हरियाणा / कांग्रेस में वापसी पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर बोले- कांग्रेस में आना होता तो छोड़ता ही क्यों?

सिरसा में प्रेसवार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर। सिरसा में प्रेसवार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर।
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सिरसा में प्रेसवार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर।सिरसा में प्रेसवार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर।

  • हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने सिरसा में मीडिया से बातचीत की
  • उन्होंने कहा- सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों बेकार, सरकार ने जनता से किए एक भी वादे को निभाया नहीं

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 06:54 PM IST

सिरसा. हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर का कहना है कि वे अब कांग्रेस में वापसी नहीं करेंगे। मंगलवार को सिरसा में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान जब तंवर से पूछा गया कि कुछ लोग कह रहे हैं कि वे कांग्रेस में वापसी करेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि गंदे लोग गंदी बात करेंगे, अच्छे लोग अच्छी बात करेंगे, कांग्रेस में आना होता तो पार्टी ही क्यों छोड़ता।

तंवर ने कहा कि करीब 26 साल राजनीति में रहकर लोगों की सेवा की है और अब भी वे लोकहित में जुटे रहते हैं। यह कोई आवश्यक नहीं कि लोकसेवा के लिए कोई राजनीतिक मंच जरूरी हो। 

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को बताया बेकार
सिरसा में मीडिया के साथ बातचीत में तंवर ने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही बेकार हैं। दोनों की भूमिका अभी तक इस स्तर पर नजर नहीं आती कि वे लोकहित में काम कर रहे हैं। सत्ता में बैठे नेताओं ने अभी तक जनता से किए गए अपने किसी भी वादे को नहीं निभाया है।

दिल्ली चुनाव में समान विचारधारा को मजबूत बनाएंगे
दिल्ली में होने वाले चुनावों के मद्देनजर उन्होंने कहा कि दिल्ली उनकी कर्मभूमि रही है। दिल्ली विस चुनावों में राजनीतिक स्थितियों के मुताबिक किस राजनीतिक दल को अपना समर्थन दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यूं तो अनेक राजनीतिक दलों की ओर से उनसे मदद मांगी जा रही है, मगर जिसके साथ समान विचारधारा बनेगी और जो विचारधारा देश को मजबूत बनाएगी, वे उसी को अपना समर्थन देंगे। 

विधानसभा चुनाव से पहले छोड़ी थी कांग्रेस

अशोक तंवर ने विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ दी थी। दरअसल पार्टी ने उन्हें प्रदेशाध्यक्ष पद से हटा दिया था और कुमारी सैलजा को पद दे दिया था। वहीं हुड्डा को चुनाव की कमान सौंपते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद सौंपा था। इससे नाराज तंवर ने पार्टी से बगावत कर इस्तीफा दे दिया था। 

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