टपक सिंचाई औैर बांस विधि से सब्जियां उगाने पर 8 से 31 हजार रुपए तक मिलेगा अनुदान

Hisar News - जिस खेत में सब्जी वाली फसल लगानी होती है। उसे पहले अच्छे से जुताई कर लें, फिर उसमें गोबर की खाद और मिट्टी परीक्षण...

Jan 16, 2020, 07:41 AM IST
Hisar News - haryana news grants will be given from 8 to 31 thousand rupees for drip irrigation and vegetable cultivation
जिस खेत में सब्जी वाली फसल लगानी होती है। उसे पहले अच्छे से जुताई कर लें, फिर उसमें गोबर की खाद और मिट्टी परीक्षण करवाकर उचित मात्रा में खाद डाल दें। खाद देने के बाद खेत में उठी हुई क्यारी बना लें। उसके ऊपर ड्रिप सिंचाई की पाइप लाइन को बिछा लें। पाइप लाइन बिछाने के बाद 25 से 30 माइक्रोन प्लास्टिक या घास-फूस की मल्च फिल्म जो कि सब्जियों के लिए बेहतर रहती है, उसे उचित तरीके से बिछा दें। फिर फिल्म के दोनों किनारों को मिट्टी की परत से दवा दिया जाता है। इसे आप ट्रैक्टर की मशीनरी द्वारा भी दवा सकते हैं।

महबूब अली | हिसार

प्रदेशभर के किसानों के लिए खुशखबरी है। कलेस्टर डवलपमेंट प्राेग्राम के तहत सब्जियां उगाने पर किसानों काे प्रति एकड़ जहां 8 हजार रुपए अनुदान के रूप में दिए जायेंगे। वहीं बांस, टपक सिंचाई विधि से सब्जियां उगाने पर 8 से लेकर 31 हजार रुपए तक की मदद िमलेगी। उद्यान विभाग किसानाें काे याेजना का लाभ लेने की अपील कर रहा है। हिसार में 100 हेक्टेयर भूमि पर किसानों काे अनुदान देने का लक्ष्य है।

हाइब्रिड सब्जियों से प्रदेश समृद्ध नजर अाएगा। उद्यान विभाग की किसानों काे आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की तैयारी है। हिसार के जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र कुमार सिहाग ने बताया कि कलेस्टर डवलपमेंट प्राेग्राम के तहत हाईब्रिड सब्जियों की खेती करने पर प्रति एकड़ किसान काे 8 हजार रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा। मगर याेजना के तहत कुछ शर्ते भी है। अनुदान उन्हें दिया जाएगा जाे टपका सिंचाई, लाेटनल विधि, बांस विधि या फिर मल्चिंग विधि से सब्जियों काे उगाएगा। इनमें से किसी एक विधि से सब्जी काे उगाना जरूरी है। टपक सिंचाई विधि से सब्जी उगाने पर 85 प्रतिशत, लाेटनल विधि पर पचास, बांस विधि पर प्रति एकड़ 31250 रुपए जबकि मल्चिंग विधि पर 6400 रुपए प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाता है। यदि किसान सभी विधि अपनाता है ताे उन्हें प्रत्येक विधि के तहत अनुदान दिया जाएगा। बताया कि किसानों काे मेसेज या फिर वॉट्सएप के माध्यम से भी याेजना के बारे में जानकारी दी जा रही है। किसानों ने याेजना के लिए आवेदन कराने भी शुरू कर दिए है। विभाग की साइट पर जाकर या फिर कार्यालय में अाकर याेजना के तहत आवेदन किया जा सकता है। विभागीय अधिकारियाें के अनुसार याेजना के तहत किसानों का उत्पाद जाया न जाए, इसके लिए उन्हें यदि आवश्यकता है ताे प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सुरक्षित भंडारण के लिए काेल्ड स्टाेराें के निर्माण की भी प्लानिंग की जा रही है। अालू, मटर, गाेभी, टमाटर औैर अन्य सब्जियों की खेती की सकती है।


लाभ : जल उपयोग दक्षता 95 प्रतिशत तक होती है जबकि पारम्परिक सिंचाई प्रणाली में जल उपयोग दक्षता लगभग 50 प्रतिशत तक ही होती है। इस सिंचाई विधि में जल के साथ-साथ उर्वरकों को अनावश्यक बर्बादी से रोका जा सकता है।

यह है टपक सिंचाई

ये फसलें करना कारगर

यह लम्बी दूरी वाली फसलों के लिए उपयुक्त होती है। सेब, अंगूर, संतरा, नीम्बू, केला, अमरूद, शहतूत, खजूर, अनार, नारियल, बेर, आम आदि जैसी फल वाली फसलों की सिंचाई टपक सिंचाई विधि द्वारा की जा सकती है।

यह है मल्चिंग विधि

लाेटनल विधि : इस तकनीक में टनल (सुरंग) में सब्जियां पैदा की जाती हैं। लोहे के सरिये और पॉलीथिन शीट से छोटी व लंबी टनल बनाई जाती हैं। इनमें सब्जियों को बोने के बाद ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की जाती है। इससे सब्जी को ज्यादा गर्मी और सर्दी से बचाया जा सकता है।

बांस विधि : इस विधि के अतगर्त बांस के ऊपर सब्जियों की बेल काे चढ़ाना हाेता है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह हाेता है कि दूसरी फसल भी खेत में बाेई जा सकती है।

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