हरियाणा / कैथल के राइस मिलर ने 8 करोड़ का धान घोटाला किया, 4 पर केस हुआ दर्ज

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास।
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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास।खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास।

  • जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से गारंटर के दस्तावेज हुए गायब
  • विभाग के कर्मचारियों पर अभी तक नहीं दर्ज हुआ मामला

दैनिक भास्कर

Feb 06, 2020, 01:36 PM IST
कैथल. कैथल के एक राइस मिल मालिकों द्वारा 8 करोड़ रु. का धान घोटाला करने का मामला सामने आया है। इसमें कुछ अफसरों की मिलीभगत बताई जा रही है, क्योंकि जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय में से गारंटर के दस्तावेज गायब मिले हैं। इस पर विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) पीके दास ने कैथल के एसपी को आरोपी राइस मिलर, गारंटर व विभाग के कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

दस्तावेज कैसे हुए गायब, हो रही जांच

दस्तावेज कैसे गायब हुए, इसकी जांच करने को कहा है। राइस मिलर कई दिनों से भूमिगत बताए जा रहे हैं। शहर थाना प्रभारी प्रदीप सिंह ने बताया कि आरजी इंटरप्राइजेज राइस मिलर के मालिकों गिरीश मिगलानी व रजनीश मिगलानी, गारंटर निकुंज गर्ग, प्रकाशरानी के खिलाफ सरकारी संपत्ति का गबन करने, धोखाधड़ी करने का केस दर्ज किया है। हालांकि, विभाग के कर्मचारी के खिलाफ अभी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक वरिंद्र कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि धान के सीजन 2019-20 में फूड सप्लाई एजेंसी ने मंडी में धान की सरकारी रेट पर खरीद की थी। करीब 7 हजार मीट्रिक टन धान को कस्टम मिलिंग के लिए कैथल के खनौरी रोड स्थित आरजी इंटरप्राइजेज राइस मिल को दिया था। पिछले दिनों विभाग द्वारा 2 बार कराई गई फिजिकल वेरिफिकेशन (पीवी) में मिल से करीब 4 हजार मीट्रिक टन धान कम पाई गई।

धान व बारदाना समेत इसकी कीमत करीब 8 करोड़ आंकी गई है। विभाग द्वारा राइस मिल मालिकों को शॉर्ट स्टॉक को पूरा करने के लिए कहा गया। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया था उन्होंने आरोपी राइस मिल के गारंटर के दस्तावेज मांगे, लेकिन दस्तावेज विभाग के कार्यालय से गायब मिले।

प्रदेश के 1207 चावल मिलों में हुए 90 करोड़ रु. के धान घोटाले को लेकर अब मिल मालिकों के बजाए गारंटरों से रिकवरी की जाएगी। विभाग ने मिल मालिकों को नोटिस जारी कर पूछा था कि जो धान कम मिला, उसका क्या कारण है। 757 मिल मालिकों ने जवाब दिया था।

जवाब न देने वाले 450 मिल मालिकों से 5 फरवरी तक मूल राशि, ब्याज व एक फीसदी अतिरिक्त वसूलने के आदेश दिए थे। जिन्होंने राशि नहीं दी है, अब उनके घोटाले की वसूली गारंटरों से की जाएगी। 6 फरवरी से यह कार्रवाई शुरू होगी। एसीएस पीके दास ने दूसरे मिल मालिकों व गारंटरों के दस्जावेज जांचने के लिए विभाग के अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। वही, सभी जिला फूड सप्लाई नियंत्रकों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ राइस मिलरों के गांरटरों के दस्तावेजों की जांच कराएं। अगले साल से सभी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड होंगे।

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