परिवार का हर सदस्य चलाता है कूची, भरता है सपनों में रंग

Hisar News - सिटी रिपोर्टर

Nov 18, 2019, 07:45 AM IST
सिटी रिपोर्टर
वेदप्रकाश ने बताया कि कला स्वतंत्र है। कला मेरे भावों को स्वतंत्र रूप में पेश करती है। वो पेंटिग्स के जरिए सिर्फ देश भर में ही नहीं बल्कि विदेश में भी सराहे जा रहे है। जिसमें उनकी पेंटिंग्स में खास है उन्हें आध्यत्म से जोड़ना। बातचीत के दौरान वेदप्रकाश ने बताया कि वह जीवन में हर पल उत्सव चाहते थे और यह उत्सव उन्हें कला से मिला। वेदप्रकाश, प|ी विमला देवी, पुत्र सिकंदर, पुत्री चेतना कला को समर्पित है। जिसमें हिसार व अन्य शहराें में वह अपी पेंटिंग्स को प्रजेंट करते हैं।

वेदप्रकाश, प|ी विमला देवी, बेटा सिकंदर और बेटी चेतना सभी कला को लेकर समर्पित, देश ही नहीं विदेश में भी लगा रहे पेंटिंग्स की एग्जीबिशन

पूजा पाठ नहीं बल्कि साक्षी होना है अध्यात्म : वेदप्रकाश ने बताया कि मेरे लिए पूजा पाठ अध्यात्म नहीं बल्कि साक्षी होना है। क्योंकि किसी का भी साक्षी होकर जीवन से पक्षपात, दूसरों से द्वेश भावनाएं खत्म होती हैं। जिससे असली आनंद मिल पाता है और इसी आनंद को समझाने का प्रयास वह अपनी पेंटिग्स में करते हैं।

सिर्फ पेंटिंग्स ही नहीं वाद्ययंत्रों व संगीत में भी है परिवार की रूचि

वेदप्रकाश ने बताया कि जब उनका विवाह हुआ तो पता चला कि उनकी प|ी विमला छोटी छोटी चीजों को सहेज कर रखती व कई अट्रैक्टिव चीजों का रूप देती। इसके बाद ही उनके बेटे और बेटी में भी कला के प्रति समपर्ण भाव नजर आया और वह छोटी सी उम्र से ही पेंटिंग्स बनाने लगे। जिसमें छुपे गहरे मैसेज समाज को प्रभावित भी करते।

सामाजिक बुराइयों से बाहर लाना है जीवन का उद्देश्य

वेदप्रकाश ने बताया कि 1947 के दौरान देश मेें हुई हानि को उनके पिता अपने शब्दों में जब भी व्याख्यान करते तो उन्हें जीवन में लोगों के दुख ही दुख नजर आते। उन्हें जीवन की यात्रा पर अदृश्य नियंत्रण का विचार आया। इन्हीं नियंत्रणों से बाहर आकर सम्पूर्ण में आनंद की खोज के लिए कला को चुना। वह अपनी और पूरे परिवार द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स के जरिए समाज में व्याप्त बुराईयों से बाहर लाना चाहते हैं।

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