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राऊ माजरा के दिलीप मर्डर केस : कोर्ट में गिरी पुलिस की कहानी, आरोपी पत्नी व चचेरा भाई बरी

एक वर्ष पहले
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राऊमाजरा के दिलीप कुमार की हत्या के मामले में आरोपी प|ी व चचेरे भाई को सेशन कोर्ट ने वीरवार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। दोनों आरोपी जेल में ही बंद थे। राऊमाजरा में 21 अगस्त 2017 को हुई इस हत्या के बाद मृतक के पिता जगदीश चंद्र की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। तीन बच्चाें का पिता 38 वर्षीय दलीप कुमार काला अम्ब की रुचिरा पेपर मिल में काम करता था। 21 अगस्त को काम पर निकला था और अगले दिन उसका शव व बाइक खेतों में पड़े मिले थे। सिर में चोटें थीं और गले मे कपड़ा बंधा था। जिसके आधार पर हत्या का केस दर्ज हुआ था। पुलिस पहले ब्लाइंड मर्डर मानती रही। बाद में प|ी व चचेरे भाई के अंतरंग संबंधों की कहानी सामने लाई। प|ी व दिलीप के चचेरे भाई को गिरफ्तार कर लिया गया था। कोर्ट में पिता, चाचा, पड़ोसी समेत करीब 18 गवाहियां हुई। आरोपियों के वकील गुरप्रीत सिंह अंटाल ने कहा कि पुलिस कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई।

3. फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम नहीं बुलाई थी: पुलिस ने मौके पर सबूत जुटाने के लिए फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम ही नहीं बुलाई थी। कोर्ट में बचाव पक्ष ने दलीलों में यह मामला उठाया जो पुलिस की कमजोरी साबित हुआ।

(यह जानकारी बचाव पक्ष के वकील गुरप्रीत सिंह अंटाल के मुताबिक।)

कोर्ट में यूं गिरे पुलिस के सारे सबूत

4. चाचा रामकुमार ने ही बयान बदल लिया: मृतक के चाचा रामकुमार ने पहले पुलिस को बताया था कि उसने वारदात के आधा घंटा पहले आरोपी व दिलीप को बाइक पर जाते देखा था लेकिन कोर्ट में वह बयान से मुकर गया।

2. कॉल रिकॉर्डिंग: जिसकी आईडी पर सिम था, उसे गवाह नहीं बनाया:पुलिस ने कोर्ट में बताया था कि दिलीप के चचेरे भाई व दिलीप की प|ी के बीच कॉल रिकार्डिंग सामने आई थी। जिसमें दोनों में लंबी बात होती थी। लेकिन प|ी का सिम दिलीप के नाम था जबकि चचेरे भाई का सिम उसके दोस्त के नाम पर था। पुलिस ने आरोपी के उस दोस्त को गवाह ही नहीं बनाया।

1. आरोपी के कपड़ों पर मिले बालों व खून के धब्बों का डीएनए नहीं कराया: आरोपी कपड़ों पर खून के निशान व मृतक के बाल मिले थे। पुलिस ने बालों को जांच के लिए एफएसएल में भेज दिया। माइक्रोबायलॉजिकल टेस्ट में यह साबित हुआ कि बाल दिलीप के थे। लेकिन पुलिस ने बालों का डीएनए ही नहीं कराया। इसी तरह कपड़ों पर मिले खून के धब्बों का डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया।
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