एसई दफ्तर पर धरना शुरू होगा। इस दौरान विनोद डागी, रघुबीर, यशपाल, पवन गोयल, बलिंद्र, गुरदयाल सिंह, सुखविंद्र सिंह चहल, कृष्ण कुमार, ओमप्रकाश, सुखबीर सैनी, सुरेश सैनी, जोगेंद्र सिंह, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।

शहर में 25 लाख व ग्रामीण में 15 लाख यूनिट

उपभोक्ताओं से मांगा सहयोग

बिजली निगम के एक्सईएन मुकेश चौहान व जगाधरी एक्सईएन कुलवंत सिंह ने भी उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है। खेदड़ प्लांट को ठीक करने में कर्मचारी लगे हुए हैं। वहां से स्थिति सुधरते ही उपभोक्ताओं को बिजली की पूरी आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।


खिजराबाद के भूडकलां में हाईडल का प्लांट है। यहां से खेड़ा पावर हाउस जगाधरी को बिजली की सप्लाई जाती है। इसकी क्षमता 64.4 मेगावाट है। लेकिन पिछले नौ माह से यहां पर पानी कम होने की वजह से अब यहां पर मात्र 25 से 30 यूनिट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है। बरसात में भी यहां पर बिजली नहीं बन पाती। क्योंकि बरसात के पानी सिल्ट अधिक होती है। जिस वजह से बरसात में उत्पादन ही बंद करना पड़ता है। मौजूदा हालात यह है कि हाईडल प्लांट की चार अलग-अलग यूनिट हैं। प्रत्येक युनिट आठ मेगावाट की है। लेकिन पानी की कमी के चलते केवल एक-एक यूनिट ही चलाई जाती है। जिससे मात्र दो मेगावाट बिजली का ही उत्पादन होता है।

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