• Hindi News
  • Haryana
  • Hisar
  • Hisar News haryana news blood separator machine came in civil hospital two years ago it has not started yet

सिविल अस्पताल में दो साल पहले आई थी ब्लड सेपरेटर मशीन, अब तक नहीं हो पाई शुरू

Hisar News - मानव ब्लड में प्लाजमा, प्लेटलेट्स और पैक्ड रेड ब्लड सैल्स जैसे कंपोनेंट्स होते हैं। खून की एक यूनिट से तीन रोगियों...

Dec 11, 2019, 07:46 AM IST
Hisar News - haryana news blood separator machine came in civil hospital two years ago it has not started yet
मानव ब्लड में प्लाजमा, प्लेटलेट्स और पैक्ड रेड ब्लड सैल्स जैसे कंपोनेंट्स होते हैं। खून की एक यूनिट से तीन रोगियों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए कहा जाता है ब्लड इज मेडिसीन। सरकारी अस्पतालों में उक्त कंपोनेंट्स नहीं मिलने के कारण राेगियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विडंबना यह कि करीब 2 साल पहले सिविल अस्पताल में खून से उक्त कंपोनेंट्स अलग करने के लिए ब्लड सेपरेटर मशीन आई थी, जिसका आज तक इस्तेमाल नहीं हो सका। ब्लड बैंक में धूल फांक रही इस मशीन को प्रयोग में लाने के लिए स्वास्थ्य मुख्यालय से दो-तीन और उपकरण की जरूरत है। कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद उपकरणों की खरीद व मुहैया करवाने के लिए उच्चाधिकारियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्वास्थ्य मंत्री से लेकर स्थानीय विधायक तक को मामले से अवगत करवाया जा चुका है। फिर भी समस्या जस की तस है। ऐसे में रोगियों को डेंगू-मलेरिया सहित अन्य गंभीर बीमारियों में जरूरी प्लाजमा, प्लेटलेट्स और पैक्ड रेड ब्लड सेल्स निजी ब्लड बैंक से खरीदकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। इन कंपोनेंट्स की पूर्ति से मौत के मुंह में पहुंच चुके रोगी को नया जीवनदान मिल सकता है।

सिविल अस्पताल।

यह भी जानिए...

निजी ब्लड बैंक से कंपोनेंट्स पर कितना शुल्क देना पड़ रहा है

400 प्लाजमा

400 प्लेटलेट्स

1450हाॅल ब्लड या पैक्ड रेड ब्लड सैल्स

कितनी होगी बचत, क्या है स्थिति

सिविल अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने पर रोगियों को ब्लड कंपाेनेंट खरीदने के लिए निजी ब्लड बैंक पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकारी ब्लड बैंक में महज 300 रुपयों तक में प्लाजमा और प्लेटलेट्स जैसे ब्लड कंपोनेंट मुहैया होंगे। फिलहाल सरकारी ब्लड बैंक से अगर कोई मरीज डेंगू, मलेरिया या किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त होने पर प्लेटलेट्स, प्लाजमा और पैक्ड रेड ब्लड सैल्स की मांग करता है तो उसे मना कर दिया जाता है या फिर 1050 रुपये लेकर हाॅल ब्लड या खून की एक यूनिट थमा दी जाती है। कंपोनेंट्स के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ती है। अगर मरीज सरकारी अस्पताल में दाखिल है तो उसे नि:शुल्क ब्लड मुहैया होगा।

विधायक से लेकर मंत्री तक के संज्ञान में मामला फिर भी बाकी उपकरणों का इंतजार

जानिए... मशीन और किट के फायदे

रक्त में मौजूद अलग-अलग तत्वों का समावेश होता है। जिनमें प्लाजमा, प्लेटलेट्स, पैक्ड रेड ब्लड सैल्स शामिल हैं। बीमार या दुर्घटना की स्थिति में जरूरत के अनुसार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। सिविल अस्पताल में स्थापित होने वाली मशीन व किट इन सभी तत्वों को अलग-अलग कर सकेगी।

इस साल डेंगू रोगियों की संख्या 150 पार

जिले में इस साल डेंगू रोगियों की संख्या 150 पार हो चुकी है। मलेरिया ग्रस्त रोगी 47 हैं। इनमें से अधिकांश की बीमारी के कारण प्लेटलेट्स 20 हजार से कम हो गई थी, जिन्हें निजी ब्लड बैंक पर निर्भर रहना पड़ा है। अगर यह सुविधा सरकारी अस्पताल में उपलब्ध होती है तो रोगियों को जेब ढीली नहीं करनी पड़ती।


Hisar News - haryana news blood separator machine came in civil hospital two years ago it has not started yet
X
Hisar News - haryana news blood separator machine came in civil hospital two years ago it has not started yet
Hisar News - haryana news blood separator machine came in civil hospital two years ago it has not started yet
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना