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कॉलेज टीचर एसोसिएशन का आरोप- वादे से पीछे हटे दुष्यंत चौटाला

एक वर्ष पहले
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कॉलेज टीचर एसोसिएशन (सीटीए) ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने से इंकार करने पर प्रदेश की गठबंधन सरकार की निंदा की है। एसोसिएशन का कहना है कि अपने वादे के प्रति जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) सुप्रीमो दुष्यंत चौटाला अब उदासीनता दिखा रहे हैं। सीटीए के सचिव मदन राठी ने बताया कि जेजेपी ने सरकार में आने से पहले पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया था लेकिन अब इसे लागू नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार ज्ञापन तक दे चुके हैं। यहां तक की नैना चौटाला तक से भी मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। बता दें कि कर्मचारियों के विरोध के बावजूद यूपीए सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम बंद कर न्यू पेंशन स्कीम लागू कर दी थी।

नहीं है कोई प्रस्ताव विचाराधीन: उल्लेखनीय है कि हरियाणा विधानसभा में डबवाली से कांग्रेस विधायक अमित सिहाग ने ओल्ड पेंशन स्कीम पेंशन स्कीम को लेकर सवाल उठाए थे, इसके जवाब में प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने का कोई प्रस्ताव उनके पास विचाराधीन नहीं है।

ओपीएस और एनपीएस में मूल अंतर

एसोसिएशन ने बताया कि ओपीएस के अंतर्गत पेंशन के नियम तय है कि अगर किसी का एक लाख रुपए वेतन है तो रिटायरमेंट के वक्त बेसिक वेतन का 50 प्रतिशत प्लस डीए पेंशन के रूप में मिलेंगे। यानी एक लाख का 50 प्रतिशत है 50 हजार व डीए कर्मचारी को पेंशन के रूप में मिलेंगे। इसके अलावा अगर पेंशनर्स के निधन पर उसकी प|ी को पेंशन का 60 फीसद मासिक मिलेगा। वहीं एनपीएस में यह जरूरी नहीं है कि पेंशन कितनी मिलेगी, इसे लेकर नियम स्पष्ट नहीं है। 5,10, 15 हजार कुछ भी मिल सकते हैं। एनपीएस के तहत कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी में से एचआरए को माइनस कर देते हैं। फिर उसका 10% कर्मचारी के वेतन से और 10% सरकार अपनी तरफ से एनपीएस में जमा करा देती। रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारी इसमें से केवल 60% ही निकाल सकता है। बाकी 40% के हिसाब से कर्मचारी की पेंशन लगेगी। वहीं, कर्मचारी के निधन के बाद इस 40% प्रतिशत रकम को सरकार खुद रखेगी या फिर नॉमिनी को देगी, यह नियम भी स्पष्ट नहीं है।

नेताओं ने खुद को ओल्ड पेंशन स्कीम में रख कर्मचारियों को कर दिया था न्यू पेंशन स्कीम में

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं है। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का फैसला केंद्र के स्तर पर होना है, लेकिन राज्य सरकार इसके लिए विधानसभा में प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजने को भी राजी नहीं है। एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि नेताओं ने खुद को ओपीएस में जारी रखा है जबकि कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत कर दिया है। तार्किक दृष्टि से सारे नेता वर्ष 2004 के बाद जन प्रतिनिधि बने हैं उन्हें भी एनपीएस में आना चाहिए। क्यों केवल कर्मचारियों को ही एनपीएस में लाया गया है?
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