4 साल में अवैध खनन की 2500 शिकायतें, 487 में ही एफआईआर हुई, 98 प्रतिशत कोर्ट में गिरीं

3 वर्ष पहले
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अवैध खनन करने वालों ने खेत में हाई टेंशन तारों के खंबों की जड़ें भी खोद दी। - Dainik Bhaskar
अवैध खनन करने वालों ने खेत में हाई टेंशन तारों के खंबों की जड़ें भी खोद दी।
  • अवैध माइनिंग की एफआईआर कोर्ट में नहीं टिक पा रही, हाईकोर्ट ने पूछा ऐसा कैसे हो रहा है  

यमुनानगर (कुलभूषण सैनी)। पुलिस एफआईआर में जिसे अवैध माइनिंग दिखाती है, उसे कोर्ट में साबित नहीं कर पा रही। ऐसा एक-दो केस में नहीं बल्कि जिन 332 केसों में फैसला आया है उनमें से 326 मामलों में हो चुका है। इतनी एफआईआर कोर्ट में यूं गिर गईं जैसे हाथ से रेत फिसलता है। सवाल ये कि पुलिस केस में मजबूती से हाथ क्यों नहीं डालती। दैनिक भास्कर ने पिछले 8 साल में दर्ज हुई अवैध माइनिंग की 487 एफआईआर का एक्सपर्ट की मदद से अध्ययन कराया। खुलासा चौंकाने वाला है।

1) 6 गलतियां दोहरा रही पुलिस इसलिए नहीं टिकती एफआईआर

पुलिस बार-बार 6 वही गलतियां दोहरा रही है, जिनकी वजह से एफआईआर कोर्ट में नहीं टिक पाती। जानकार मानते हैं कि इसकी खास वजह हो सकती है। सीएम विंडो, सीएमओ ट्विटर हैंडल, खुले दरबार, कष्ट निवारण समिति, खनन विभाग और सरकार की गठित निगरानी कमेटियों के समक्ष पिछले 4 साल में अवैध खनन से जुड़ी 2,500 शिकायतें आईं हैं। ऐसे में दिखावे के लिए कार्रवाई करना जरूरी होता है। 

अवैध खनन का केस दर्ज किया जाता है ताकि सरकार खुश हो जाए और शिकायतकर्ता संतुष्ट। फिर एफआईआर में ऐसी कमियां छोड़ दी जाती हैं कि कोर्ट से आरोपी बरी यानी अवैध खनन से जुड़े लोग भी खुश। यमुनानगर में खनन की कुल 32 साइट मंजूर हैं जिन्हें सरकार ने करीब ढाई अरब रुपए में नीलाम किया है। 1709 हेक्टेयर एरिया खनन के चिह्नित है। ज्यादातर का ठेका किसी न किसी राजनीतिक दल के नेता या उनके संरक्षण प्राप्त लोगों के पास है।  

  • पुलिस ने दर्ज केस में खनन अधिकारी से जांच ही नहीं कराई कि अवैध खनन हुआ या नहीं
  • ज्यादातर मामलों में ट्रैक्टर-ट्रक चालक को आरोपी बनाया। मौके पर अवैध खनन करने वाला कोई और था। 
  • अवैध खनन स्थल पर जाकर फोटो या वीडियोग्राफी नहीं कराई, जो कोर्ट में दिखा सके। 
  • केसों में स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया। जो यह कह सके कि उसके सामने अवैध खनन हुआ। 
  • जांच अधिकारी ने उस जमीन का रेवन्यू रिकॉर्ड तक नहीं जुटाया, जहां पर खनन किया गया। 
  • माइंस एंड मिनरल एक्ट का उल्लघन किया। खनन अधिकारी से बिना शिकायत लिए एफआईआर दर्ज की। 
  • 8 साल में 487 एफआईआर दर्ज हुई। 271 आरोपी बरी हुए। 22 एफआईआर कैंसिल हुई। 33 केस ट्रेस नहीं हुए। 06 केस में ही आरोपी साबित हुए।   

12 जनवरी 2013 को बिलासपुर रोड पर पुलिस और खनन विभाग की टीम ने रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पकड़ी। चालक फरार हो गया। बाद में चालक सुखबीर को पकड़ लिया। साढ़े तीन साल कोर्ट केस चला। पुलिस साबित नहीं कर पाई कि रेत अवैध खनन करके लाया गया। पुलिस ने न तो स्वतंत्र गवाह जुटाया और न यह पता लगाया कि खनन हुआ कहां था। आरोपी 16 सितंबर 2016 को बरी हो गया।  

खनन इंस्पेक्टर ओमदत्त शर्मा की शिकायत पर छछरौली थाने में 29 मार्च 2017 को माइनिंग एक्ट में केस दर्ज हुआ। शिकायत थी कि दादूपुर रोड पर अवैध खनन सामग्री से भरा ट्रैक्टर पकड़ा, जिसका चालक रोशनलाल था। 5 अक्टूबर 2018 को आरोपी बरी हो गया। इस केस में भी वही गलतियां दोहराईं। जो ट्रैक्टर पकड़ा था, वो 2015 में भी दो बार जगाधरी पुलिस सीज कर चुकी थी।  

ताजेवाला निवासी विशाल बंसल पर खनन अधिकारी ने 29 अगस्त 2018 को माइनिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि ताजेवाला में निरीक्षण के दौरान बंसल के खेतों में अवैध खनन मिला। बंसल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिसके जवाब में बिलासपुर डीएसपी आशीष चौधरी हाईकोर्ट ने रिपोर्ट दी।

एफिडेविट में बताया कि जिला पुलिस ने 25 मार्च 2011 से 31 मार्च 2019 तक अवैध खनन के 487 केस दर्ज किए। 6 केस में ही आरोप साबित हो पाए। इस आंकड़े पर सख्त हाईकोर्ट ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को नोटिस जारी किया। 11 अप्रैल को आदेश दिए कि गलत जांच करने वाले जांच अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया जाए। 3 माह में हाईकोर्ट में रिपोर्ट देनी है।