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खेमका की एसीआर के नंबर पर विज बोले, सच्चाई के लिए अड़ने के भी नंबर होते हैं

एक वर्ष पहले
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  • विज ने कहा मैंने अपनी समझ से नंबर दिए थे, ईमानदारी और शराफत के भी नंबर होते हैं  
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अम्बाला। आईएएस अशोक खेमका की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एसीआर) से नकारात्मक टिप्पणी हटाए जाने के बाद मंत्री अनिल विज का कहना है कि उन्होंने अपनी समझ से ठीक नंबर दिए थे। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और शराफत के भी नंबर होते हैं। सच्चाई के लिए अड़ने के भी नंबर होते हैं। उस हिसार से मैंने खेमका को पूरे नंबर दिए थे। सीएम द्वारा रैकिंग कम कर दिए जाने पर विज ने कहा कि उनका अपना मूल्यांकन हो सकता है, हर आदमी का अपना-अपना आंकलन है। 
 

1) खेमका को कोर्ट से बड़ी राहत एसीएम में नंबर कम कर देने से हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

गौरतलब है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में प्रधान सचिव रहते खेमका ने 7 जून 2017 को साल 2016-17 के लिए अप्रेजल भरा। रिपोर्टिंग अथॉरिटी मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने 10 में 8.22 अंक दिए। रिव्यू अथॉरिटी यानी विभाग के मंत्री अनिल विज ने 9.92 अंक दिए। मंत्री ने लिखा था...'3 साल में 20 से ज्यादा अफसरों के साथ काम किया, पर कोई अफसर खेमका के करीब नहीं था। उनकी योग्यता, सच्चाई, ईमानदारी व बुद्धिमत्ता का कोई सानी नहीं।'  

31 दिसंबर 2017 को खेमका की एप्रेजल रिपोर्ट एक्सपेक्टिंग अथॉरिटी यानी सीएम मनोहर लाल के पास पहुंची तो उन्होंने अंक 9 कर दिए। सीएम की टिप्पणी हटवाने व विज के दिए अंक बहाल कराने को खेमका केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) पहुंचे। वहां से फैसला सरकार के पक्ष में आया तो खेमका हाईकोर्ट पहुंचे।   

बीते सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की 2016-17 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में दर्ज एक्सपेक्टिंग अथॉरिटी यानी सीएम की प्रतिकूल टिप्पणी को खारिज करने के निर्देश दिए। जस्टिस राजीव शर्मा व जस्टिस कुलदीप सिंह की बेंच ने कहा, 'सत्यनिष्ठा से काम करने वाले अधिकारी को प्रोटेक्ट करने की जरूरत है।   

चीफ सेक्रेटरी ने भी माना है कि खेमका समझदार व अनुभवी हैं। उनकी ईमानदारी पर संदेह नहीं किया जा सकता। ऐसे अफसर को विपरीत परिस्थितियां भी देखनी पड़ती हैं। ऐसे में उन्हें एक्सपेक्टिंग अथॉरिटी के दिए 9 अंक खारिज कर रिव्यू अथाॅरिटी यानी विभाग के मंत्री अनिल विज के दिए 9.92 अंक मान्य किए जाएं।'   

सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपिंदर सिंह नलवा ने कहा कि एक्सपेक्टिंग अथॉरिटी के पास अफसर की एसीआर पर निजी विचार रखने का अधिकार है। फैसले पर खेमका बोले कि न्यायपालिका ने न्याय किया है।  

परफॉर्मेंस के आकलन के लिए हर अधिकारी व कर्मचारी की सालाना एसीआर बनती है। इसी के आधार पर प्रमोशन व इंक्रीमेंट तय होता है। आईएएस के लिए इसमें कम से कम गुड जरूर चाहिए। यदि लगातार एवरेज या खराब परफॉर्मेंस रहती है तो 20-25 साल में रिटायर कर दिया जाता है।  

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