यमुनानगर / कोर्ट के आदेश के बाद 68 साल बाद रोड पर मिला कब्जा, जेसीबी से उखाड़ने लगे तो मनाने पहुंचे अधिकारी

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 03:42 PM IST



जेसीबी से सड़क की खुदाई करवाते हुए किसान। जेसीबी से सड़क की खुदाई करवाते हुए किसान।
प्रशासन ने दो दिन की मौहलत मांगकर रुकवा दिया काम। प्रशासन ने दो दिन की मौहलत मांगकर रुकवा दिया काम।
सरदार कश्मीरी सिंह ढिल्लों से बातचीत करते हुए पीडब्लूडी अधिकारी।. सरदार कश्मीरी सिंह ढिल्लों से बातचीत करते हुए पीडब्लूडी अधिकारी।.
किसान ने कानूनी लड़ाई के बाद लिया है जमीन पर कब्जा। किसान ने कानूनी लड़ाई के बाद लिया है जमीन पर कब्जा।
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जेसीबी से सड़क की खुदाई करवाते हुए किसान।जेसीबी से सड़क की खुदाई करवाते हुए किसान।
प्रशासन ने दो दिन की मौहलत मांगकर रुकवा दिया काम।प्रशासन ने दो दिन की मौहलत मांगकर रुकवा दिया काम।
सरदार कश्मीरी सिंह ढिल्लों से बातचीत करते हुए पीडब्लूडी अधिकारी।.सरदार कश्मीरी सिंह ढिल्लों से बातचीत करते हुए पीडब्लूडी अधिकारी।.
किसान ने कानूनी लड़ाई के बाद लिया है जमीन पर कब्जा।किसान ने कानूनी लड़ाई के बाद लिया है जमीन पर कब्जा।
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  • यमुनानगर के अम्बाला-जगाधरी रोड का मामला, डीसी से बातचीत के बाद जमीन मालिक ने दी दो दिन की मोहलत
     

यमुनानगर। बिना जमीन अधिग्रहण के 1951 में बने अम्बाला-जगाधरी रोड पर 68 साल बाद कोर्ट के आदेश पर किसान अपना कब्जा लेने पहुंच गया। शनिवार को किसान कश्मीरी सिंह ढिल्लों ने रोड के दोनों तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉली लगा दिए और जेसीबी से खुदाई शुरू कर दी। इसके बाद पीडब्लूडी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने किसान की बात जिला उपायुक्त गिरिश अरोड़ा से करवाई। डीसी ने किसान को दो दिन का समय देने की मांग की, जिसके बाद किसान कश्मीरी सिंह ने खुदाई बंद करवा दी। 
 

कब्जाई जमीन छुड़ाने के लिए दो पीढ़ियां लड़ीं, अब कोर्ट में जीते
कश्मीरी सिंह ढिल्लों बताते हैं कि हमारे परिवार के पास काफी जमीन है। पहले जमीन पर जंगल था। जमीन के बीच से कच्चा रास्ता था। साल 1951 में कच्चे रास्ते पर रोड बना दिया गया। तब यह रोड पीडब्ल्यूडी के अंडर था। ट्रैफिक ज्यादा हुआ तो नेशनल हाईवे घोषित कर दिया। 
 

संयुक्त पंजाब के समय में पिता व चाचा सरकार व विभाग को पत्र लिखते रहे कि यह सड़क हमारी जमीन पर बनी है। 50 साल में जाने कितनी चिट्ठियां लिखी। पर किसी ने बात नहीं सुनी। आखिरकार चाचा बलबीर साल 2000 में कोर्ट चले गए। 2016 में सेशन कोर्ट ने हमारे हक में फैसला सुनाया। 
 

फैसले के खिलाफ सरकार ने रिव्यू पिटिशन डाली, लेकिन कोर्ट ने फैसला नहीं बदला। अफसरों ने जमीन के बदले दूसरी जमीन देने का अॉफर भी दिया। हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। फैसला लागू कराने के लिए न्यायाधीश सुनील कुमार के कोर्ट में 2 साल सुनवाई चली। 
 

अक्टूबर में कोर्ट ने 16 नवंबर तक रोड पर कब्जा देने के आदेश दिए। सरकार ने अभी कब्जा नहीं दिया। अब हम कब्जा लेंगे। सरकार ने करीब 70 साल हमारी जमीन का इस्तेमाल किया है, उसके मुआवजे के लिए भी लड़ेंगे।

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