महंत मीना वालिया के निधन के बाद 450 साल पुरानी साढौरा की किन्नर गद्दी पर बैठी विजेता

Ambala News - साढौरा में किन्नरों की 450 साल पुरानी गद्दी के महंत मीना वालिया का 21 अक्टूबर को निधन होने से रिक्त हुई गद्दी पर...

Nov 11, 2019, 07:15 AM IST
साढौरा में किन्नरों की 450 साल पुरानी गद्दी के महंत मीना वालिया का 21 अक्टूबर को निधन होने से रिक्त हुई गद्दी पर विजेता को गद्दीनशीन किया गया है। हिमाचल, पंजाब व हरियाणा से आए किन्नर महंतों ने किन्नर परंपरा के अनुसार विजेता को गद्दीनशीन करने की रस्म अदा की। गद्दीनशीन होने के बाद विजेता ने किन्नर परंपरा के अनुसार काम करने के अलावा किन्नरों व समाज के उपेक्षित वर्गों के उत्थान के लिए काम करने की बात कही। दिल्ली की महंत बेला, अंबाला की महंत शबरम व पूनम, पटियाला की महंत कमला व मंजू, जगाधरी की महंत रेशमा, पांवटा साहिब की महंत राजकुमारी, कैथल की महंत किरण, पानीपत की महंत सुमन, कालका की महंत स्वीटी, ऊना की महंत रजनी, फरीदाबाद की महंत सिमरन व बठिंडा की महंत संतोष उपस्थित रहीं।

450 साल पहले हिमाचल की सिरमौर रियासतों के तत्कालीन नरेश ने किन्नरों की इस गद्दी को मान्यता देते हुए अपने हस्ताक्षरों व मोहर से इनके पक्ष में हुक्मनामा जारी किया था। इस हुक्मनामे में रियासत की जनता को कहा गया था कि किसी भी खुशी के मौके पर किन्नर समाज को बगैर कोई बहस किए नजराना दिया जाएगा। वैसे तो किन्नर समाज की हर धर्म में आस्था है, लेकिन इस गद्दी की स्थापना के समय अब रोजा पीर के नाम से विख्यात 11वीं के पीर व सूफी संत सैय्यद कादर शाह कुमैशुल आजम की शिक्षाओं से प्रभावित होकर किन्नरों की गद्दी के तत्कालीन गुरु ने इनको अपना गुरु मान लिया था। तब से लेकर आज तक किन्नर समाज साढौरा के मोहल्ला खारी कुंई की प्राचीन मस्जिद में स्थापित गद्दी को अपनी गुरु गद्दी मानता आ रहा है।

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