लोगों के लिए बुजुर्ग बना रहे मास्क, बोले-अब यही हमारा तीर्थ

Hisar News - मोक्ष यानी मुक्ति। इंसान जब जिंदगी के सारे अच्छे बुरे समय भोग लेता है तो अंत मे मोक्ष का द्वार खोजता है या यूं...

Apr 05, 2020, 07:46 AM IST

मोक्ष यानी मुक्ति। इंसान जब जिंदगी के सारे अच्छे बुरे समय भोग लेता है तो अंत मे मोक्ष का द्वार खोजता है या यूं कहें आज की पीढ़ी समय से पहले ही माता पिता को मोक्ष ढूंढने के लिए किसी वृद्ध आश्रम में छोड़ देती है। हिसार के वृद्ध आश्रम में भी ऐसे कई सीनियर सिटीजन हैं। लेकिन कोरोना को हराने की इस लड़ाई में इन सीनियर सिटीजन ने मोक्ष का मतलब ही बदल दिया, जब उनके मन में लोगों के लिए मास्क बनाने का ख्याल आया। इसके बात सुनिश्चित हुआ कि आश्रम में चार वृद्ध दलबीर, लाजवंती देवी, राजबाला, ममता शर्मा सिलाई जानते हैं। अब तक मोक्ष आश्रम ने 600 से ज्यादा मास्क बनाएं हैं।आश्रम के संचालक विजय भृगु का कहना है की लोकडाउन के दौरान सभी तीर्थ स्थल हैं। लेकिन उन्होंने अपना तीर्थ लोगों की सुरक्षा में खोज लिया है।

अस्पतालों के साथ-साथ नाकों पर भी हो रहा वितरण

आश्रम से जुड़े विजय भृगु, पंकज संधीर और सुभाष गौतम वितरण के साथ- साथ लोगों को जागरूक करने का काम बखूबी कर रहे हैं। आश्रम में बने मास्क सी.एम.सी अस्पताल, होली हेल्थ अस्पताल इसके साथ ही शहर के जिंदल चोंक, डाबड़ा चोंक कैम्प चोंक, कैम्प चौंक सहित सारे नाकों पर सारे नाकों में तैनात पुलिस को बंटे गए हैं। साथ ही उनसे अपील की गई ह की कोई बिना मास्क के बाहर दिखे तो उसे ये मास्क दें। इसके साथ ही पी.इन.बी बैंक की एक ब्रांच ने आश्रम से मास्क की गुजारिश की है।

इस्तेमाल हुआ आश्रम का कपड़ा, लोगों ने भी किया सहयोग

इस काम में आश्रम ने सारा सूती कपड़ा लगा दिया है। क्योंकि इस वक़्त देश को मास्क की ज्यादा जरूरत है। साथ ही इस काम में आश्रम से जुड़े लोग डोनेशन या कपड़ा उपलब्ध करा कर भी सहयोग कर रहे हैं। मास्क को शुद्ध कॉटन के कपड़े से बनाया जा रहा है और बांधने के लिए इलास्टिक की बजाए कपड़े की डोरी लगाई गई है ताकि लंबे समय तक पहनने से कानों में दर्द न हो।

वृद्ध आश्रम में मास्क बनाते सीनियर सिटीजन। यही मास्क आम लोगों और कर्मचारियों में किए जा रहे वितरित।

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