कोर्ट / कत्ल के नाबालिग दोषी को कोर्ट ने सुनाई 14 साल की कैद, कहा- बन सकता है अच्छा इंसान



Kaithal court decided 14 years imprisonment for a juvenile in murder case
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Kaithal court decided 14 years imprisonment for a juvenile in murder case

  • 21 अक्टूबर 2018 को कैथल के डेरा बाबा राजपुरी मेले में दोस्तों के साथ जा रहे मंदीप के सिर में पाइप और चाकू मारकर की थी हत्या
  • चार्जशीट फाइल होने के 45 दिन में ही सुना दिया कोर्ट ने फैसला, एक नाबालिग को कैद, 4 अन्य बालिग आरोपी बरी

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 12:12 PM IST

कैथल. कैथल में कोर्ट ने हत्या के एक मामले में नाबालिग दोषी को 14 साल की कैद की सजा सुनाई है। 4 अन्य बालिग आरोपी बरी कर दिए गए। कोर्ट ने यह फैसला चार्ज लगने के 45 दिन में सुनाया है। फैसले में कोर्ट ने कहा-दोषी करीब 17 साल का है। उसके पास जीने के लिए लंबी जिंदगी है और वह अच्छा इंसान बन सकता है, इसलिए उसे सुरक्षा दायरे में रखा जाएगा।


21 अक्टूबर 2018 को दोस्तों के साथ डेरा बाबा राजपुरी मेले में जा रहे मंदीप के सिर में पाइप और चाकू मारकर हत्या कर दी थी। मंदीप के हमनाम दोस्त (मंदीप पुत्र सुरेश कुमार) की शिकायत पर एक नाबालिग के अलावा पवन, रमन, संदीप व विकास पर हत्या का केस दर्ज हुआ था। उस वक्त नाबालिग की उम्र 16 साल से ज्यादा थी। दो अलग-अलग ट्रायल चले। बालिग आरोपियों पर इसी साल 18 जनवरी और नाबालिग के ट्रायल में 29 जनवरी को चार्ज लगा था। पवन, रमन, संदीप व विकास के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले।

 

पीड़ित पक्ष के वकील अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि कोर्ट ने दोषी को 14 साल की सजा सुनाई है। नाबालिग की सोशल बैकग्राउंड पता कराने के लिए बाल कल्याण अधिकारी/सोशल वर्कर की रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसमें आरोपी को शरारती तत्वों में लिप्त बताया गया। इसके अलावा उसकी अपराध करने की मंशा पूर्व नियोजित थी। यह रिपोर्ट भी सजा का आधार बनी। नाबालिग की मां गांव में सफाई कर्मी थी। मंदीप ने घर के सामने सफाई करने को कहा था। इसकाे झगड़ा हुआ था। इसी रंजिश में नाबालिग ने बाबा लदाना में मेले के दिन वारदात को अंजाम दिया।

 

चार्ज लगने के 45 दिन में ही अब एडिशनल सेशन जज हुकम सिंह की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा-दोषी करीब 17 साल का है। उसके पास जीने के लिए लंबी जिंदगी है और वह अच्छा इंसान बन सकता है, इसलिए उसे सुरक्षा दायरे में रखा जाएगा और समय-समय पर व्यवहार सुधार की काउंसिलिंग की जाएगी। 21 वर्ष का होने के बाद उसे जेल में शिफ्ट करना होगा। दोषी अपने परिवार पर निर्भर है, इसलिए उसे आर्थिक दंड नहीं दिया गया।

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