गंगा का जल, वृक्ष का फल और सूरज की तरह सबके होते हैं संत : भक्ति प्रिया
संत किसी वर्ग, जाति और समाज के लिए नहीं अपितु वे सबके होते हैं और जिसमें केवल प्राणी मात्र का कल्याण हो, वही उनकी हार्दिक भावना रहती है।
ये शब्द साध्वी बाल व्यास भक्ति प्रिया ने कहे। वह डाेगरान माेहल्ला स्थित हनुमान मंदिर में चल रही पांच दिवसीय कथा के चौथे दिन प्रवचन कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि जैसे गंगा का जल और वृक्ष का फल सबके लिए होता है, वैसे ही संतों का आशीर्वाद और अनुभव भी सबके लिए होता है। सूरज तपता है, नदी बहती है सबके लिए, दीपक जलता है सबके लिए वैसे ही संत भी सबके लिए होते हैं। इस अवसर पर डॉक्टर रमेश चन्द हसीजा, डॉक्टर सुदर्शन हसीजा के साथ नरेन्द्र नागपाल, मास्टर राम शरण भुटानी, विजय निझावन, मनोज मनचन्दा, त्रिलोक डालमिया, सुशील जैन, कृष्ण बाल्मीकि, कृष्णा देवी, आशा शर्मा, उषा शर्मा, गुलशन वधवा आदि अनेक श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचनों का धर्म लाभ कमाया। मंदिर के सचिव कृष्ण मदान ने बताया कि वार्षिकोत्सव के रविवार काे कथा सुबह शुरू हाेगी।