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एचओडी : दफ्तरों में टेबल, फोन, की-बोर्ड और आसपास रखें सफाई होटल संचालक: कमरों और होटल परिसर को नियमित करें क्लीन

एक वर्ष पहले
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स्वास्थ्य विभाग की इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) शाखा ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया है। सभी सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों और होटल, लॉज एवं धर्मशालाओं के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनकी पालना से वायरस से बचाव एवं रोकथाम संभव है। हिदायत दी है कि सभी विभागों के एचअाेडी काे दफ्तरों की टेबल, फोन, की-बोर्ड की नियमित सफाई रखनी हाेगी। इनका अधिकारी-कर्मचारी हाथों से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिनके जरिए एक-दूसरे में संक्रमण फैल सकता है।

इसके अलावा टेबल के नीचे रखे डस्टबिन समय-समय पर साफ हों, ताकि उसमें पानी, बचा हुआ खाना इत्यादि से बीमारी फैलने की संभावना न रहें। अगर किसी को खांसी व जुकाम है तो उसे डॉक्टर की सलाह से इलाज करवाते हुए मास्क लगाना होगा। जुकाम है तो टिशू पेपर का इस्तेमाल करके उनका निस्तारण करें। बार-बार रूमाल का इस्तेमाल भी संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है। इसके अलावा होटल, लॉज व धर्मशाला संचालकों को ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। इनके यहां कोई प्रवासी ठहरता है जोकि वायरस की चपेट में आए राज्यों या देश से आया हुआ है तो उसकी संपूर्ण जानकारी एक परफोर्मा में दर्ज करनी होगी। बकायदा, 14 दिन की ट्रेवल हिस्ट्री लेनी अनिवार्य है। अगर विजिटर्स वायरस ग्रस्त इलाकों से होकर आया है, खांसी व जुकाम है तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने ग्राउंड लेवल पर अवेयरनेस के लिए आशा, एएनएम सहित अन्य हेल्थ वर्करों को प्रशिक्षण दिया है।

सिविल अस्पताल में रोगी को दाखिल करने, सैंपल लेने और रेफर के लिए किया माॅक ड्रिल : सिविल अस्पताल में शुक्रवार को कोरोना वायरस से रोकथाम के लिए मॉक ड्रिल की गई। स्वास्थ्य अमला इलाज, बचाव एवं रोकथाम के लिए कितना तैयार है, उसका पता लगाने को मॉक ड्रिल हुई। मॉक ड्रिल में एक संदिग्ध मरीज की पहचान होने पर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल में आउटर साइड से आइसोलेशन वार्ड में ले जाया गया। वार्ड में दाखिल होने के बाद जांच के लिए रेपिड रिस्पांस टीम (फिजिशियन डॉ. अजीत लाठर, डाॅ. अजय चुघ, ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. विमल जैन, डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई) भी पर्सनल प्रोटेक्टिव किट पहनकर तैयार हो गई। वार्ड में जाकर टीम ने मरीज की हिस्ट्री लेकर फ्लू के लक्षणों का पता लगाया। सैंपल लेने की जरूरत है या नहीं, उसके बारे में विचार-विमर्श किया।

कोराना वायरस के लक्षण


गले में दर्द, जुकाम, खांसी, बुखार आना कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। इसके अलावा पूरे दिन सिर दर्द रहना, नाक बहना, तेज खांसी आना, अस्वस्थ महसूस करना, छाती में दर्द होना एवं सांस लेने में दिक्कत होना आदि लक्षण हैं।

बचाव एवं रोकथाम


{वायरस से संभावित व्यक्ति को अलग रखें

{हाथ न मिलाएं।

{यात्रा करने से बचें।

{हाथों को एंटी सेप्टिक साबुन-लिक्विड से धोएं।

{गुनगुना पानी का सेवन करें।

{खांसते-छींकते हुए रूमाल का इस्तेमाल करें।

फ्लू क्लीनिक में करवाएं जांच


जिला उपायुक्त ने बताया कि अधिनियम के अनुसार जिला के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना रोग के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अपने परिसर में फ्लू क्लीनिक बनाए जाने अनिवार्य हैं। कोई भी निजी लैबोरेटरी कोविड-19 का टेस्ट सैंपल लेने के लिए अधिकृत नहीं है। इस प्रकार के सभी सैंपल भारत सरकार की गाइडलाइंस के अंतर्गत ही लिए जा सकते हैं जिन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा नामित डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर के माध्यम से निर्धारित लैब में ही भेजा जाएगा।

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