कंट्रोवर्सी / कांग्रेस का आरोप- हाईकोर्ट ने माना फॉर्मेसी काउंसिल में मंत्री विज का भ्रष्टाचार, रजिस्ट्रार बोले- सरासर झूठ



पत्रकारों से बात करती चित्रा सरवारा पत्रकारों से बात करती चित्रा सरवारा
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पत्रकारों से बात करती चित्रा सरवारापत्रकारों से बात करती चित्रा सरवारा

  • हाईकोर्ट ने काउंसिल रजिस्ट्रार की एक्सटेंशन खारिज की, सरकार पर वार में कांग्रेस की जल्दबाजी
  • चित्रा सरवारा बोलीं-फर्जी डिग्री के सहारे हासिल की नौकरी

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2019, 05:54 AM IST

अम्बाला. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार अरुण पराशर समेत अन्य कर्मियों को एक्सटेंशन अप्रूवल देने के अप्रैल 2018 के स्वास्थ्य विभाग के आदेश को खारिज कर दिया। फार्मेसी के निलंबित चेयरमैन केसी गोयल की याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने इस प्रक्रिया को फार्मेसी एक्ट के सेक्शन-26 के तहत सही नहीं माना। इस फैसले को आधार बनाकर कांग्रेस तुरंत मंत्री विज पर हमलावर हो गई। 

 

महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा ने रविवार को प्रेसवार्ता में दावा किया कि हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार पराशर की डिग्री को फर्जी मानते हुए कहा कि ये फर्जी नियुक्ति मंत्री के दबाव में हुई। इसके तुरंत बाद अरुण पराशर ने कहा कि कोर्ट के फैसले में न तो डिग्री को फर्जी बताया है और न ही मंत्री का कहीं जिक्र है।

 

कांग्रेस नेत्री ने हाईकोर्ट के आदेश को पढ़े बगैर अधूरे तथ्य सार्वजनिक किए, उनके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। चित्रा सरवारा ने आरोप लगाए गए अरुण पराशर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के चहेते हैं और फर्जी डिग्री के दम पर उसने रजिस्ट्रार का पद हासिल किया। फर्जी डिग्री के दम पर वह 2015 से इस कुर्सी पर काबिज है। चित्रा ने कहा कि अरुण के पिता स्व. राम गोपाल पराशर अनिल विज की विकास परिषद (भाजपा में वापस आने से पहले विज विकास परिषद के बैनर तले चुनाव लड़ते थे) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। अरुण का भाई अजय पराशर भाजपा के महेशनगर मंडल में महामंत्री है। 2004 में विकास परिषद के चुनाव चिन्ह शंख पर पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। चित्रा ने इस मामले में मंत्री अनिल विज के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सरकार मामले की सीबीआई जांच कराए।
 

 

चित्रा जो आरोप लगाकर घिरीं

 

1. चित्रा: अरुण पराशर के फार्मेसी काउंसिल का रजिस्ट्रार बनाने पर जब काउंसिल के चेयरमैन केसी गोयल ने उनकी डिग्रियां फर्जी होने पर आपत्ति जताई तो मंत्री अनिल विज ने गोयल को अपने कार्यालय में बुलाकर डराया धमकाया। फिर गोयल के खिलाफ ही जांच बैठा दी।

पराशर का तर्क: मेरी नियुक्ति 26 नवंबर 2015 को हुई। जबकि गोयल के खिलाफ विजिलेंस जांच तो मई 2015 से ही चल रही थी। गोयल चाहते थे कि मैं मंत्री से मिलकर उनके खिलाफ चल रही जांच को बंद करवाने का आग्रह करूं। 

 

2. चित्रा: पराशर की सभी डिग्रियां फर्जी हैं। हाईकोर्ट में भी जांच के बाद यह स्पष्ट कर दिया के ये फर्जी नियुक्ति मंत्री के दबाव में हुई और गलत है।

पराशर: कोर्ट के आदेश में कहीं भी मेरी डिग्री को फर्जी नहीं बताया है। आदेश में कहीं भी मंत्री के दबाव का जिक्र नहीं। कोर्ट ने सिर्फ सेक्शन-26 की अप्रूवल को खारिज किया है।

 

3. चित्रा: फर्जी डिग्री पर रजिस्ट्रार बने पराशर ने जाने कितने लोगों को फर्जी लाइसेंस बांट दिए।
पराशर: ड्रग लाइसेंस पर रजिस्ट्रार के साथ चेयरमैन के काउंटर साइन होते हैं।

 

4. चित्रा: रजिस्ट्रार की सभी डिग्री फर्जी हैं।
पराशर: गोयल ने कोर्ट में गलत डॉक्यूमेंट दिए। उसमें बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन (कड़कड़डूमा) दिल्ली का जिक्र किया है जबकि मैं द सेंट्रल बोर्ड ऑफ हायर एजुकेशन (उत्तमनगर) से पढ़ा हूं।
 

यह है पूरा मामला 

हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन केसी गोयल के खिलाफ 15 दिसंबर 2017 को विजिलेंस ने गबन की एफआईआर दर्ज कराई। 22 दिसंबर 2017 को सरकार ने सस्पेंड कर दिया। अप्रैल 2018 में केसी गोयल ने काउंसिल के रजिस्ट्रार अरुण पराशर की नियुक्त को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाए गए थे कि रजिस्ट्रार की अस्थाई नियुक्ति थी मगर सेक्शन 26 ऑफ फार्मेसी एक्ट की अवहेलना करते हुए सरकार ने उसका कार्यकाल मार्च 2020 तक बढ़ा दिया। 

 

सेक्शन 26 के तहत इस तरह होती है सचिव की नियुक्ति 
नियम अनुसार हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल में सेक्शन 26 के तहत रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए काउंसिल को पहले सरकार की मंजूरी लेनी होती है। फिर नियुक्ति के लिए तीन अखबारों जिनमें हिंदी, अंग्रेजी व पंजाबी में विज्ञापन प्रकाशित करवाना पड़ता है।

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