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दुनिया में 500 मिलियन लोग विशेष रूप से कामकाजी और प्रसव उम्र की महिलाएं ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित

Hisar News - जीजेयू में विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान शृंखला का आयोजन किया गया। इसका आयोजन बायो एंड नेनो टेक्नोलॉजी विभाग...

Feb 15, 2020, 07:51 AM IST
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जीजेयू में विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान शृंखला का आयोजन किया गया। इसका आयोजन बायो एंड नेनो टेक्नोलॉजी विभाग में हुआ। इसके लिए भारत और विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अपने शोध अनुभवों से अवगत कराया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के बायो टेक्नोलोजी विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद छोकर ने की। प्रो. के.सी. बंसल ने ‘एक्साइटमेंट इन बायोटेक्नोलॉजी : माई जर्नी फ्रोम हरियाणा टू हार्वर्ड’ विषय पर व्याख्यान दिया। पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ की बायोकेमिस्ट्री विभाग अध्यक्ष की प्रो. अर्चना भटनागर ने ‘ऑटोइम्यूनिटी डिसऑर्डर : देयर जेनेसिसएंड करेंट थेरेपीज’ विषय पर तथा सेंटर फॉर प्लांट बायो टेक्नोलॉजी, हिसार के पूर्व तकनीकी निदेशक प्रो. राम सी. यादव ने ‘ग्रीन रिवोलुशन टू जेने रिवोलुशन’ विषय पर तथा नेशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, मोहाली की बायोटेक्नोलॉजी डिवीजन के साइंटिस्ट-ई डा. सिद्धार्थ तिवारी ने ‘एप्लीकेशन ऑफ जीनोम एडिटिंग इन क्रोप प्लांटस इम्प्रूवमैंट’ विषय पर व्याख्यान दिया। ऐबरिस्टविद विश्वविद्यालय, पेंग्लियास, यूके के बायोलोजिकल, इनवायर्नमैंटल एंड रूरल साईंसिज विभाग के प्रो. रतन एस. यादव ने ‘बायोटेक्नोलॉजी फॉर एक्सलरेटिंग प्लांट ब्रीडिंग’ विषय पर व्याख्यान दिया। प्रो. अर्चना भटनागर ने ऑटोइम्यून बीमारियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे एक ऑटोइम्यून बीमारी के प्राथमिक लक्षण सामान्य हो सकते हैं, जैसे कि थकान, कम-ग्रेड बुखार और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई। ऑटोइम्यून बीमारियों को पहली बार में ठीक करना मुश्किल होता, डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं। दुनिया भर में लगभग 500 मिलियन लोग विशेष रूप से कामकाजी और प्रसव उम्र की महिलाएं ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित हैं। यदि संदेह है कि यह एक ऑटोइम्यून समस्या हो सकती है, तो किसी भी खाद्य एलर्जी की पहचान करना और उससे निपटना बहुत महत्वपूर्ण है।

फसल उत्पादन में वृद्धि और गुणवत्ता पर हुई विस्तार से चर्चा

प्रो. राम सी. यादव ने बायोटेक्नोलॉजी दृष्टिकोण के माध्यम से फसल उत्पादन में वृद्धि और अनाज की फसलों में गुणवत्ता में सुधार पर अत्यंत महत्वपूर्ण चर्चा की। फसली पौधों के आनुवंशिक सुधार खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए सबसे व्यवहार्य दृष्टिकोण होगा। डा. सिद्धार्थ तिवारी ने विद्यार्थियों को नई गुणवत्ता के गुणों को जोड़ने के माध्यम से फसल सुधार और मूल्य संवर्धन के लिए सीआरआईएसपीआर की नवीनतम तकनीक के बारे में बताया। सीआरआईएसपीआर फसल सुधार के लिए बायोटेक्नोलोजिस्ट को विकल्प मुहैया करवाती है। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए फसल सुधार में जीनोम एडिटिंग टूल्स का प्रयोग, पोषण मूल्य, रोग प्रतिरोध और अन्य लक्षण भविष्य के प्रमुख क्षेत्र होंगे।


जीजेयू के के बायो एंड नेनो टेक्नोलॉजी विभाग के सौजन्य से व्याख्यान शृंखला का आयोजन।

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