ठाठ / राम रहीम के अंदाज में चला हनीप्रीत का काफिला, 20 किमी में 3 से 30 हुई गाड़ियां, देर रात डेरा सच्चा सौदा पहुंची



11 नवंबर 2019 : सेंट्रल जेल से निकलते समय गाड़ी में निकली हनीप्रीत के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। भास्कर 11 नवंबर 2019 : सेंट्रल जेल से निकलते समय गाड़ी में निकली हनीप्रीत के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। भास्कर
अक्टूबर 2017 में अम्बाला जेल में इस तरह लाई गई थी हनीप्रीत। अक्टूबर 2017 में अम्बाला जेल में इस तरह लाई गई थी हनीप्रीत।
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11 नवंबर 2019 : सेंट्रल जेल से निकलते समय गाड़ी में निकली हनीप्रीत के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। भास्कर11 नवंबर 2019 : सेंट्रल जेल से निकलते समय गाड़ी में निकली हनीप्रीत के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। भास्कर
अक्टूबर 2017 में अम्बाला जेल में इस तरह लाई गई थी हनीप्रीत।अक्टूबर 2017 में अम्बाला जेल में इस तरह लाई गई थी हनीप्रीत।

  • अम्बाला सेंट्रल जेल में 24 महीने 24 दिन रहने के बाद जमानत पर छूटी हनीप्रीत उर्फ प्रियंका
  • 2017 में पंचकुला में हुई हिंसा के मामले में काट रही है सजा, डेरा मुखी की मानी जाती है करीबी

Dainik Bhaskar

Nov 07, 2019, 06:19 AM IST

अम्बाला. सेंट्रल जेल में बंद हनीप्रीत को बुधवार शाम जमानत मिल गई। जेल से रिहा होते वक्त हनीप्रीत का काफिला ठीक वैसे ही चला जैसे डेरा मुखी राम रहीम का चला करता था। काफिले में 20 किलोमीटर के अंतराल में ही 30 गाड़ियां शामिल हो गई। डेरा मुखी की करीबी हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा पहुंची। 2017 में पंचकुला में हुई हिंसा के मामले में हनीप्रीत अम्बाला की सेंट्रल जेल में बंद थी।

 

बुधवार शाम करीब 4.30 बजे अम्बाला की सेंट्रल जेल में हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा की पंचकूला कोर्ट से हुई जमानत के आदेश पहुंच गए थे। करीब आधे घंटे बाद हनीप्रीत की मां व भाई-भाभी पहुंच गए। रिकॉर्ड में उसे भाई साहिल तनेजा के सुपुर्द किया गया। 5.40 बजे सेंट्रल जेल के छोटे गेट से जब हनीप्रीत बाहर निकली तो पीला सूट पहना हुआ था। चेहरे पर पुरानी चमक और होठों पर मुस्कान थी।

 

परिजनों के गले मिलने के एक मिनट में ही फॉर्च्यूनर (पीबी-10-ईडी-0041) में बैठ गई। सभी परिजन इसी गाड़ी में बैठे। यह गाड़ी लुधियाना में राजदीप सिंह के नाम पंजीकृत है। जेल सूत्रों के मुताबिक जब से हनीप्रीत के ऊपर से देशद्रोह की धारा हटी थी, तभी से वह खुश चल रही थी। दो दिन से वह सभी के साथ मुस्कुरा कर बात कर रही थी।

 

24 महीने जेल में रहने वाली हनीप्रीत के चेहरे में ज्यादा बदलाव नहीं आया। वह वैसे ही लग रही थी जैसी जेल जाने से पहले थी। वह मेडिकली भी फिट थी। जेल से पुलिस की एक गाड़ी आगे और एक पीछे चली। अम्बाला कैंट फ्लाईओवर निकलते ही और गाड़ियां हनीप्रीत के काफिले में शामिल होती गईं। 20 किलोमीटर दूर शाहाबाद तक काफिले में गाड़ियों की संख्या 30 तक पहुंच गई।

 

इनमें ज्यादातर इनोवा-फॉर्च्यूनर जैसी एसयूवी गाड़ियां थीं। एक होंडा सिटी भी काफिले में रही। सूत्रों के मुताबिक शाहाबाद के पास हनीप्रीत ने गाड़ी बदली। उल्लेखनीय है डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के काफिले की फॉर्मेशन भी लगभग ऐसी ही रहती थी। छत्रपति मर्डर केस में फैसले के दिन जब डेरा मुखी को पंचकूला कोर्ट ले जाया जा रहा था, तब भी रास्ते में उनका काफिला ऐसे ही बढ़ता गया था। यही नहीं रास्ते में डेरा मुखी ने गाड़ी भी बदली थी। जेल प्रशासन, पुलिस या परिजनों ने यह खुलासा नहीं किया कि हनीप्रीत कहां गई है।

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