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डीएसई के ऑर्डर- एसडी विद्या की मान्यता रद्द होगी, प्रिंसिपल बोलीं- हमारी नहीं सुनी

Ambala News - दीवान हरिकृष्ण दास एसडी पब्लिक स्कूल का नाम बिना अनुमति बदलकर द एसडी विद्या रखने को नियमों के खिलाफ मानते हुए...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:22 AM IST
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दीवान हरिकृष्ण दास एसडी पब्लिक स्कूल का नाम बिना अनुमति बदलकर द एसडी विद्या रखने को नियमों के खिलाफ मानते हुए डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन (डीएसई) ने अगले सत्र से स्कूल की मान्यता रद्द करने और बच्चे दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं। 10 सितंबर को डीएसई डॉ. बलकार सिंह ने यह स्पीकिंग ऑर्डर मार्च 2015 की एक शिकायत के आधार पर दिया है। दूसरी तरफ स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि स्कूल का नाम बदलने की मंजूरी डीएसई कार्यालय से जुलाई 2015 में मिल गई थी। डीएसई ने स्कूल प्रबंधन का पक्ष सुने बगैर यह ऑर्डर जारी कर दिया। इसके खिलाफ सोमवार को ही शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के पास अपील की जाएगी। स्कूल में 2,100 स्टूडेंट्स व 120 टीचर्स हैं।

पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 30 मार्च 2015 ने दो बिंदुओं पर शिकायत की थी। पहली यह कि स्कूल प्रबंधन ने बिना किसी अप्रूवल के दीवान हरिकृष्ण दास एसडी पब्लिक स्कूल (डीएचडीएसडी) का नाम द एसडी विद्या कर दिया। दूसरी यह कि स्टूडेंट्स से फीस ज्यादा ली जा रही है। इस मामले की जांच जाॅइंट डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन ने की थी। फीस एंड फंड रेगुलेटरी कमेटी (एफएफआरसी) ने 29 अगस्त 2017 को जांच रिपोर्ट में कहा कि स्कूल प्रबंधन ने प्रस्ताव पास कर 25 अप्रैल 2012 को स्कूल का नाम बदला। फीस बढ़ोत्तरी और ओवर चार्जिंग का कोई सबूत पेश नहीं हुआ। नाम बदलने का मामला एफएफआरसी की ज्यूरिसडिक्शन में नहीं था तो एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने डीएसई को सौंप दिया था।

स्पीकिंग ऑर्डर में ये कहा

स्कूल मैनेजमेंट ने 28 दिसंबर 2010 को डीएचडी एसडी पब्लिक स्कूल के नाम पर येस बैंक में खाता खोला। जिसे 20 अगस्त 2012 को बंद कर दिया। मैनेजमेंट ने फिर 29 मार्च 2013 को एसडी विद्या के नाम खाता खोला। इससे साबित हुआ कि जब स्कूल प्रबंधन समिति ने नाम बदलने की अर्जी लगाई, तब एक की कैंपस में डीएचडी एसडी पब्लिक स्कूल तथा एसडी विद्या नाम से दो स्कूल चल रहे थे। हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल्स 2003 के तहत एक परिसर में दो स्कूल विभिन्न बोर्ड व काउंसिल की मान्यता के एक ही बिल्डिंग में नहीं चला सकते। स्पीकिंग ऑर्डर में कहा कि स्कूल की मान्यता व एनओसी 31 मार्च 2020 से वापस ले ली जाए। स्कूल में एडमिशन और एनरोलमेंट 2020-21 से बंद कर दी जाएगी। जो भी मौजूदा छात्र इस स्कूल में पढ़ रहे हैं, उन्हें अन्य स्कूल में ट्रांसफर और शिफ्ट किया जाएगा।

अभिभावकों की चिंता : क्या स्कूल बंद हो जाएगा

एक्सपर्ट की राय: ऐसा संभवत नहीं होगा। क्योंकि स्कूल मैनेजमेंट के पास अपील में जाने का मौका है। इससे पहले निदेशालय ने कई साल पहले भी एक निजी स्कूल की भी मान्यता खत्म करने संबंधी आदेश दिया था, स्कूल अभी भी चल रहा है।

सीबीएसई से पत्राचार करते रहे, बाद में डीएसई से अप्रूवल ली: प्रिंसिपल

स्कूल मैनेजमेंट ने 2012 में नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया। स्कूल ने 2013 में पहले सीबीएसई को एप्रोच किया, क्योंकि स्कूल सीबीएसई से एफिलिएटेड है। उस समय लगा था कि सीबीएसई ही अप्रूवल देगी। सीबीएसई से पत्राचार होता रहा। सीबीएसई ने बाद में बताया कि उन्हें स्कूल की अप्रूवल के लिए शिक्षा निदेशक (डीएसई) से लेनी होगी। जिसके बाद प्रबंधन ने डीएसई को आवेदन किया। फार्म-2 भरा। 11 जून 2015 को डीएसई से अनुमति मिल गई। निदेशक से अनुमति मिलने के बाद सीबीएसई से भी नाम बदलने का सर्टिफिकेट मिल गया था। एक शिकायत पर डीएसई की ओर से 2015 में स्कूल को शोकॉज नोटिस दिया गया था। पिछले साल शिक्षा निदेशक राजीव र| के समक्ष मैनेजमेंट ने अपना पक्ष रखा था। बाद में डीएसई राकेश गुप्ता के सामने भी पक्ष रखा। नए डीएसई डॉ. बलकार सिंह के सामने भी पक्ष रखने के लिए दो बार गए लेकिन वे नहीं मिले। इसी बीच यह आदेश दे दिया। स्कूल ने कोई रुल नहीं तोड़ा है। जब तक सीबीएसई से मंजूरी नहीं मिली तब तक स्कूल के नए नाम से एक भी बच्चे को सर्टिफिकेट जारी नहीं किया।सोमवार को इस फैसले के खिलाफ एसीएस के पास अपील की जाएगी। -जैसा प्रिंसिपल नील इंद्रजीत संधू ने बताया

द एसडी बनने की इनसाइड स्टोरी

द एसडी विद्या जिस एसडी कॉलेज सोसाइटी के अधीन है, उसके प्रधान बालकृष्ण सोनी हैं। दीवान हरिकृष्ण दास उनके दादा थे। 2011 में सोसाइटी को लगा कि डीएचडी एसडी पब्लिक स्कूल का नाम पुराने किस्म का है, इसे मॉडर्न नाम देना चाहिए, जो ब्रांड बन सके। 2011-12 में दिल्ली की एक एजेंसी हायर की गई। एजेंसी ने द एसडी विद्या नाम सुझाया। इसके बाद सोसाइटी के नोएडा और अम्बाला कैंट में चलने वाले स्कूलों को यह नया नाम दिया। नए बोर्ड लगा दिए, बैंक में नए नाम से खाता भी खुलवा दिया। चूक यह रही कि नाम बदलने के लिए कागजी कार्रवाई करना भूल गए। इस चूक का अहसास तब हुआ जब फीस बढ़ोत्तरी को लेकर पेरेंट्स ने मार्च 2015 में मोर्चा खोला। तब स्कूल मैनेजमेंट ने जून 2015 में नाम बदलने की एनओसी व अप्रूवल की कागजी कार्रवाई शुरू की।

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