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हिसार / 3 माह जांच, 28 माह ट्रायल, 68 लोगों की गवाही के बाद बेटे समेत रामपाल दोषी करार



रामपाल ने दावा किया कि उसके आश्रम में छह लोगों की मौत पुलिस कार्रवाई में हुई थी। -फाइल रामपाल ने दावा किया कि उसके आश्रम में छह लोगों की मौत पुलिस कार्रवाई में हुई थी। -फाइल
सुनवाई से पहले शहर में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के जवान। सुनवाई से पहले शहर में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के जवान।
हिंसा की आशंका को देखते सेंट्रल जेल-2 में ही अदालत लगाई गई थी हिंसा की आशंका को देखते सेंट्रल जेल-2 में ही अदालत लगाई गई थी
पुलिस ने तीन किलोमीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था। पुलिस ने तीन किलोमीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था।
सेंट्रल जेल-2 के आसपास बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था। सेंट्रल जेल-2 के आसपास बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था।
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रामपाल ने दावा किया कि उसके आश्रम में छह लोगों की मौत पुलिस कार्रवाई में हुई थी। -फाइलरामपाल ने दावा किया कि उसके आश्रम में छह लोगों की मौत पुलिस कार्रवाई में हुई थी। -फाइल
सुनवाई से पहले शहर में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के जवान।सुनवाई से पहले शहर में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के जवान।
हिंसा की आशंका को देखते सेंट्रल जेल-2 में ही अदालत लगाई गई थीहिंसा की आशंका को देखते सेंट्रल जेल-2 में ही अदालत लगाई गई थी
पुलिस ने तीन किलोमीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था।पुलिस ने तीन किलोमीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था।
सेंट्रल जेल-2 के आसपास बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था।सेंट्रल जेल-2 के आसपास बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था।
  • स्पेशल कोर्ट ने दो मामलों में रामपाल समेत 23 लोगों को दोषी ठहराया, सजा का ऐलान 16 और 17 अक्टूबर को होगा
  • 2014 में पुलिस झड़प में छह लोगों की मौत हो गई थी, इसके बाद रामपाल पर हत्या के दो मामले दर्ज हुए थे

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 10:48 AM IST

हिसार। हिसार जिले बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण में 6 हत्याओं के 2 मामलों में कोर्ट ने आश्रम संचालक रामपाल व उसके बेटे वीरेंद्र सहित 29 आरोपियों को आईपीसी की धारा 302, 343 और 120 बी के तहत दोषी करार दिया है। कोर्ट 4 महिलाओं व बच्चे की हत्या के केस नंबर-429 में 16 अक्टूबर और एक महिला की हत्या के केस नंबर-430 में 17 अक्टूबर को सजा सुनाएगा। हिसार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया की अदालत ने इस मामले में करीब चार साल में यह फैसला सुनाया है।

 

 

हत्या के इन मामलों में 19 नवंबर 2014 को बरवाला थाने में केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने 3 माह 11 दिन तक तफ्तीश की। 26 फरवरी 2015 को कोर्ट में चालान पेश होने के बाद 30 सितंबर 2016 को सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए गए थे। करीब 28 माह तक कोर्ट में ट्रायल चला, जिसमें 68 गवाहियां हुईं। बीते सोमवार को दोनों मुकदमों में फाइनल बहस की गई।

 

 

कोर्ट के फैसले के मद्देनजर हिसार जिले में प्रशासन पहले से हाईअलर्ट पर है। इस दौरान शहर में एक जगह रामपाल के तीन समर्थक नजर आए, जिन्हें पुलिस ने काबू कर एसडीएम कोर्ट में पेश किया। हालांकि, चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। जिले में धारा 144 भी लगाई गई थी।

 

 

कोर्ट रूम लाइव गर्दन झुकाए हाथ जोड़कर खड़ा रहा रामपाल
10:05 बजे एडीएसजे डीआर चालिया पहुंचे। 10:10 बजे कार्यवाही शुरू हुई। 29 लोगों को दोषी करार दिया गया। रामपाल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी होनी थी, पर तकनीकी दिक्कत से फिजिकली पेश करने के वारंट जारी किए। 12:11 बजे पर्दे लगे पुलिस वाहन से रामपाल को सेंट्रल जेल-1 लाया गया। 12:15 बजे कोर्ट में पेश किया गया।

 

 

जज के सामने आते ही रामपाल हाथ जोड़कर खड़ा रहा। गर्दन झुका रखी थी। रामपाल का बेटा वीरेंद्र व अन्य दोषी साधारण रूप से खड़े रहे। 12:25 बजे के बीच उसे दोषी करार दे दिया गया। दोनों मामलों में रामपाल 10 मिनट तक कोर्ट रूम में खड़ा रहा। कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें कस्टडी में ले लिया। रामपाल के साथ कोर्ट रूम में आरोपी पक्ष के वकील महेंद्र सिंह नैन व उनके जूनियर 7 वकील थे।

 

 

जिन धाराओं में दोषी, उनमें उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान
302: हत्या में दोष साबित होने पर आजीवन कारावास, मृत्युदंड या अंतिम सांस तक जेल में कैद की सजा का प्रावधान।
343: किसी व्यक्ति काे 3 दिन या इससे ज्यादा दिन तक बंधक बनाकर या गलत तरीके से रोकता है तो 2 साल की सजा हो सकती है।
120बी: आपराधिक षड्यंत्र में दोषी साबित होने पर मुख्य अपराध के अनुसार ही सजा का प्रावधान है।

 

 

रामपाल समेत 6 लोग दोनों मामलों में दोषी ठहराए गए, यानी कुल 23 लोग हैं
रामपाल समेत 6 आरोपी दोनों केस में दोषी हैं। इनमें रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, जोगेंद्र और बबीता शामिल हैं। रामपाल, वीरेंद्र, जाेगेंद्र, राजेंद्र और राजकपूर उर्फ प्रीतम जेल में बंद थे, जबकि बबीता जमानत पर थीं। अब सभी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। संजय व राजबाला भी दोनों मामलों में आरोपी हैं, लेकिन फरार होने के कारण पीओ घोषित हैं। दोनों मामलों में कुल 23 लोग दोषी ठहराए गए हैं।
अनुयायियों को ढाल बना खड़ा कर लिया था, भीड़ में हुई थी 6 की मौत
नवंबर 2014 में हिसार के बरवाला में स्थित सतलोक आश्रम पर पुलिस ने छापामारी की थी।

 

 

पुलिस से बचने के लिए रामपाल ने अपने अनुयायियों को आश्रम के अंदर व बाहर ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हुए खड़ा कर लिया था। भीड़ के इसी जमावड़े में आश्रम के अंदर 5 महिलाओं व एक बच्चे की मौत हो गई थी। आरोप है कि रामपाल के आदेश पर उसके सहयोगियों व प्राइवेट कमांडो ने सतलोक आश्रम में बंधक बना रखा। उन्हें आश्रम से बाहर नहीं जाने दिया गया। इस वजह से दम घुटने से ये मौतें हुईं।
 

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