फसल बीमा का क्लेम न देने पर कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

Hisar News - प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पहली बार बड़ी कार्रवाई हुई है। योजना में किसानों को क्लेम न देने पर बजाज अनियान्ज...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:35 AM IST
Hansi News - haryana news fraud case filed against company against company
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पहली बार बड़ी कार्रवाई हुई है। योजना में किसानों को क्लेम न देने पर बजाज अनियान्ज बीमा कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। मामला कृषि व किसान कल्याण विभाग की तरफ से दर्ज करवाया गया है। पुलिस को दी शिकायत में विभाग के सहायक सांख्यिकी अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ-2017 में सिंघवा राघो के कुछ किसानों को बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया।

सिंघवा राघो व सिंघवा खास बैंक की क्लेरिकल मिसटेक की वजह से बीमा देने से मना किया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2017 की गाइड लाइन के अनुसार बैंकों को किसानों के खाते में प्रीमीयम लेकर बीमा कंपनी को देना होता है। एसबीआई भाटला ने अपने पत्र के तहत बताया कि संबंधित किसानों का प्रीमियम काटकर बजाज अलियान्ज बीमा कंपनी को दे दिया। उन्होंने कहा कि कुछ किसानों का गांव क्लेरिकल मिसटेक की वजह से सिंघवा राघो की जगह सिंघवा खास लिखा गया।

सिंघवा राघो में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियमानुसार कपास व बाजरे की फसल का कलेम बनता है। इस संबंध मे क्लेरिकल मिसटेक का बहाना बनाकर बीमा कंपनी ने किसानों को क्लेम देने से मना कर दिया। बीमा कंपनी किसानों से प्रीमियम लेकर और मुआवजा न देकर किसानों से धोखाधड़ी की है। अधिकारी ने पुलिस से कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कंपनी के खिलाफ धारा 420 में मामला दर्ज कर लिया है।

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मिलते-जुलते मामले में फसल बर्बाद होने पर मुआवजा नहीं मिला तो किसानों ने आंदोलन कर दिया। भाटोल जाटान में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के सामने 25 जनवरी को बेमियादी धरना शुरू किया गया था। छह गांवों भाटोल जाटान, भाटोल रांगड़ान, जीतपुरा, सीसर, खरकड़ा व बडाला के किसान धरने पर बैठे। किसानों का कहना था कि बैंक द्वारा छह गांवों के किसानों का फसल बीमा खरीफ 2017 का प्रीमियम समय पर बीमा कंपनी में न पहुंचने के कारण किसान मुआवजा से वंचित रह गए। धरना दो सप्ताह से अधिक समय तक चला और सियासी मुद्दा बना। दीपेंद्र हुड्डा सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने मौके पर जाकर किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। आखिरकार बैंक ने किसानों को मुआवजे का भुगतान किया, जिसके बाद आंदोलन खत्म हुआ।

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