भीख मांगने वाला युवक करोड़पति निकला, 2 साल बाद घर का नंबर याद आने से पहचान हुई

3 वर्ष पहले
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धनंजय ठाकुर ने ग्रेजुएशन भी किया है। (लाल कपड़ों में धनंजय।) - Dainik Bhaskar
धनंजय ठाकुर ने ग्रेजुएशन भी किया है। (लाल कपड़ों में धनंजय।)
  • यूपी के आजमगढ़ का धनंजय ठाकुर हरियाणा के अम्बाला कैंट की पुरानी अनाज मंडी में मंदिर के बाहर भीख मांगता था
  • गुरुवार को पैर में चोट लगने के बाद खून बह रहा था, एक संस्था के सदस्य ने ड्रेसिंग के लिए बुलाया; जहां बातचीत में घर का नंबर याद आया
  • फोन पर परिवार वालों ने बताया, नशे का आदत थी, इससे उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ी, फिर एक दिन घर छोड़ गया; तब से खोज रहे थे

अम्बाला (रीतिका एस. वोहरा). हरियाणा के अम्बाला कैंट की पुरानी अनाज मंडी में मंदिर के बाहर दो साल से भीख मांग रहा युवक करोड़पति निकला। दो बहनों का इकलौता भाई आजमगढ़ का रहने वाला है। उसका वास्तविक नाम धनंजय ठाकुर है, लेकिन मंडी आने-जाने वाले और स्थानीय लोग उसे जटाधारी कहते थे। पिता राधेश्याम सिंह कोलकाता की एक बड़ी कंपनी में एचआर हैं। शुक्रवार को धनंजय की छोटी बहन नेहा सिंह उसे लखनऊ से लेने पहुंची तो इकलौते लाडले भाई के बिछड़ने से लेकर मिलने तक की कहानी सामने आई।


दरअसल, गुरुवार को धनंजय के पैर से खून बहता देख गीता गोपाल संस्था के सदस्य साहिल ने उसे पट्टी के लिए पास बुलाया। इसी दौरान उससे पूछा- "कहां के रहने वाले हो। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने वह जगह नहीं बता सका, लेकिन उसने थोड़ा याद करने के बाद एक मोबाइल नंबर बताया। यह नंबर आजमगढ़ में कनेक्ट हुआ। शिशुपाल ने कॉल रीसीव की। इसके बाद साहिल ने धनंजय के बारे में बात की तो पता लगा शिशुपाल युवक के ताऊ (चाचा) हैं। उन्होंने ही युवक का नाम धनंजय उर्फ धर्मेंद्र बताया। धनंजय दो साल पहले घर से गायब हो गया था। शुक्रवार को धनंजय की बहन नेहा उसे लेने पहुंची। भाई मंदिर के बाहर बैठा था। दाढ़ी और बाल बढ़े हुए थे। बहन को देखते ही धनंजय ने उसे पहचान लिया। बहन के मुंह से सिर्फ यही निकला-धमेंद्र तुम्हें भाई का फोन नंबर याद था, तो दो साल पहले फोन नहीं करवा सकते थे।

बहुत ढूंढा, परिजन तो आस छोड़ बैठे थे
नेहा ने दैनिक भास्कर को बताया कि इकलौता भाई होने की वजह से धनंजय परिवार का लाडला था और हठी भी। वह ग्रेजुएशन किए है। उसे नशे की लत लग गई थी। इससे मनः स्थिति बिगड़ती गई और वह एक दिन घर छोड़कर चला गया। परिवार ने उसे ढूंढने के लिए हर कोशिश की, लेकिन नहीं मिला। अब तक तो घरवालों की आस भी छूट गई थी। दो दिन पहले ही उन्होंने बुआ से कहा था, लगता है अब भाई दुनिया में नहीं है। उसके लिए गुरुवार के व्रत रखते थे। संयोग की बात है कि गुरुवार को ही ईश्वर ने भाई की जानकारी दे दी।