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- Ambala News Haryana News Child Welfare Council Has Got 370 Out Of 389 Children In A Year And A Half 30 Separated Children Come In Contact In A Month
डेढ़ साल में 389 में से 370 बच्चों को अभिभावकों से मिला चुकी बाल कल्याण परिषद, महीने में 30 बिछड़े बच्चे आते हैं संपर्क में
अम्बाला बाल कल्याण परिषद के रेलवे हेल्प डेस्क को शुरू हुए अभी करीब डेढ़ वर्ष ही हुए हैं। इस दौरान डेस्क ने अभिभावकों से बिछड़े 389 में से 370 बच्चाें को उनके मां-बाप से मिलाया। बाकियों को सुरक्षित हाथों में सुपुर्द किया गया है। डेस्क के काेअाॅर्डिनेटर राकेश कुमार ने बताया कि महीने में औसतन 30 बिछड़े बच्चे उनके संपर्क में आते हैं। ओपन शेल्टर होम काेअाॅर्डिनेटर दर्शन कुमार व सोशल वर्कर मधु कौशिक ने बताया कि 13 अगस्त 2014 से 29 फरवरी 2020 तक होम में 603 बच्चे आए जिनमें से 528 बच्चों को उनके मां-बाप को सौंप दिया जबकि 75 को परमानेंट शेल्टर होम भेजा गया।
साेशल वर्कर मधु काैशिक ने बताया कि अाेपन शेल्टर होम का इस्तेमाल शॉर्ट पीरियड ऑफ टाइम (कम अवधि) के लिए बच्चों काे रखने के लिए किया जाता है। अधिकतम हम केवल 72 घंटे के लिए बच्चों को यहां रख सकते हैं। फिर उन्हें स्थायी शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाता है। इस दौरान बच्चों की देखभाल के लिए हमारी 7 लोगों की टीम काम करती है। इसमें मुझ समेत दर्शन कुमार, देव कुमार, गुरबचन सिंह, रावेल सिंह और जगदीप सिंह शामिल हैं।
घर छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा यूपी के
पिछले डेढ़ साल में घर छोड़ने वालों में यूपी के 80, पंजाब व बिहार के 50-50 और हरियाणा के 40 बच्चे शामिल हैं। वहीं, नेपाल के 10 बच्चे भी रेलवे हेल्प डेस्क के संपर्क में आए थे।
पंजाब, हरियाणा के बच्चे बड़ों की डांट से तो यूपी और बिहार के काम की तलाश में छोड़ते हैं घर
राकेश कुमार ने बताया कि अधिकतर मामलों में देखा गया है कि पंजाब और हरियाणा के बच्चे अपने अभिभावकों की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर निकल जाते हैं। रेलवे स्टेशन देशभर में जाने के लिए एक आसान साधन है तो वह ट्रेन में बैठ जाते हैं। वहीं, देखने में आया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकतर बच्चे काम की तलाश में घर को छोड़ते हैं।
नशेड़ी बच्चे बने मुसीबत
ओपन शेल्टर होम काेअाॅर्डिनेटर दर्शन कुमार ने बताया कि वर्ष 2015-2016 के दौरान करीब 25 बच्चों की क्षमता वाले इस शेल्टर होम में 40 बच्चे रखने पड़े थे। इनमें करीब 10-12 बच्चे नशेड़ी थे। एक हफ्ते पहले लाए इन नशेड़ी बच्चों ने एक रात यहां से भागने की योजना के तहत मेरे कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। हालांकि एक बच्चे ने सही समय पर दरवाजा खोल दिया। रोकने पर उन्होंने मुझ पर ही हमला कर दिया। पर वे मेन गेट का ताला नहीं तोड़ पाए।
पति से झगड़े के चलते प|ी 2 साल के बच्चे को छोड़ गई रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर
राकेश कुमार ने बताया कि 8 महीने पहले गाजियाबाद की रहने वाली महिला पति से झगड़े के चलते अपने 2 साल के बच्चे को रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर छोड़कर चली गई। साथ ही दूध की बोतल और उसमें एक मोबाइल नंबर भी छोड़ गई जो लंबे समय तक बंद आ रहा था। बाद में जांच में उसने यह बात स्वीकार की।
अम्बाला में लड़कियों के लिए स्थायी होम नहीं है। भविष्य में इसे खोलने की योजना पर विचार किया जाएगा।
शिवानी सूद, जिला बाल कल्याण परिषद अधिकारी।