अादि भवानी मां को कात्यायनी के रूप में पूजा गया : भारती

Ambala News - सिटी की जयराम सेठी धर्मशाला में प्रवाहित ज्ञान गंगा श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन प्रवचन सुनती महिलाएं।...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:16 AM IST
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सिटी की जयराम सेठी धर्मशाला में प्रवाहित ज्ञान गंगा श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन प्रवचन सुनती महिलाएं।

भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी

जयराम सेठी धर्मशाला में प्रवाहित ज्ञान गंगा श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन श्री रेणुका जी से अाए महामंडलेश्वर दयानंद भारती को पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। मौके पर नरेश बंसल, प्रदीप गोयल, मदनलाल, जगदीश अाहूजा, मामचंद सैनी, हरिनारायण चावला, राजीव मौजूद रहे। भारती ने कहा कि छठे नवरात्र में अादि भवानी मां की कात्यायनी के रूप में पूजा की गई है। देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। यह देवी का कन्या स्वरूप है, जो अपने भक्त ऋषि कात्यायन की इच्छा पूरी करने के लिए पुत्री रूप में प्रकट हुईं थी। ऋषि कात्यायन माता के भक्त थे।

उनकी कोई संतान नहीं थी। इन्होंने तप कर मां भवानी से वरदान मांगा कि आप मुझे पुत्री रूप में प्राप्त हों। इस बीच महिषासुर का अत्याचार बढ़ता जा रहा था। उसने देवताओं को स्वर्ग से भगा दिया था। देवताओं के क्रोध से एक तेज प्रकट हुआ जो कन्या रूप में था। उस तेज ने ऋषि कात्यायन के घर पुत्री रूप में जन्म लिया। ऋषि जानते थे कि वह आदि भवानी जगजननी मां ही वरदान के कारण पुत्री रूप में उनके घर प्रकट हुई हैं। ऋषि ने देवी की प्रथम पूजा की और वह देवी कात्यायन ऋषि की पुत्री होने के कारण कात्यायनी कहलाईं। नवरात्रि मे छठे दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि को विशेषतः तीन भागों मे तमस, रजस एवं सत्व अर्थात तीन गुणों के अनुरूप देवी पराम्बा की उपासना साधक करते हैं। पहले तीन दिन तमस गुण को जीतने के, मध्य के तीन दिन रजस गुण को जीतने और आखिर के तीन दिन में सत्व गुण को जीतने की साधना साधक द्वारा की जाती है। तत्पश्चात ही एक सच्चे साधक को पराम्बा भगवती का सान्निध्य मिलता है। उन्होंने कहा कि चाहे हम कितने ही नवरात्र पूजन कर लें, कितनी ही घंटियां मंदिरों में बजा लें, अगर अपने घर की देवी अपनी मां, बहन, बेटी और भार्या के मान स्वाभिमान की रक्षा न कर उनसे अमानवीय व्यवहार करते हैं तो सब पूजा-पाठ व्यर्थ है। कथा में चरणजीत मोहड़ी, पीयूष गुप्ता, नीतिका गुप्ता, नीना गुप्ता एवं रमेश गुप्ता, रजनीश जंडली, दीपचंद गुप्ता, बृजभूषण गोयल, कपिल गोयल, पुुरुषोत्तम मोहड़ी, हरनेक मोहड़ी, बृजेश शर्मा सहित सभी भक्तों ने महाराज से आशीर्वाद लिया।

प्रवचन करते दयानंद

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