ग्राउंड रिपोर्ट / दो पूर्व मंत्रियों के गुणा और भाग पर टिका अम्बाला सिटी हलके का गणित



अम्बाला सिटी के सेक्टर-8 में कांग्रेस प्रत्याशी जसबीर मलौर के चुनाव कार्यालय के पास ही कांग्रेस टिकटार्थी रहे बलविंद्र पूनिया का दफ्तर है और बीच में रामलीला का मंच लगा है। पूनिया मलौर के प्रचार से दूर हैं। अम्बाला सिटी के सेक्टर-8 में कांग्रेस प्रत्याशी जसबीर मलौर के चुनाव कार्यालय के पास ही कांग्रेस टिकटार्थी रहे बलविंद्र पूनिया का दफ्तर है और बीच में रामलीला का मंच लगा है। पूनिया मलौर के प्रचार से दूर हैं।
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अम्बाला सिटी के सेक्टर-8 में कांग्रेस प्रत्याशी जसबीर मलौर के चुनाव कार्यालय के पास ही कांग्रेस टिकटार्थी रहे बलविंद्र पूनिया का दफ्तर है और बीच में रामलीला का मंच लगा है। पूनिया मलौर के प्रचार से दूर हैं।अम्बाला सिटी के सेक्टर-8 में कांग्रेस प्रत्याशी जसबीर मलौर के चुनाव कार्यालय के पास ही कांग्रेस टिकटार्थी रहे बलविंद्र पूनिया का दफ्तर है और बीच में रामलीला का मंच लगा है। पूनिया मलौर के प्रचार से दूर हैं।

  • चर्चा में यह सीट क्योंकि कांग्रेस से बगावत कर उतरे निर्मल

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 01:16 AM IST

भाजपा के सिटिंग विधायक के सामने हैं कांग्रेस में लंबा सियासी सफर तय करने वाले पूर्व मंत्री चौधरी निर्मल सिंह जो बेटी को टिकट न मिलने पर इस बार निर्दलीय उतरे हैं। कांग्रेस ने जसबीर मलौर को टिकट दिया है, जिससे यहां मुकाबला तिकोना हो गया है। मौजूदा सियासी माहौल में हलके के लोगों का मिजाज कैसा है, इस पर पढ़िए संदीप शर्मा की रिपोर्ट...
 

अम्बाला सिटी हलके और पड़ोसी राज्य पंजाब के बॉर्डर पर हरियाणा का आखिरी गांव है नन्यौला। भाजपा प्रत्याशी असीम गोयल यहीं के हैं। अनाज मंडी के गेट पर पाल टी स्टाल में चाय पी रहे 4 ग्रामीणों के बीच हमने राजनीतिक सवाल परोस दिया, यहां किसका जोर चल रहा है? बिना किसी लाग-लपेट के जवाब मिला, पुराने चौधरी (पूर्व मंत्री निर्मल सिंह) के निर्दलीय मैदान में उतरने से चाय कड़क हो गई है। पिछली बार सारा गांव असीम के साथ था। इस बार वोट बंट सकती है। 


गांव के खंभों पर स्पीकर-सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो इस दिशा में किए गए प्रयासों की गवाही देते हैं। सड़कों की स्थिति भी ठीक है। लोगों का कहना है-पहले सड़कें चलने लायक नहीं थी, पर अब हालत अच्छी है। हालांकि, गांव की एक दूसरी सूरत भी है। यहां के माॅडल आंगनबाड़ी फुलवारी के आगे गंदगी के ढेर लगे हैं, जिसका असीम ने नगरीय निकाय मंत्री कविता जैन से शुभारंभ करवाया था। मंडी के पास 4 बूथ कबाड़ बन रहे हैं, जो उन्होंने अपने एनजीओ ‘सारा आसमान’ के नाम से स्वरोजगार शुरू करने के लिए बांटें थे। ये मौजूदा व्यवस्था की खामी दर्शाते हैं। 
पड़ोस का गांव है मलौर। कांग्रेस प्रत्याशी जसबीर मलौर यहीं के हैं। मलौर के अड्डे पर दुकानदार खुलकर बोलते हैं-मलौर यहां के जरूर हैं लेकिन बड़ा काम याद नहीं जो विधायक रहते किया। गांव की वोट तीन जगह बंटेंगी। सिटी हलके में शामिल हुए पुराने नग्गल (जहां से निर्मल 4 बार विधायक व 2 बार मंत्री रहे) हलके के गांवों में बड़ा गांव है मटेहड़ी शेखां। कई गांवों का सेंटर होने के बावजूद यहां बस क्यू शेल्टर तक नहीं। यहां जूस की रेहड़ी लगाने वाले सरदार जी मजाक में कहते हैं- यहां खुला अड्डा है। चुनाव की बात छिड़ने पर सरदार जी बोले-चौधरी के आने से चुनाव में जान आ गई है। इस पर जूस पी रहे दो युवक बोल पड़े-ताया जी, गांवों की वोट तो बंट जाएगी, लेकिन शहर जाकर देखो-बीजेपी की ज्यादा असर दिखेगा।

 

कोंकपुर, नकटपुर, बांहपुर, दौदपुर, चौड़मस्तपुर समेत पुराने नग्गल हलके के गांवों में लोग चौधरी का 1996 का चुनाव याद करते हैं, जो उन्होंने जेल बंद होने के बावजूद जीता था। गांवों में जितना शोर है, शहर उतना शांत नजर आता है। चर्चा में एक बात जरूर उठती है कि असीम को शहर में अपनी बिरादरी का साथ मिल रहा है, यही उनकी ताकत है। सेक्टर-8 में जसबीर मलौर के चुनाव कार्यालय और कांग्रेस में टिकट के दावेदार रहे बलविंद्र पूनिया का दफ्तर पास-पास हैं। बीच में रामलीला का टेंंट लगा है। लोग कहते हैं कि इन दोनों का भी भरत-मिलाप हो जाए तो कांग्रेस को फायदा हो। अभी पूनिया मलौर के प्रचार में नजर नहीं आए हैं। कांग्रेस के बागी हिम्मत सिंह खुलकर निर्मल का साथ दे रहे हैं। शहर में एक और पूर्व मंत्री पर काफी गुणा-गणित टिका है, वे हैं कांग्रेस के पूर्व नेता विनोद शर्मा। पिछली बार उन्होंने अपनी हरियाणा जनचेतना पार्टी से चुनाव लड़कर कांग्रेस का खेल बिगाड़ा था। इस बार मैदान में नहीं हैं, लेकिन जिधर जाएंगे-फायदा देंगे। 

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