कुरुक्षेत्र / 5156 वर्ष पहले श्रीकृष्ण ने जो दिव्य संदेश कुरुक्षेत्र से दिया, वह दुनिया के 600 करोड़ लोगों तक पहुंचे: सीएम

सूर्य देवता को जल अर्पित करते सीएम मनोहर व अतिथिगण। सूर्य देवता को जल अर्पित करते सीएम मनोहर व अतिथिगण।
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सूर्य देवता को जल अर्पित करते सीएम मनोहर व अतिथिगण।सूर्य देवता को जल अर्पित करते सीएम मनोहर व अतिथिगण।

  •  अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी शुरू, मंथन करने ऑस्ट्रेलिया, मॉरिशस, कैनेडा, इंग्लैंड, जापान, नेपाल समेत 9 देशों से पहुंचे विद्वान 

दैनिक भास्कर

Dec 04, 2019, 03:02 AM IST

कुरुक्षेत्र.  मार्गशीर्ष माह की एकादशी से पहले बुधवार को इंटरनेशनल गीता जयंती मुख्य महोत्सव का आगाज हुआ। सीएम व उत्तराखंड के सीएम, राज्यपाल ने गीता पूजन व यज्ञ के साथ विधिवत शुभारंभ किया। 5156 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने जिस दिव्य संदेश को कुरुक्षेत्र की भूमि से दिया था, वह दिव्य संदेश दुनिया के 600 करोड़ लोगों तक पहुंचे, इस बात को ध्यान में रखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है।


केयू के ऑडिटोरियम हॉल में मंगलवार को गीता पर 3 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, कनाडा, इंग्लैंड, मॉरीशस, जापान और नेपाल से विद्वान हिस्सा ले रहे हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से तैयार की 48 कोस एक सांस्कृतिक यात्रा कॉफी टेबल बुक, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के सोविनियर व पिछले वर्ष की संगोष्ठी के शोध पत्रों पर संकलित पुस्तक का विमोचन किया गया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बोले- जीडीपी बढ़ने से नहीं आती खुशियां

महोत्सव के पार्टनर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उनका श्रीमद भगवद् गीता से सीधा जुड़ाव है। पांडवों से जुड़ी कथाओं का मंचन वहां के नृत्य व तीज-त्योहारों में होता है। उन्होंने कहा कि जीडीपी बढ़ने से खुशियां नहीं आती। दुनिया के तमाम विकसित देश वैभवशाली होने के बाद भी जीवन में खुशी के लिए ऐसे अद्भुत ग्रंथों को अपने जीवन में धारण कर रहे हैं। दुनिया में शांति व खुशी का रास्ता श्रीमद् भगवद् गीता है। 


वहीं, हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि गीता एक धार्मिक ग्रंथ होने के साथ-साथ जीवन दर्शन है जिसे अपनाकर कोई भी राष्ट्र अपना विकास कर सकता है। विश्व का प्रत्येक व्यक्ति इसे आत्मसात करे, अपने जीवन में अपनाएं। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि 9 देशों के प्रतिनिधि संगोष्ठी को सही मायनों में अंतरराष्ट्रीय बना रहे हैं। भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस हमेशा अपने साथ गीता को रखते थे। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियाें को संस्कारित बनाने के लिए श्रीमद् भगवद् गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता है। 


शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि गीता ग्रंथ का जितना अध्ययन करें, यह उतना ही प्रेरित करता है। पर्यावरण प्रदूषण भी अधर्म का रास्ता है। नेपाल के डिप्टी हाई कमिश्नर भरत कुमार ने कहा कि जल्द ही नेपाल में भी गीता जयंती महोत्सव मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिम्बाब्वे ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा संबंधी जरूरतों को खत्म कर दिया है। 

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