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बारिश और ओलावृष्टि से 3 फसलों को नुकसान, 74 हजार किसानों के खेतों का सर्वे करने के आदेश
दो साल बाद हरियाणा के धरतीपुत्रों पर आसमान से बड़ी आफत बरसी है। खरीफ 2018 में मुआवजे के लिए करीब दो लाख किसानों ने आवेदन किया था, इसके बाद अब रबी-2020 में करीब 74 हजार किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया है। हालांकि अभी आवेदनों के बाद सर्वे किया जाएगा।
कृषि विभाग ने दो सप्ताह में सर्वे पूरा करने के आदेश जारी किए हैं। कृषि विभाग की टीमें फील्ड में उतर गई हैं और सर्वे का कार्य भी शुरू हो चुका है। एक टीम में तीन सदस्य होते हैं। जो संबंधित किसान के खेत में जाकर सर्वे करते हैं। कृषि अधिकारियों का कहना है कि सर्वे पूरी बारीकी से होगा। अब तक जो आवेदन कृषि विभाग के पास पहुंचे हैं, उनमें भिवानी व महेंद्रगढ़ जिलों से 25 हजार से अधिक आवेदन शामिल हैं। यहां अधिक एरिया में सरसों उगाई जाती है।
किसानों को ~40 हजार प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि पिछले दिनों हुई बरसात व ओलावृष्टि से किसानों के जख्म भरे भी नहीं थे कि फिर से रबी की फसलों पर काले बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश में बरसात व ओलावृष्टि से सरसों व गेहूं की फसल खेतों में बिछौना बन चुकी है। सरकार 40 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दे।
बारिश-ओलावृष्टि ने फेरा मेहनत पर पानी
हिसार | प्रदेश में अंधड़ के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं, सरसों व चना की फसलों को तबाह कर दिया है। हिसार के गांव जमाल, ढूकड़ा, हंजीरा, कुतियाना व जिला के विभिन्न गांवों में 70 फीसदी तक नुक्सान होने का अनुमान है। किसानों ने कहा कि उनकी 6 माह की मेहनत पर पानी फेर दिया है। भिवानी के कस्बे तोशाम के 6 गांवों में ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ। हिसार के नारनौंद में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है।
दिन-रात का तापमान भी हुआ कम
दिन व रात का तापमान अब कम हो चुका है। जिस तरह से फरवरी के प्रथम सप्ताह में मौसम था, ठीक वैसा मौसम लौट आया है। रात का पारा 12 से 14 डिग्री के बीच है, जबकि दिन का तापमान अधिकांश जिलों मंे 20 से 22 डिग्री के बीच आ गया है। कहीं-कहीं बरसात व तेज हवा के कारण लोगों को ठिठुरन महसूस हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पश्चिम विक्षोभ के निकल जाने के बाद धीरे-धीरे पारा बढ़ने लगेगा और अप्रैल प्रथम सप्ताह तक गर्मी का असर देखने को मिल सकता है।
अब तक 700 फीसदी अधिक बरसात
हरियाणा में एक से 11 मार्च तक करीब 44 एमएम बरसात हो चुकी है। सामान्यत: इस अवधि में प्रदेश में करीब पांच एमएम बरसात होती है। केवल बरसात ही नहीं हुई, इस अवधि में तेज हवा भी चली है और कई इलाकों में ओले भी पड़े हैं। इससे किसानों की फसल बिछौना बनी है।
करीब 32 लाख हेक्टेयर में फसलें
प्रदेश में रबी की फसलें करीब 32 लाख हेक्टेयर में हैं। इनमें सबसे बड़ी फसल गेहूं की करीब 25 लाख हेक्टेयर में है, जबकि सरसों 6.5 लाख हेक्टेयर में है। बरसात से सबसे अधिक नुकसान दक्षिण व पश्चिम हरियाणा के किसानों को हुआ है। कृषि विभाग की टीमें सर्वे कर रही हैं और दो सप्ताह में सर्वे पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी।
10 जिले जहां से अधिक आवेदन
भिवानी12229
रेवाड़ी10518
महेंद्रगढ़13000
चरखी-दादरी6720
पलवल6000
हिसार5433
सोनीपत4500
फतेहबाद4500
कैथल2088
रोहतक1900
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