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जितने दावे थे उतनी भी तैयारी हो तो नहीं होती नकल, बच्चों पर नकल के केस, शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं
{बोर्ड और शिक्षा विभाग में तालमेल नहीं, ग्राउंड पर नहीं उतार पाए प्लानिंग
हरियाणा बढ़ती नकल से प्रदेश की तुलना बिहार से होने लगी है। इसके बावजूद इसको रोकने में न शिक्षा विभाग सफल हो रहा हैै। बोर्ड और शिक्षा विभाग में आपसी में ही कोई तालमेल नहीं है। परीक्षा शुरू होने से पहले जितने दावे किए थे अगर तालमेल इतने भी प्रबंध कर लेते तो नकल पर काफी हद तक नकेल लग सकती थी।
पिछले 7 पेपरों में अब तक कुल 1683 केस बच्चों पर नकल के दर्ज हो चुके हैं, लेकिन जो शिक्षक नकल करवाते हैं, विभाग उन्हें बचाने में जुटा है। हिसार के उकलाना ब्लॉक के गांव साहू में राजकीय उच्च विद्यालय में महिला डिप्टी सुपरिंटेंडेंट पर नकल करवाने के आरोप लगे, लेकिन विभाग आरोपी अधिकारी को बचाता नजर आया। महिला सुपरिंटेंडेंट को परीक्षा केंद्र पर पुलिस सुरक्षा भी प्रदान की गई। जबकि शिकायतकर्ता ने बताया कि अधिकारी परीक्षा शुरू होने के 10 मिनट बाद ही पेपर आउट कर देते हैं। वहीं अन्य सरकारी स्कूल के टीचर्स लाइब्रेरी में बैठकर पेपर सॉल्व कर बच्चों को नकल करवाते हैं।
नकल के कपड़े : बनियान पर छात्र ने चिपका रखी थी पर्चियां
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कंवरपाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री
Q. लोग हरियाणा की तुलना बिहार से कर रहे हैं?
A. बिहार से तुलना ठीक नहीं। नकल के केस आने से थोड़ी इमेज तो खराब होती है।
Q. सीबीएसई से लर्निंग क्यों नहीं ली?
A. सीबीएसई के स्कूलों की संख्या कम है। स्कूल भवन अपडेट हैं और अधिकांश शहरी क्षेत्र में हैं। सरकारी स्कूल गांव में हैं। दोनों में फर्क है।
Q. बोर्ड परीक्षा के दौरान पूरा सिस्टम ही फेल हो गया है?
A. हम सख्ती कर रहे हैं। आगे से और सख्ती दिखेगी। Q. सुधार को अब क्या करेंगे?
A. सुधार के लिए सभी से सुझाव मांगेंगे। उन पर सख्ती से अमल होगा। जैमर पर अभी विचार नहीं, लेकिन सोचेंगे।
नकल ने बोर्ड और विभाग पर उठाए बड़े सवाल
{तालमेल नहीं: बोर्ड और शिक्षा विभाग में तालमेल नहीं है। शिक्षक विभाग के अधीन आते हैं और विभाग उन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर रहा।
{फिर अगली बार का राग: हर बार कहा जाता है कि अगली बार से हम नकल नहीं होने देंगे। लेकिन हर वर्ष दावे फेल हो जाते हैं। इस बार भी शिक्षा मंत्री अगली बार सख्ती करने की कह रहे हैं।
{नकल से कब तक सुधरेगा परिणाम: कई सालों से दसवीं और बारहवीं का परिणाम सुधर रहा है। लेकिन खुलेआम चल रही नकल ने सुधार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि कब तक नकल से सरकार परिणाम को सुधारेगी।
नियमों में ही गड़बड़ी: बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले पेपर बाहर आने पर ही लीक मानता है। इसी का फायदा उठा पेपर को परीक्षा शुरू होने के बाद वायरल कर रहे हैं।
{सीबीएसई से सीखें : बोर्ड सीबीएसई से सीखकर प्लान बनाए तो नकल पर रोक लग सकती है, लेकिन ऐसा नहीं करता। दावा था कि बिना सीसीटीवी वाले स्कूलों में सेंटर नहीं होंगे, लेकिन यह केवल औपचारिकता रह गई ।
{बाहर वालों पर ककार्रवाई क्यों नहीं: बोर्ड अंदर नकल करते पाए जाने वालों पर तो केस करता है लेकिन बाहर से जो नकल फेंकते वालों और नकल कराने वाले शिक्षकों पर भी कार्रवाई नहीं होती।
डॉ जगबीर सिंह, बोर्ड चेयरमैन
Q. ऐसी परीक्षा का क्या मतलब जब सभी पेपर शुरू आउट हो रहे हैं?
A. लगातार उड़दस्ते केंद्रों पर छापे मार रहे हैं। जो सुपरवाइजर व अन्य अधिकारी नकल करवाते मिलते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शिक्षा विभाग को लिखा जाता है।
Q. सीबीएसई या अन्य परीक्षाओं से लर्निंग क्याें नहीं लेते?
A. सीबीएसई क्यों एचटेट की परीक्षा अपने आप में उदाहरण है, लेकिन यह एक या दो दिन की होती है, वार्षिक परीक्षा 30 दिन चलती है, फिर भी विचार करेंगे।
Q. लोग हरियाणा की तुलना बिहार से कर रहे हैं?
A. ऐसी बात नहीं है। काफी सुधार हुआ है। शिक्षक अपना काम इमानदारी से करें तो नकल पर लगाम लग सकती है।
नकल को लेकर बिहार से हो रही हरियाणा की तुलना, फिर भी सरकार सजग नहीं
जिस डिप्टी सुपरिंटेंडेंट पर था नकल करवाने का आरोप, उसी के बचाव में है विभाग
जिम्मेदारों से सीधी बात
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2. चरखीदादरी में पेपर वायरल करने वाले का हाथ व शीशे में चेहरा।
1. नूंह में परीक्षा केंद्र के बाहर नकल कराने पहुंचे युवक।
फतेहाबाद | शहर के ब्लू बर्ड स्कूल में छात्र द्वारा बनियान पर सेलोटेप से चिपकाई गई पर्चियां।