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4 एकड़ में बनने वाले काॅमन फेसिलिटी सेंटर का शिलान्यास, सरकार लगाएगी 2 करोड़ की मशीनरी

Ambala News - भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी कभी अम्बाला की पहचान रहे मिक्सी उद्योग के फिर पुराने दिन लौटने की आस जगी है। बुधवार...

Jul 04, 2019, 07:15 AM IST
Ambala News - haryana news construction of 4 acre eminem facilitation center government will impose 2 million machinery
भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी

कभी अम्बाला की पहचान रहे मिक्सी उद्योग के फिर पुराने दिन लौटने की आस जगी है। बुधवार को गांव लोहगढ़ में मिक्सी उद्योग के लिए कॉमन फेसिलिटी सेंटर का शिलान्यास किया गया। 4 एकड़ में बनने वाले इस सेंटर में सरकारी खर्च पर टूल रूम में आधुनिक मशीनरी लगेगी जो उद्यमियों के लिए फायदेमंद होगी। 53 साल पुराने मिक्सी उद्योग को पिछले 20 साल में झटके लगे। बहुत सी इकाइयों हिमाचल में पलायन कर गई थी क्योंकि वहां टैक्स की छूट थी। उम्मीद है कि सेंटर में सुविधाएं मिलने से यह उद्योग फिर खड़ा होगा। अम्बाला में मिक्सी उद्योग की शुरुआत करने वाले बाबू राजेंद्रनाथ ने भूमि पूजन के बाद कलश स्थापित किया। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाले इस फेसिलिटी सेंटर के संचालन उद्यमियों की 21 सदस्यीय कमेटी करेगी। आधुनिक टूल रूम में दाे करोड़ रुपए तक की मशीनरी लगेगी। इस मशीनरी एसोसिएशन निर्धारित काॅस्ट पर सभी मिक्सी व्यापारी इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा बिल्डिंग बनाने के लिए सरकार वित्तीय सहायता देगी।

एक्साइज में छूट हाेने पर मिक्सी उद्योग ने किया था पलायन| 1999 के बाद अम्बाला से कई मिक्सी उद्योग पलायन कर गए थे। हरियाणा में एक्साइज टैक्स 14 प्रतिशत लगता था जबकि हिमाचल में उद्योग लगाने पर टैक्स से छूट मिलती थी। इसी वजह से बड़े मिक्सी उद्योगपतियों ने हिमाचल प्रदेश के कालाअम्ब, बद्दी, परवाणु की तरफ रुख किया था। अब जीएसटी लागू हाेने के बाद हरियाणा और हिमाचल में टैक्स के नियम एक जैसे हाे गए। इसके बाद काफी मिक्सी उद्योगपति वापस आ गए। वापस आने का दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि अम्बाला से हिमाचल में माल लाने और ले जाने में किराया काफी लगता है।

2017 में अडॉप्ट की थी केंद्र सरकार की स्कीम| अम्बाला किचन एप्लाइंसेस एसेसिएशन के प्रधान अजय अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की स्कीम काॅमन फेसिलिटी सेंटर मिक्सी व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हाेगी। 2017 में 21 सदस्यों ने केंद्र सरकार की स्कीम एसोसिएशन अपनाया था। गांव लाेहगढ़ के पास 4 एकड़ जमीन खरीदी थी। जमीन के ऊपर दाे करोड़ तक मशीनरी सरकार लगाकर देगी, जबकि बिल्डिंग फाइनेंसिंग के लिए भी व्यापारियों एसोसिएशन पैसा मिलेगा। इस मिक्सी सेंटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए एसेसिएशन मेंबर कार्य करेंगे। सभी व्यापारी निर्धारित काॅस्ट पर मशीनरी का उपयाेग कर सकेंगे। अम्बाला में फिर से मिक्सी उद्योग एसोसिएशन संजीवनी मिलेगी।

15 हजार तक जुड़े कर्मचारी: अम्बाला की पहचान मिक्सी उद्योग से हुई। इसका देश और प्रदेश में ही नहीं बल्कि विदेशों में नाम है। मिक्सी उद्योग घर-घर से लेकर फैक्ट्री तक चल रहा है जिससे करीब 15 हजार तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कर्मचारी जुड़े हैं।

कन्या पूजन के बाद हुआ भूमि पूजन...

सिटी में मिक्सी क्लस्टर का भूमि पूजन करते मिक्सी उद्योग के राजेन्द्र नाथ।

भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी

कभी अम्बाला की पहचान रहे मिक्सी उद्योग के फिर पुराने दिन लौटने की आस जगी है। बुधवार को गांव लोहगढ़ में मिक्सी उद्योग के लिए कॉमन फेसिलिटी सेंटर का शिलान्यास किया गया। 4 एकड़ में बनने वाले इस सेंटर में सरकारी खर्च पर टूल रूम में आधुनिक मशीनरी लगेगी जो उद्यमियों के लिए फायदेमंद होगी। 53 साल पुराने मिक्सी उद्योग को पिछले 20 साल में झटके लगे। बहुत सी इकाइयों हिमाचल में पलायन कर गई थी क्योंकि वहां टैक्स की छूट थी। उम्मीद है कि सेंटर में सुविधाएं मिलने से यह उद्योग फिर खड़ा होगा। अम्बाला में मिक्सी उद्योग की शुरुआत करने वाले बाबू राजेंद्रनाथ ने भूमि पूजन के बाद कलश स्थापित किया। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाले इस फेसिलिटी सेंटर के संचालन उद्यमियों की 21 सदस्यीय कमेटी करेगी। आधुनिक टूल रूम में दाे करोड़ रुपए तक की मशीनरी लगेगी। इस मशीनरी एसोसिएशन निर्धारित काॅस्ट पर सभी मिक्सी व्यापारी इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा बिल्डिंग बनाने के लिए सरकार वित्तीय सहायता देगी।

एक्साइज में छूट हाेने पर मिक्सी उद्योग ने किया था पलायन| 1999 के बाद अम्बाला से कई मिक्सी उद्योग पलायन कर गए थे। हरियाणा में एक्साइज टैक्स 14 प्रतिशत लगता था जबकि हिमाचल में उद्योग लगाने पर टैक्स से छूट मिलती थी। इसी वजह से बड़े मिक्सी उद्योगपतियों ने हिमाचल प्रदेश के कालाअम्ब, बद्दी, परवाणु की तरफ रुख किया था। अब जीएसटी लागू हाेने के बाद हरियाणा और हिमाचल में टैक्स के नियम एक जैसे हाे गए। इसके बाद काफी मिक्सी उद्योगपति वापस आ गए। वापस आने का दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि अम्बाला से हिमाचल में माल लाने और ले जाने में किराया काफी लगता है।

2017 में अडॉप्ट की थी केंद्र सरकार की स्कीम| अम्बाला किचन एप्लाइंसेस एसेसिएशन के प्रधान अजय अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की स्कीम काॅमन फेसिलिटी सेंटर मिक्सी व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हाेगी। 2017 में 21 सदस्यों ने केंद्र सरकार की स्कीम एसोसिएशन अपनाया था। गांव लाेहगढ़ के पास 4 एकड़ जमीन खरीदी थी। जमीन के ऊपर दाे करोड़ तक मशीनरी सरकार लगाकर देगी, जबकि बिल्डिंग फाइनेंसिंग के लिए भी व्यापारियों एसोसिएशन पैसा मिलेगा। इस मिक्सी सेंटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए एसेसिएशन मेंबर कार्य करेंगे। सभी व्यापारी निर्धारित काॅस्ट पर मशीनरी का उपयाेग कर सकेंगे। अम्बाला में फिर से मिक्सी उद्योग एसोसिएशन संजीवनी मिलेगी।

15 हजार तक जुड़े कर्मचारी: अम्बाला की पहचान मिक्सी उद्योग से हुई। इसका देश और प्रदेश में ही नहीं बल्कि विदेशों में नाम है। मिक्सी उद्योग घर-घर से लेकर फैक्ट्री तक चल रहा है जिससे करीब 15 हजार तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कर्मचारी जुड़े हैं।

देश की पहली मिक्सी बनी अम्बाला में

बाबू राजेंद्र नाथ ने अम्बाला और हरियाणा एसोसिएशन ही नहीं, बल्कि देश एसोसिएशन मिक्सी उद्योग लगाकर पहली मिक्सी दी थी। राजेंद्र नाथ बताते है कि 1966 में मिक्सी बनाने की शुरुआत की थी। इससे पूर्व उनका इलेक्ट्रिक माेटर बनाने का कार्य था। उस दाैरान कैंट की हिंदुस्तान साइंटिफिक ने उन्हें मिक्सी की माेटर बनाने के लिए दी थी। भारत में कहीं वह माेटर नहीं बनती थी। तब उन्होंने बड़ी मुश्किल से काफी मेहनत लगाकर माेटर तैयार कर दी थी। मगर हिंदुस्तान साइंटिफिक एसोसिएशन डिफेंस एक बड़ा अाॅर्डर मिल गया था ताे उन्होंने मिक्सी बनाना बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने मिक्सी का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे व्यापार बढ़ता गया। उनकी बनाई मिक्सी विदेशों तक जाने लगी। उस दाैरान अम्बाला में एसके शर्मा डीसी थे। वह इंग्लैंड में गए ताे उन्होंने मेड इन अम्बाला की बनी हुई मिक्सी देखी ताे वह बहुत खुश हुए। उन्होंने अम्बाला में वापस आकर उनसे मुलाकात की। डीसी ने उन्हें व्यापार बढ़ाने के लिए जगह मुहैया करवाई थी। देश के साथ विदेशों में भी गाेपी मिक्सी जानी शुरू हाे गई।

एेसे मिला मिक्सी एसो. गाेपी का नाम...

बाबू राजेंद्र नाथ ने अपने प्रोडक्ट का नाम क्लेमिक्स रखा था। उस दाैरान मिक्सी दूध, दही, लस्सी बिलोने के ज्यादा काम आती थी। प्रोडक्ट ताे चला, मगर इसका नाम लाेगाें की जुबान पर नहीं चढ़ा। मिक्सी के बाॅक्स पर लस्सी बिलोती गाेपी की तस्वीर छपी आती थी। लोग इस प्रोड्क्ट को गोपी के नाम से ही जानने लगे। कुछ सालाें बाद उन्होंने क्लेमिक्स का नाम बदलकर गाेपी रख दिया।

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