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वेस्टर्नाइजेशन से प्रभावित न हों, हरियाणा को सिडनी और दिल्ली को लंदन बनाकर खुद को मॉडर्न दिखाने की होड़ से बचने की आवश्यकता

Hisar News - अगर खेत उपजाऊ है तो कबूतर भी दाना डाल जाए तो पौधा उग जाएगा वहीं अगर सड़क पर कोई किसान भी आकर दाना डाले तो भी किसी...

Feb 22, 2020, 07:51 AM IST
Hisar News - haryana news do not be affected by westernization haryana needs to avoid competing to show itself as modern by making sydney and delhi in london

अगर खेत उपजाऊ है तो कबूतर भी दाना डाल जाए तो पौधा उग जाएगा वहीं अगर सड़क पर कोई किसान भी आकर दाना डाले तो भी किसी पौधे का उगना संभव नहीं। यहां यह समझने की जरूरत है कि हमें माॅडर्न तो होना है मगर अपनी संस्कृति और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना है। मॉर्डन होने के लिए अपनी वैल्यूज को छोड़ना गलत है। मॉर्डनाइज होना गलत नहीं मगर वेस्टर्नाइज होना अपनी वैल्यूज को पीछे छोड़ने जैसा है। मॉर्डनाइजेशन का मतलब है समय के साथ चलें ना कि खुद को बदलें। दिल्ली को दिल्ली की तरह विकसित करें उसे लंदन बनाने की जरूरत नहीं है। हरियाणा को सिडनी बनाकर और पंजाब को टोरंटो बनाकर खुद को मॉडर्न दिखाने की होड़ से बचने की जरूरत है। कुछ ऐसे ही शब्दों से वेस्टर्नाइजेशन और मॉर्डनाइज के अंतर को समझाया पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने। वे मॉडल टाउन स्थित सनातन धर्म मंदिर में राम कथा वाचन करने पहुंचे थे।

अध्यात्म तक पहुंचने के लिए इन स्टेप्स को करें फॉलो


1. व्याख्या पर ध्यान दें, परिभाषा में न उलझें : अध्यात्म की परिभाषा में उलझकर इसे समझा नहीं जा सकता, क्योंकि डेफिनेशन हमेशा डेफिनेट होती है वहीं एक्सप्लेनेशन हमेशा व्यक्तिगत होती है जो एक्सपीरियंस से बनती है, क्योंकि यह अनुभव से बनती है। इसी तरह भगवान को देखने का नजरिया हर किसी का अलग है। तो अध्यात्म की अपनी व्याख्या पर ही चलें, नहीं तो उलझन में पड़ जाएंगे।

3. आचरण में भी लाएं बदलाव : आपने नजरिया बदल लिया मगर उसके अनुसार आचरण नहीं कर पा रहे तो गड़बड़ संभव है। अगर घर आए अतिथि में अपने नजरिया से परमात्मा का अंश ढूंढ लिया मगर उसके साथ आचरण अभी आम इंसान की तरह ही है तो अध्यात्म के रास्ते में रुकावट आ सकती है, इसलिए जरूरी है कि परमात्मा को नजरों से देखने के बाद उसे आचरण में लाना जरूरी है।

2. हर वस्तु में परमात्मा के अंश देखें : अध्यात्म को समझने के लिए हर वस्तु में केवल प्रकृति और जड़त्व से अलग परमात्मा के अंश को ढूंढ कर उसके दर्शन करने अनिवार्य है। यानि अगर आप प|ी में केवल प|ी देखते हैं तो आपकी दृष्टि सामान्य हैं, पर अगर प|ी में छुपे परमात्मा को देखते हैं और पेड़ में केवल हरे पत्ते नहीं परमात्मा का अंश भी देखते तो आप अध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं।

बच्चों की प्रतिभा को तौलने न बैठें

हम बच्चों की प्रतिभा को तौलने बैठ गए हैं। इसमें समाज की हर इकाई अपना रोल निभाती है इसमें पेरेंट्स, टीचर्स के साथ एजुकेशन सिस्टम का भी हाथ हैं। इससे दसवीं और ग्यारहवीं के बच्चे स्ट्रेस लेते दिखाई दे रहे है और तनाव में रह रहे ये बच्चे खराब रिजल्ट आने के बाद सुसाइड करते नजर आएंगे।

पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज

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